दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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शनिवार, फ़रवरी 28, 2015

नुकसान रहित डिओड्रेंट घर पर बनायें

Create a Natural Deodorants at home

बाजारी डिओड्रेंट से शरीर को नुक्सा

पसीने की बदबू से छुटकारा पाने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय बरसों से करते रहे हैं। कभी टेलकम पाउडर का सहारा लिया, तो कभी कपूर का। पिछले कुछ बरसों से डिओडरेंट पुरजोर इस्तेमाल में है। लेकिन खुशबू फैलाने वाले डियो के इस्तेमाल के कुछ नुकसान भी हैं। इसलिए राजेश मिश्रा द्वारा बताये गए नुस्खे से आप घर पर डिओड्रेंट बनाये ये आपके शरीर को नुक्सान नहीं पहुंचाएगा.. 

पसीना और बदबू : राजेश मिश्रा

  • बदबू हमारे शरीर में पसीने के जरिए पनपती है।
  • हालांकि पसीना अपने आप में बदबूरहित होता है। जब शरीर पर पनपने वाले माइक्रोस्कोपिक बैक्टीरिया इसके साथ मिलते हैं, तब बदबू पैदा होती है।
  • पसीने की बदबू के लिए कई बार शरीर के कुछ हार्मोन जिम्मेदार होते हैं, तो कई बार खानपान या वातावरण इसकी वजह बनता है।
  • लेकिन बदबू पनपने की सबसे बड़ी वजह है पसीने के साथ बैक्टीरिया का मिलना, जो हमारे शरीर में ही रहते हैं और पसीने के साथ मिलकर तेजी से बढ़ते हैं।

डियो का रोल : राजेश मिश्रा

  • डियो शरीर में बदबू फैलाने वाले बैक्टीरिया पर असर डालता है। हालांकि यह पसीना आने से नहीं रोक पाता।
  • इसमें मौजूद केमिकल्स खुशबू पैदा करते हैं।

डियो से नुकसान : राजेश मिश्रा

  • कंज्यूमर एजुकेशन ऐंड रिसर्च सोसायटी (सीईआरएस) की मैगजीन इनसाइट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कुछ डियोडरेंट या ऐंटिपर्सपिरेंट स्किन, आंखों और लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • डियो में इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल अल्जाइमर और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं।
  • डियो में इस्तेमाल होने वाला ऐंटि-बैक्टीरियल फेफड़े और लिवर डैमेज की वजह बन सकता है।
  • यूएस एफडीए के मुताबिक गुर्दे की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए डियो का नियमित इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है। इसमें इस्तेमाल होने वाला ऐल्युमिनियम उनके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है।
  • डियो से कपड़ों का रंग खराब होने के अलावा कॉटन और लिनेन जैसे फैब्रिक का फाइबर खराब होने का खतरा भी रहता है।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग - राजेश मिश्रा

आप लगभग एक तिहाई कप सिरका (एसिटिक एसिड) और इतनी ही मात्रा में पानी लिया ले और इसे अच्छी तरह से आपस में घोल लिया जाए और उबाल आने तक गर्म किया जाए। दूसरी तरफ एक अलग बर्तन में तीन लौंग, धनिया और पुदीना की थोड़ी ताजी पत्तियाँ, लगभग 4 पत्तियाँ नीलगीरी की और एक ग्राम दालचीनी की छाल का चूर्ण लिया ले । और इन सभी को गर्म सिरके और पानी के गर्म घोल में डाला जाता है। तुरंत इसे छान लिया जाए और ठंडा होने पर बंद जार रखकर रेफ्रिजेटर में रख दे । प्रतिदिन नहाने के बाद थोड़ी मात्रा इस मिश्रण की लेकर अपनी बाहों और पसीना ज्यादा आने वाले शारीरिक अंगों पर लगाया जाए तो यह शरीर की दुर्गंध को खत्म करता है और पसीना आने का सिलसिला भी रोक देता है। धीरे धीरे आपको एक हलकी सुगंध का भी एहसास होगा और नुकसान दायक भी नहीं है .

कार के अंदर की गंध दूर करने के देसी नुस्खे:-राजेश मिश्रा

दो बड़े कटोरे ले लीजिए, दोनो में नैप्किन या टोवेल रख दें, इस पर सिरका या जिसे विनेगर कहते है डालना शुरू करिए, ऐसा तब तक किया जाए जब तक कि नैप्किन या टोवेल पूरी तरह से सिरके को सोख ले, यानि गीला हो जाए। एक कटोरे को कार की अगली सीट के नीचे और दूसरा पिछ्ले सीट के फ़्लोर पर एक पूरी रात के लिए रख दिया जाए। अगले दिन सुबह सिरके को निचोड़ कर फ़ें क दिया जाए और कपड़े को धो लिया जाए, एक और रात के लिए यही प्रकिया अगली शाम को दोहरायी जाए, गंध दूर हो जाएगी।
एक अन्य उपाय के अनुसार सेव काटकर टुकड़े तैयार किए जाएं और कप या छोटी कटोरी में डालकर कार की सीट्स के नीचे फ़्लोर पर रख दिये जाएं, एक दो दिन में ये टुकड़े सिकुड़ जाएंगे, फि़र एक बार यही प्रक्रिया दोहरायी जाए, धीमे धीमे गंध दूर हो जाएगी।
कार फ़्लोर पर काफी पावडर छिड़क दिया जाए तो भी कार की गंध दूर हो जाती है।

मिनटों में हो जायेगा चेहरा सुन्दर

घरेलु नुस्खों से चेहरे को निखारिए
Household Tips to Improve Face

सुंदर दिखना हर किसी की चाहत होती है। इसके लिए जरूरी नहीं है कि आप मंहगे उत्पाद का प्रयोग करें या ब्यूटी पार्लर का रुख करें। चेहरे की खूबसूरती को निखारने के लिए जरूरी है कि आप इसका खास खयाल रखें। जानिए * राजेश मिश्रा से कुछ आसान उपाय जिनसे आपकी खूबसूरती निखार जाएगी और रौनक बरकरार रहेगी। 
  • कच्चे दूध में रूई का फाहा भिगोकर चेहरा साफ़ करने से कील मुहाँसे और झाँई दूर होकर त्वचा स्वस्थ बनती है।* राजेश मिश्रा 
  • हल्दी और चंदन का चूर्ण दूध में भिगोकर चेहरे पर लगाने से थकी और मुरझाई त्वचा स्वस्थ होती है।
  • तरबूज़ के रस को चेहरे पर लगाएँ और सूख जाने पर धो दें। इससे दाग धब्बे दूर होते हैं तथा त्वचा साफ़ होकर निखर जाती है।* राजेश मिश्रा 
  • मसूर की दाल और दूध के उबटन में घी मिलाकर शरीर पर लगाने से त्वचा नर्म और चमकदार बन जाती है।* राजेश मिश्रा 
  • एक एक-एक चम्मच ग्लिसरीन, गुलाबजल और नींबू का रस मिलाकर हाथों से मलें और सूख जाने पर धो दें। इससे सख्त हाथ मुलायम हो जाएँगे।* राजेश मिश्रा 
  • उँगलियों पर ज़रा-सा बादाम या जैतून का तेल लेकर नियमित रूप से भौंहों और बरौनियों पर लगाने से वे घनी और चमकदार बन जाती हैं।* राजेश मिश्रा 
  • बालों में चमक लाने के लिए १ प्याला पानी मे ३ बडे चम्मच सफेद सिरका मिलाकर लगाएँ और १५ मिनट बाद धो दें।* राजेश मिश्रा 
  • आँखों के पास गहरे घेरों और सूजन के लिए खीरे के पतले टुकड़ों को आँखों पर रखकर बीस मिनट आराम करें, फिर चेहरा धो दें।* राजेश मिश्रा 

ऎसे हटाए चेहरे के दाग* राजेश मिश्रा 

  • सूखी हल्दी की गांठ को नींबू के रस में मिलाकर लगाने से भी दाग-धब्बे तेजी से मिटने लगते हैं। सूखी त्वचा के दाग-धब्बे मिटाने के लिए दूध में चंदन की लकड़ी घिसकर लगाएं।
  • तैलीय त्वचा के दाग-धब्बे मिटाने के लिए चंदन का बूरा गुलाब जल में मिलाकर लगाएं। यह प्रयोग हर मौसम में लाभकारी है। चोट के निशान पर लाल चंदन रोज पानी में घिस कर लगाएं 20 दिन में फायदा नजर आने लगेगा।
  • टमाटर में नींबू की दस-बारह बूंदे मिलाएं इस मिश्रण को चेहरे पर मलने से दाग-धब्बे दूर होते हैं। अक्सर पेट की खराबी से चेहरे पर दाग-धब्बे नजर आते हैं अत: दिन में कम से कम तीन बार नींबू पानी पिएं, कुछ ही हफ्तों में चेहरा चमकने लगेगा।
  • गुलाब जल को आइस ट्रे में जमाकर क्यूब्स को आंखों के इर्द-गिर्द घुमाने से आँखें तरोताजा तो होती हैं, उसकी जलन भी कम हो जाती है।
  • इसी तरह खीरे के रस का प्रयोग भी आँखों के लिए किया जा सकता है। साथ ही झुलसी त्वचा के लिए भी यह कारगर उपाय होगा।
  • एक चुटकी कपूर को शहद में मिलाकर चेहरा धोएं, चेहरा खिल जाएगा। साथ ही साबुन से चेहरा धोने के बाद गीले चेहरे पर चीनी और नमक लगाकर थोड़ी देर रखें और फिर उसे धो लें। यह चेहरे के लिए अच्छा स्क्रबर होगा।
यदि आप स्थाई तौर पर अपने चेहरे को बेदाग व खूबसूरत बनाना चाहते हैं तो इन आसान टिप्सों को आजमाइएँ -
  1. चेहरे पर हर रोज चंदन पावडर, गुलाब जल व हल्दी को मिलाकर इनका लेप लगाएँ। रोजाना यह लेप चेहरे पर लगाने से आपके चेहरे की रंगत निखरती है। 
  2. ऐलोवेरा के पत्तों की ऊपरी परत निकालकर उसके गूदे को चेहरे पर मलने से धीरे-धीरे दाग-धब्बे कम होने लगते हैं। 
  3. हर रोज त्वचा पर शहद लगाने से त्वचा के दाग-धब्बे कम पड़ने के साथ-साथ त्वचा का रूखापन भी दूर होता हैं। 
  4. आप चाहे तो मौसमी फलों जैसे केला, संतरा, पपीता, आम आदि का गूदा अपने चेहरे पर लगा सकते हैं। फलों के पैक को लगाने से भी चेहरे के दाग-धब्बे मिटते हैं।
अपने मुखड़े को चांद का टुकड़ा बनायें, मनुष्य का चेहरा उसके व्यक्तित्व का आईना होता है। शायद इसीलिए स्त्रियां अपने चेहरा निखारने के लिए प्रयासरत रहती हैं। इसके लिए महंगे सौंदर्य प्रसाधन इस्तेमाल करती हैं। पर मध्यवर्गीय महिलायें इसे आसानी से प्रयोग नहीं कर पातीं। तो फिर क्यों ना सस्ते व आसान तरीके से अपने मुखड़े को निखारा जाये।
  • चेहरे पर गुलाबीपन लाने के लिये कच्चे दूध में नींबू का रस व नमक मिलाकर नहाने से पहले मलें। दूध में ब्रेड के काटन (साइड) भिगा दें। कुछ देर बाद उससे मुंह पर मालिश करें। कुछ ही दिनों में चेहरा फूल की तरह खिल जायेगा।
  • शहद में जरा सी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगायें इससे चेहरे की मैल निकल जायेगी व चेहरा साफ व ताजातरीन होगा।
  • पुदीने की पत्तियों को उबलते पानी में डाले, फिर छान लें। इससे चेहरे की नियमित सफाई करने से चेहरा तरोताजा बना रहेगा।
  • केले को मैश करके एक चम्मच दूध मिलाएं। इसे चेहरे पर लगायें पंद्रहृ-बीस मिनट तक चेहरा थपथपा कर सुखा लेंफिर ठंडे पानी से धो लें इससे झुर्रियां दूर होंगी।
  • एक चम्मच सौंफ को पानी में अच्छी तरह से उबालें। जब गाढ़ी हो जाए तो थीड़ी मात्रा में शहद मिला लें।। इसे चेहरे पर लगाने के दस मिनट बाद धो लें। इससे झुर्रियां दूर होकर चेहरे पर चमक आयेगी।
  • आलू को कद्दूकस करके पूरे चेहरे पर लगायें। बीस मिनट रखें फिर धो लें। इससे चेहरा नरम होगा. अगर त्वचा तैलीय हो तो ज्यादा फायदेमंद होगा।
  • र्दन व आंखों के नीचे कालापन- कच्चा खीरा, आलू कद्दूकस करके चेहरे पर रगड़े, कालीमा दूर हो जाएगी।
  • टमाटर बहुत फायदेमंद है। टमाटर पीसकर लगायें, अगर त्वचा सूखी हो तो टमाटर में दही मिलाकर लगायें। चेहरा खिल उठेगा।
  • खीरा – त्वचा के लिए बेहतरीन है। खाने से या लगाने से चेहरे पर गहरा असर पड़ता है। नींबू त्वचा को कसता है। अगर आप इसमें नींबू मिलायें तो ना सिर्फ चेहरा कस जायेगा, बल्कि उसमें उज्ज्वलता आएगी।
  • तरबूज एक अच्छा मॉइश्चराइजर है। इसे थोड़ा मथ लें और चेहरे पर लगायें। सूखने पर धो लें ठंडे पानी से। गर्मी में त्वचा के लिए बहुत अच्छा है।
  • क्या आपकी त्वचा थकी-थकी व झुलसी है। तो घबरायें नहीं। एक आड़ू लेकर उसका छिलका निकाल कर गूदा शहद में मिला दें। थोड़ा सा दूध मिला लें। इसे चेहरे पर आधा घंटा तक लगातार लगाये रखें। फिर नींबू डालकर गुनगुने पानी से धो लें। देखेंगे कि आपका चेहरा किस तरह दमकता है।
  • झाईयों के लिए केले का पैक असर दिखाता है। एक पका केला दही के साथ मथ लें। इसे चेहरे व गले पर लगा लें, चेहरे की झाईयां और काले निशान इसके लगातार इस्तेमाल से दूर हो जाएंगे।
  • चोकर- क्या आपके चेहरे पर मुंहासें हैं। तो गेहूं का चोकर फेंकिए मत, इसे जमा करके थोड़ा सा चोकर इसमें थोड़ा शहद, मलाई मिला लें। इसे चेहरे पर लगातार धीरे-धीरे मलें-माथे पर, बाहों पर और पैरों पर भी लगायें और मलते रहें, जब सूखने लगे तो धो लें। यह मुंहासों को मिटाता है, त्वचा का सूखा मांस उतारता है।
  • गेंदे के फूलों की पत्तियों को पानी में भिगो लें। थोड़ी देर बाद मसल लें और ग्लिसरीन मिलाकर चेहरे पर लेप करें। थोड़ी देर बाद धो लें। यह त्वचा के लिए अनोखी खुराक है।
  • झुर्रियां- चेहरे पर झुर्रियां, दाग-धब्बे हों तो पपीते का गूदा, ताजा दही और कपूर मिलाकर लगायें।
  • झाईयां- चेहरे पर मुंहासों के दाग, झाईयां हों, आंखों के नीचे काले घेरे, चेहरा भद्दा, कुरूप दिखाई दे तो तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच, नींबू रस दो चम्मच मिलाकर हल्के-फुल्के अंगुलियों से या रूई से सुबह व रात को प्रभावित त्वचा पर लगाकर मलें और 20-25 मिनट लगा रहने दें, फिर गुनगुने पानी से धो लें ।



शरीर पर किसी भी जगह दाग का होना परेशानी पैदा करता है और यदि दाग चेहरे पर हो तो ज्यादा परेशानी सहनी पड़ती है। ऎसा माना जाता है चेहरा शरीर का सबसे मुख्य हिस्सा है और वो दागी हो तो परेशानी बड़ी हो जाती है।
दाग एक तरह से सौंदर्य से संबंधित समस्या है और शोध बताते हैं ये दाग अक्सर जलने की वजह से, सड़क दुर्घटनाओं में लगी चोट की वजह से, या फिर किशोरावस्था में हॉर्मोनल च ेजेस के साथ होने वाले मुंहासों की वजह से हो सकते हैं।
दाग व धब्बे किसी भी कारण से हो सकते हैं। ऎसे दाग हटाने के लिए लोग अक्सर नई-नई क्रीम का इस्तेमाल करते हैं। पर कोई सुधार नजर नहीं आता। इन दवाओं और क्रिम को लगाने से ये दाग हल्के हो जाते हैं लेनि जड़ से नहीं हटते।
अब इन्हें हटाने के लिए कई उपचार उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से इनमें ऎसे सुधार किए जाते हैं कि ये करीब-करीब गायब ही हो जाते हैं।
दाग धब्बों को हटाने के लिए जो चिकित्सा उपलब्ध हैं, उनमें स्कार रिवीजन सर्जरी, फैट इंजेक्शन सर्जरी और लेजर ट्रीटमेंट को खास तौर अपनाया गया है और उसका लाभ भी हुवा है। हम यहां आपको उन्हीं में से कुछ इलाज की विधियों के बारे में बता रहे हैं-
एक्सपर्टस ने बताया सबसे आधुनिक फैट इंजेक्शन सर्जरी है। यह चोट के दाग-धब्बों के साथ-साथ जलने के कारण बने दागों व निशानों और मुंहासे के कारण बने दाग-धब्बों को मिटाने में कारगर साबित हुई है। यह इलाज का तरीका धब्बे को ठीक करने के लिए बेहद उपयोगी है।
फैट इंजेक्शन सर्जरी के अंतर्गत रोगी की वसा कोशिकाओं को ही इंजेक्शन के जरिए इस्तेमाल किया जाता है। फैट ग्राफ्टिंग की यह प्रक्रिया रोगी के शरीर से लाइपोसक्शन विधि के माध्यम से वसा प्राप्त करने के साथ शुरू होती है। यह वसा पेट या कूल्हे के पास से ली जाती है। इसकी प्रोसेसिंग करने के बाद सर्जन इसे दोबारा धब्बे वाली त्वचा के नीचे इंजेक्ट कर देता है।
इसके बाद दूसरा तरीका जो आजकल चलन में है वो है स्कार रिवीजन सर्जरी। चोट की वजह से होने वाले ज्यादातर धब्बों को परंपरागत स्कार रिवीजन सर्जरी के जरिए ठीक किया जा सकता है। चेहरे के धब्बों के लिए यह सर्जरी बेहोश किए बगैर की जा सकती है। इस विधि से धब्बे को सर्जरी की सहायता से हटा दिया जाता है।

शुक्रवार, फ़रवरी 27, 2015

माहवारी (मासिक धर्म) के सभी दोषों को ऐसे दूर करें

Periods (Menses) : Remove all the defects
अनियमित माहवारी के लिए आयुर्वेदिक

मासिक धर्म स्त्री में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।  यदि मासिक धर्म में अनियमितता होती है तो स्त्री के शरीर में अन्य विकार उत्पन्न हो जाते है।  इसका कारण शरीर के भीतर किसी रोग का होना भी हो सकता है।  इसके सुचारु रूप से न होने पर स्त्री जीवन भर मातृत्व सुख से वंचित रह जाती है। 

कारण

शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य, खून की कमी, मैथुन दोष, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, ठंड लग जाना, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना, शोक, क्रोध, दुःख, मानसिक उद्वेग, तथा मासिक धर्म के समय खाने-पीने में असावधानी - इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय से नहीं होता। 

पहचान

गर्भाशय के हिस्से में दर्द, भूख न लगना, वमन, कब्ज, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, दिल धड़कना, सांस लेने में तकलीफ, कान में तरफ-तरह की आवाजें सुनाई पड़ना, नींद न आना, दस्त लगना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, पैर व कमर में दर्द, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण है। 

1. किशमिश: पुरानी किशमिश को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे लगभग 200 मिलीलीटर पानी में रात को गोकर रख दें। सुबह इसे उबालकर रख लें। जब यह एक चौथाई की मात्रा में रह जाए तो इसे छानकर सेवन करने से मासिक-धर्म के सभी दोष नष्ट हो जाते हैं। * राजेश मिश्रा 
2. तिल: काले तिल 5 ग्राम को गुड़ में मिलाकर माहवारी (मासिक) शुरू होने से 4 दिन पहले सेवन करना चाहिए। जब मासिक धर्म शुरू हो जाए तो इसे बंद कर देना चाहिए। इससे माहवारी सम्बंधी सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। लगभग 8 चम्मच तिल, एक गिलास पानी में गुड़ या 10 कालीमिर्च को (इच्छानुसार) पीसकर गर्म कर लें। आधा पानी बच जाने पर 2 बार रोजाना पीयें, यह मासिक-धर्म आने के 15 मिनट पहले से मासिकस्राव तक सेवन करें। ऐसा करने से मासिक-धर्म खुलकर आता है। 14 से 28 मिलीलीटर बीजों का काढ़ा एक ग्राम मिर्च के चूर्ण के साथ दिन में तीन बार देने से मासिक-धर्म खुलकर आता है। तिल, जौ और शर्करा का चूर्ण शहद में मिलाकर खिलाने से प्रसूता स्त्रियों की योनि से खून का बहना बंद हो जाता है। * राजेश मिश्रा 
3. ज्वार: ज्वार के भुट्टे को जलाकर इसकी राख को छान लें। इस राख को 3 ग्राम की मात्रा में पानी से सुबह के समय खाली पेट मासिक-धर्म चालू होने से लगभग एक सप्ताह पहले देना चाहिए। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। * राजेश मिश्रा 
4. चौलाई: चौलाई की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें। इसे लगभग 5 ग्राम मात्रा में सुबह के समय खाली पेट मासिक-धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिनों पहले सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। * राजेश मिश्रा 
5. असगंध: असगंध और खाण्ड को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें, फिर इसे 10 ग्राम लेकर पानी से खाली पेट मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। * राजेश मिश्रा 
6. रेवन्दचीनी: रेवन्दचीनी 3 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय खाली पेट माहवारी (मासिक धर्म) शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। * राजेश मिश्रा 
7. कपूरचूरा: आधा ग्राम कपूरचूरा में मैदा मिलाकर 4 गोलियां बनाकर रख लें। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक गोली का सेवन माहवारी शुरू होने से लगभग 4 दिन पहले स्त्री को सेवन करना चाहिए। मासिक-धर्म शुरू होने के बाद इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। 
8. राई: मासिक-धर्म में दर्द होता हो या स्राव कम होता हो तो गुनगुने पानी में राई के चूर्ण को मिलाकर, स्त्री को कमर तक डूबे पानी में बैठाने से लाभ होता है।* राजेश मिश्रा 
9. मूली: मूली के बीजों का चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ 3-3 ग्राम सेवन करने से ऋतुस्राव (माहवारी) का अवरोध नष्ट होता है। सुरेश चौहान 10. अडूसा (वासा): अड़ूसा के पत्ते ऋतुस्त्राव (मासिकस्राव) को नियंत्रित करते हैं। रजोरोध (मासिकस्राव अवरोध) में वासा पत्र 10 ग्राम, मूली व गाजर के बीज प्रत्येक 6 ग्राम, तीनों को 500 मिलीलीटर पानी में पका लें। चतुर्थाश शेष रहने पर यह काढ़ा कुछ दिनों तक सेवन करने से लाभ होता है।
11. कलौंजी: 2-3 महीने तक भी मासिक-धर्म के न होने पर और पेट में भी दर्द रहने पर एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और 2 चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम को खाना खाने के बाद सोते समय 30 दिनों तक पियें। नोट: इस प्रयोग के दौरान आलू और बैगन नहीं खाना चाहिए। * राजेश मिश्रा  
12. विदारीकन्द: विदारीकन्द का चूर्ण 1 चम्मच और मिश्री 1 चम्मच दोनों को पीसकर 1 चम्मच घी के साथ
मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से मासिक-धर्ममें अधिक खून आना बंद होता है। विदारीकन्द के 1 चम्मच चूर्ण को घी और चीनी के साथ मिलाकर चटाने से मासिक-धर्म में अधिक खून आना बंद हो जाता है।
13. उलटकंबल: उलटकंबल की जड़ की छाल का गर्म चिकना रस 2 ग्राम की मात्रा में कुछ समय तक रोज देने
से हर तरह के कष्ट से होने वाले मासिक-धर्म में लाभ मिलता है। * राजेश मिश्रा 
  • उलटकंबल की जड़ की छाल को 6 ग्राम लेकर 1 ग्राम कालीमिर्च के साथ पीसकर रख लें। इसे मासिक धर्म से 7 दिनों पहले से और जब तक मासिक-धर्म होता रहता है तब तक पानी के साथ लेने से मासिक-धर्म नियमित होता है। इससे बांझपन दूर होता है और गर्भाशय को शक्ति प्राप्त होती है।
  • अनियमित मासिक-धर्म के साथ ही, गर्भाशय, जांघ और कमर में दर्द हो तो उलटकंबल की जड़ का रस 4 ग्राम निकालकर चीनी के साथ सेवन करने से 2 दिन में ही लाभ मिलता है।
  • उलटकंबल की 50 ग्राम सूखी छाल को जौ कूट यानी पीसकर 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा तैयार करें। यह काढ़ा उचित मात्रा में दिन में 3 बार लेने से कुछ ही दिनों में मासिक-धर्म नियमित समय पर होने लग जाता है। इसका प्रयोग मासिक धर्म शुरू होने से 7 दिन पहले से मासिक-धर्म आरम्भ होने तक दें।
  • उलटकंबल की जड़ की छाल का चूर्ण 4 ग्राम और कालीमिर्च के 7 दाने सुबह-शाम पानी के साथ मासिक- धर्म के समय 7 दिन तक सेवन करें। 2 से 4 महीनों तक यह प्रयोग करने से गर्भाशय के सभी दोष मिट जाते हैं। यह प्रदर और बन्ध्यत्व की सर्वश्रेष्ठ औषधि है।  * राजेश मिश्रा 
14. अनन्नास: अनन्नास के कच्चे फलों के 10 मिलीलीटर रस में, पीपल की छाल का चूर्ण और गुड़ 1-1 ग्राम मिलाकर सेवन करने से मासिक-धर्म की रुकावट दूर होती है। * राजेश मिश्रा 
  • अनान्नास के पत्तों का काढ़ा एक चौथाई ग्राम पीने से भी मासिक-धर्म की रुकावट दूर होती है।
15. बथुआ: 2 चम्मच बथुआ के बीज 1 गिलास पानी में उबालें। आधा पानी बच जाने पर छानकर पीने से रुका हुआ मासिकधर्म खुलकर साफ आता है। * राजेश मिश्रा 

नुस्खे 

  • 3 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से माहवारी ठीक हो जाती है|
  • दूब का रस एक चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह के समय पीने से रुकी माहवारी खुल जाती है|
  • कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर कुछ दिनों तक खाने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|
  • ग्वारपाठे का रस दो चम्मच की मात्रा में खाली पेट लगभग दो सप्ताह तक सेवन करें|
  • 10 ग्राम तिल, 2, ग्राम कालीमिर्च, दो नग छोटी पीपल तथा जरा-सी शक्कर-सबका काढ़ा बनाकर पीने से मासिक धर्म खुलकर आने लगता है|
  • 3 ग्राम तुलसी की जड़ का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें|
  • 50 ग्राम सोंठ, 30 ग्राम गुड़, 5 ग्राम बायबिड़ंग तथा 5 ग्राम जौ - सबको मोटा-मोटा कूटकर दो कप पानी में औटाएं| जब पानी आधा कप रह जाए तो काढ़े का सेवन करें| रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|
  • बरगद की जटा, मेथी और कलौंजी - सब 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर मोटा-मोटा कूट लें| फिर आधा किलो पानी में सब चीजें डालकर काढ़ा बनाएं| जब पानी आधा रह जाए तो छानकर शक्कर डालकर पी जाएं|
  • प्याज का सूप एक कप बनाएं| उसमें थोड़ा- सा गुड़ घोल लें| इस पीने से रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाएगा|
  • दिन में तीन बार 2-2 ग्राम नामा गरम पानी से सेवन करना चाहिए| इससे मासिक धर्म खुल जाता है|

सिगरेट और शराब से छुटकारा

राज द्वारा सुझाये गए आसान उपाय से मिलेगी मुक्ति

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल क्या खूब लिखा है लिखने वाले ने पता नहीं लिखने वाला शराब और नशा से कितना परिचित था पर जिसने भी लिखा है शराब पीने वालो को उसकी वकालत करने के लिए एक अच्छी लाइन दे दी थी | बाकई शराब अब नशीली नहीं रह गयी कियोकि देश के लिए कुछ कर गुजरने वाले 18 से 35 वर्ष के युवा इन पार्टियों को स्टेटस सिंबल नहीं मानते , कारन चिलम तम्बाकू सिगार के नलिकाओं से गुजरता नशा अब नशों तक जा चूका है रेव पार्टियों में एल एस डी ड्रग्स हशीन कोकीन से भी बढकर नशा कोबरा डंक तक गहरा चूका है ! आज हमारे समाज में युवा पीढ़ी को नशे के ओर अग्रसर होते देख किसे दुःख नहीं होता | दुर्भाग्य से पिछले पांच से दस सालों में यह बुराई बुरी तरह बढती जा रही है | कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा करते हैं कुछ शोकिया होते हैं जो बाद में अपने आप को नशे की आग में झोंक देते हैं परन्तु कुछ कुसंगति के कारण इस लत का शिकार हो जाते हैं | 
आजकल के कालेज लाइफ में ये रोग हमारी युवा पीढ़ी को इस प्रकार लग गया है कि अनेको घर के बच्चे बर्बादी की कगार पे पहुँच गए है घर वालो को तब पता चलता है जब वो पूरी तरह लिप्त हो जाते है इससे जादा गंभीर परिणाम यहाँ तक देखने को मिला है कि नशे कि लत पूरी करने के लिए राहजनी ,चोरी इत्यादि करने लगते है कालेज में लड़कियां भी खुद को स्मार्ट बताने के लिए भी नशे का सहारा ले रही है .हमारे और आपके बच्चे जब इसके शिकार हो सकते हैं | हर कोई इस बुरी लत से अपने बच्चों और अन्य सदस्यों को बचाना चाहेगा | खुद नशे की लत के शिकार कुछ लोग यही चाहते हैं की किसी तरह से इस लत से छुटकारा मिल जाए परन्तु उनका इस पर कोई वश नहीं | नशा व्यक्ति की रगों में पहुँच कर व्यक्ति को अपना गुलाम बना लेता है व्यक्ति मानसिक रूप से पंगु हो जाता है |
यदि हर माँ बाप को यह भान हो जाये जिनका बच्चा नशा कर रह है | तो शायद कुछ जिंदगियां बचा सकें मेरा अभिप्राय केवल इंतना है | कि घरवालों को इसकी खबर ही नही लग पाती कि कब और कैसे उनके परिवार का सदस्य नशा करने लग गया है | नशे की लत्त को छुड़ाने के लिय सरकार ने नशा मुक्ति केन्द्र खोल रखे हैं | पता चलते ही वहां से मदद लेनी चाहिए | यथासंभव यह प्रयास करना चाहिये जो कि नशा मुक्ति के लिए सीधा और सरल रास्ता है | मेरा (Rajesh Mishra) यह लेख उन लोगो के लिए है जो नशा छोड़ना चाहते है लेकिन छोड़ नही पाते नशे का संबंध मन मस्तिष्क से है |


शराब पीना और विशेषरूप से धूम्रपान के साथ शराब पीना बहुत ही खतरनाक है | इससे अनेकों रोग जैसे कैंसर (मुह का ), महिलाओं में स्तन कैंसर, आदि रोग होते है | ऐसे बुरे व्यसन (आदत) एक मानसिक बीमारी है और इसे को छुडाने के लिए मानसिक बीमारी जैसे इलाज की आवश्यकता होती है | वात होने पर लोग चिंता और घबराहट को दबाने के लिए धूम्रपान का सहारा लेते है | पित्त बढने से शरीर के अन्दर गर्मी लेने की इच्छा होती है और धूम्रपान की इच्छा होती है | कफ बढने से शरीर के अन्दर डाली गयी तम्बाकू की शक्ति बढती है |
लेकिन आप इसका इलाज आयुर्वेद के माध्यम से कर सकते है और इसे बनाने के लिए 18-20 जड़ी – बूटियों का प्रयोग किया जाता है | सभी औषधियों को निश्चित मात्रा में मिलाकर यह दवा तैयार की जाती है | इस दवा का कोई बुरा प्रभाव नहीं है यदि इसे शरीर के वजन और स्वास्थ्य अनुसार दवा की मात्रा तयकर लिया जाता है | इस दवा का प्रयोग किसी का शराब का नशा छुड़ाने, धूम्रपान का नशा छुड़ाने, और अन्य का नशा छुड़ाने (जैसे गुटका, तम्बाकू) में प्रयोग किया जा सकता है |

जड़ी – बूटियों का विवरण और मात्रा निम्न है :-

गुलबनफशा- 2 ग्राम
निशोध - 4 ग्राम
विदारीकन्द (कुटज) – 15 ग्राम
गिलोय – 4 ग्राम
नागेसर - 3 ग्राम
कुटकी - 2 ग्राम
कालमेघ - 1 ग्राम
भ्रिगराज – 6 ग्राम
कसनी - 6 ग्राम
ब्राम्ही – 6 ग्राम
भुईआमला - 4 ग्राम
आमला - 11 ग्राम
काली हरर - 11 ग्राम
लौंग -    1 ग्राम
अर्जुन - 6 ग्राम
नीम – 7 ग्राम
पुनर्नवा - 11 ग्राम
मेश्श्रीन्गी

कैसे प्रयोग करे :-

उपर दी गयी सभी जड़ी – बूटियों को कूट और पीसकर पाऊडर बना लें । एक चम्मच दवा पाऊडर को एक दिन में दो बार खाना खाने के बाद पानी के साथ ले | इस दवा को खाने में मिलाकर भी दिया जा सकता है | जैसे – जैसे नशे की लत कम होने लगे इस दवा की मात्रा धीरे – धीरे कम कर दे | इस दवा का असर फ़ौरन पता चलने लगता है और लगभग दो माह में पूरी तरह से नशे की लत खत्म हो जाती है लेकिन दवा को कम मात्रा में और 2-3 दिन के अंतर के लगभग ६ माह दे जिससे नशे की लत जड़ से खत्म हो जाए |
ये दवा विज्ञापन वाले बना कर टी वी में आपको ही उलटे सीधे और मनमाने दामो पे बेचते है जबकि आप इसे घर पे ही बना सकते है .

एक और नशा मुक्ति उपाय :-

  • आयुर्वेदिक ओषधि है जिसको आप सब अच्छे से जानते है और पहचानते हैं राजीव भाई ने उसका बहुत इस्तेमाल किया है लोगो का नशा छुड्वने के लिए और उस ओषधि का नाम है अदरक और ये आसानी से सबके घर मे होती है इस अदरक के टुकड़े कर लो छोटे छोटे और उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको धूप मे सूखा लो सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो और यह अदरक ऐसे भी अदभुत चीज है आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा जैसे ही इसका रस लाड़ मे घुलना शुरू हो जाएगा आप देखना इसका चमत्कारी असर होगा आपको फिर गुटका –तंबाकू शराब –बीड़ी सिगरेट आदि की इच्छा ही नहीं होगी सुबह से शाम तक चूसते रहो और आप ने ये 10 -15 -20 दिन लगातार कर लिया तो हमेशा के लिए नशा आपका छूट जाएगा .
  • मेरा खुद का अनुभव किया है गुटका छुड़ाने के लिए हमने दो साल पहले इसका उपयोग किया था में पूरा दिन गुटका खाता था और कभी -कभी रात को भी खा के सोता था एक समय ये भी आया जब मुझे खाना खाने में तकलीफ होने लगी तो आप यकीन करे परिक्षण के लिए ये प्रयोग हमने स्वयं पे आजमाया और सिर्फ तीन दिन में ही मुझे गुटके से नफरत होने लगी लेकिन हमने इसे एक माह जारी रखा और तब से आज तक कभी भी मेरा मन नहीं हुआ है .
  • अदरक मैं ऐसे क्या चीज है यह अदरक मे एक ऐसे चीज है जिसे हम रसायनशास्त्र (केमिस्ट्री ) मे कहते है इसे सल्फर !
  • अदरक मे सल्फर बहुत अधिक मात्रा मे है ! और जब हम अदरक को चूसते है जो हमारी लार के साथ मिल कर अंदर जाने लगता है ! तो ये सल्फर जब खून मे मिलने लगता है ! तो यह अंदर ऐसे हारमोनस को सक्रिय कर देता है ! जो हमारे नशा करने की इच्छा को खत्म कर देता है ! और विज्ञान की जो रिसर्च है सारी दुनिया मे वो यह मानती है की कोई आदमी नशा तब करता है ! जब उसके शरीर मे सल्फर की कमी होती है ! तो उसको बार बार तलब लगती है बीड़ी सिगरेट तंबाकू आदि की ! तो सल्फर की मात्रा आप पूरी कर दो बाहर से ये तलब खत्म हो जाएगी ! इसका राजीव भाई ने हजारो लोगो पर परीक्षण किया और बहुत ही सुखद प्रणाम सामने आए है ! बिना किसी खर्चे के शराब छूट जाती है बीड़ी सिगरेट शराब गुटका आदि छूट जाता है ! तो आप इसका प्रयोग करे!
अब आप ये सब नहीं कर सकते है तो होमिओपेथी की भी दवा है लीजिए अब इसके उपयोग का एक दूसरे उपयोग का तरीका भी जाने ...!
  • अदरक के रूप मे सल्फर भगवान ने बहुत अधिक मात्रा मे दिया है ! और सस्ता भी है. इसी सल्फर को आप होमिओपेथी की दुकान से भी प्राप्त कर सकते हैं ! आप कोई भी होमिओपेथी की दुकान मे चले जाओ और विक्रेता को बोलो मुझे सल्फर नाम की दवा दे दो ! वो दे देगा आपको शीशी मे भरी हुई दवा दे देगा और सल्फर नाम की दावा होमिओपेथी मे पानी के रूप मे आती है प्रवाही के रूप मे आती है जिसको हम घोल (Dilution )भी कहते है अँग्रेजी मे .
  • यह पानी जैसे आएगी देखने मे ऐसे ही लगेगा जैसे यह पानी है ये 5 मिली लीटर दवा की शीशी दस या पन्द्रह रूपये की आती है और उस दवा का एक बूंद जीभ पर दाल लो सवेरे सवेरे खाली पेट फिर अगले दिन और एक बूंद डाल लो .ये 3 खुराक लेते ही 50 से 60 % लोग की दारू छूट जाती है और जो ज्यादा पियक्कड है जिनकी सुबह दारू से शुरू होती है और शाम दारू पर खतम होती है वो लोग हफ्ते मे दो दो बार लेते रहे तो एक दो महीने तक करे बड़े बड़े पियक्कड की दारू छूट जाएगी .बस हो सकता है कि दो या तीन महीने का समय लगे . यही सल्फर अदरक मे होता है .और इसका अर्क ही होमिओपेथी की दुकान मे भी उपलब्ध है आप आसानी से खरीद सकते है लेकिन जब आप होमिओपेथी की दुकान पर खरीदने जाओगे तो वो आपको पुछेगा कितनी ताकत (पोटेंसी)की दवा दूँ आप उसको कहे 200 potency की दवा देदो या आप सल्फर 200 कह कर भी मांग सकते है.लेकिन जो बहुत ही पियकर है उनके लिए आप 1000 Potency की दवा ले. अगर समाज सेवा करनी है तो आप 200 मिली लीटर का बोतल खरीद लो एक 150 से रुपए मे मिलेगी और आप उससे 10000 लोगो की शराब छुड़वा सकते हैं.लेकिन साथ मे आप मन को मजबूत बनाने के लिए रोज सुबह बायीं नाक से सांस ले और अपनी इच्छा शक्ति मजबूत करे.
  • बहुत ज्यादा चाय और काफी पीने वालों के शरीर मे आर्सेनिक (ARSENIC ) तत्व की कमी होती है,उसके लिए आप ARSENIC- 200 का प्रयोग करे.चाय और काफी भी छुट जायेगी .
  • गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी पीने वालों के शरीर मे फास्फोरस (PHOSPHORUS) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप PHOSPHORUS 200 का प्रयोग करे ये गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी इत्यादि छुडा देगा .
  • शराब पीने वाले मे सबसे ज्यादा सल्फर (SULPHUR) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप SULPHUR 200 का प्रयोग करे ये शराब को छुडा देता है लेकिन हो सके तो आप बाज़ार में मिलने वाली अदरक से ही शुरुवात करे आप को इससे ही पूरा लाभ मिल जाएगा ...!

गुरुवार, फ़रवरी 26, 2015

सेक्स में असफलता दूर कैसे करें

They try to enjoy the Real Pleasures of Sex
सेक्स का असली सुख भोगने के लिए इन्हें आजमाएं 

यौन दुर्बलता एक गंभीर समस्या है आज के युग में हमारे प्रदूषित खान -पान की वजह से और स्वयं के गलत हरकतों के कारण युवक-युवतियां असमय ही दुर्बलता के शिकार होते जा रहे है ..और इस तरह की समस्याओं में डॉक्टर के पास जाने से घबराते हैं।

ऐसे में घरेलू उपाय को अपनाकर सेक्स लाइफ को बुस्टअप कर सकते हैं:-

  • आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी शीशी में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।
  • लहसुन आपके खाने का स्वाद ही नहीं बढाता है बल्कि आपकी सेक्स लाइफ को भी बढाता है| ऐसे में अगर आप लहसुन नहीं खा रहे हैं तो आज से ही खाना शुरू कर दीजिये| क्योंकि लहसुन की 2-3 कलियां और प्याज का प्रतिदिन सेवन से यौन- शाक्ति बढ़ती है। ऐसे में अगर आप सप्ताह में दो से तीन बार काले चने से बने खाद्य पदार्थों को प्रयोग में ला रहे है तो आपके लिए यह लाभकारी है|
  • 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।


  • एक सेब में हो सके जितनी ज्यादा से ज्यादा लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग शीशी में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40 दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।
  • 15 ग्राम सफेद मूसली को एक कप दूध मे उबालकर दिन मे दो बार पीने से ज्यादा शक्तिशाली महसूस करेंगे।
  • कच्चा गाजर या इसका जूस भी यौन शक्ति को बढ़ाने में मददगार है। हफ्ते में दो बार भिंडी और सहजन खाने से काफी फायदा होता है।
  • 15 ग्राम सहजन के फूलो को 250 मिली दूध मे उबालकर सूप बनाए। इसे यौन-टौनिक के रूप मे इस्तेमाल करें। इसके अलावा आधा चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच शहद तथा एक उबले हुए अंडे का आधा हिस्सा, सभी को मिलकार मिश्रण बनाए प्रतिदिन रात को सोने से पहले एक महीने तक सेवन करें। http://www.rajayurved.blogspot.in/
  • बादाम, पिस्ता खजूर तथा श्रीफल के बीजो को बराबर मात्रा मे लेकर मिश्रण बनाए। प्रतिदिन 100 ग्राम सेवन करें।
  • इसके अलावा आप 30 ग्राम किशमिश को गुनगुने पानी मे धोए, 200 मिली दूध मे उबाले तथा दिन मे तीन बार सेवन लें।
  • घी के साथ उड़द की दाल को भूनकर और इसके अंदर दूध को मिलाकर तथा अच्छी तरह से पकाकर इसकी खीर तैयार कर लें। इसके बाद इसमें चीनी या खांड मिलाकर इसका इस्तेमाल करने से वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है तथा संभोग करने की शक्ति भी बढ़ जाती है।
  • 5 मिलीलीटर से 10 मिलीलीटर के आसपास पुराने सेमल की जड़ का रस निकालकर व इसका काढ़ा बना लें तथा इसके अंदर चीनी मिला लें। इस मिश्रण को 7 दिनों तक पीने से वीर्य की बहुत ही अधिक बढ़ोत्तरी होती है|http://www.rajayurved.blogspot.in/
  • 100 ग्राम आंवले के चूर्ण को लेकर आंवले के रस में 7 बार भिगों लें इसके बाद इसे छाया में सूखने के लिए रख दें। इसके सूख जाने के बाद इसको इमामदस्ते से कूट-पीसकर रख लें। रोजाना इस चूर्ण को एक चम्मच लेकर शहद के साथ मिलाकर चाट लें तथा इसके ऊपर से एक गिलास दूध पी लें। इसका सेवन करने से आपकी यौन शक्ति में आई दुर्बलता दूर हो जायेगी|
  • सूर्यास्त से पहले बरगद के पेड़ से उसके पत्ते तोड़कर उसमें से निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें बताशे पर
  • रखकर खाएं। इसके प्रयोग से आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स शक्ति भी अधिक हो जाएगी।
  • चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू तथा दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना रात को सोते समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा और काम करने की शक्ति बढ़ती है।http://www.rajayurved.blogspot.in/
  • वीर्य अधिक पतला होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है। 
आयुर्वेद में भी क्रियात्मक क्षमता बनाए रखने की बहुत सी दवाएं हैं:-

वसंत मालती:-

स्त्री-पुरूष् दोनों में शारीरिक क्षमता और दुर्बलता, चाहे किसी कारण भी हो, नाशक स्वर्ण तथा मोती युक्त ओैषधि है। ज्वरों के पश्चात के दौर्बल्य में भी अत्यंत उपयोगी है।

वसंत कुसुमाकर:-

बलवर्घक, कामोत्तेजक, मधुमेह नियंत्रक के रूप में प्रयुक्त होता है। इसमें सोना, मोती, कस्तूरी, चांदी आदि प्रयुक्त होते हैं।http://www.rajayurved.blogspot.in/

वसंत तिलकरस:-

विशेष् रूप से पुरूष् द्वारा उपयुक्त बलवर्घक वाजीकरण तथा कामोद्दीपक, स्वर्णमुक्ता आदि प्रधान औष्धियां हैं। वृहऊंगेश्वस, वंगेश्वर दोनों ही मूल्यवान दवाइयां हैं। स्त्रियों के जननांगों के रोगों, श्वेत प्रदर, कामशीतलता आदि तथा पुरुषों के दुर्बलता शीघ्रपतन, शुक्रमेह आदि में लाभदायक दवाएं हैं।

शक्रवल्लभ रस:-

पुरुषों द्वारा अधिक सेवनीय बलवर्घक पौष्टिक उत्तेजक वाजीकर औष्ाधियां हैं। इसमें भी सोना, मोती आदि मूल्यवान दवाएं डाली जाती हैं।http://www.rajayurved.blogspot.in/

शतावरी मोदक:-

प्रमुख रूप से स्त्रियों द्वारा सेवन की जाने वाली यह औषधि शक्तिवर्घक स्तन रोग नाशक जननांगों के प्रदरों व गर्भाशय शिथिलता नाशक है।http://www.rajayurved.blogspot.in/

शिलाजीत शुद्ध:-

स्त्रियों व पुरुषों के सभी रोगों में उपयोगी। निरंतर प्रयोग से सभी रोग होने से रोकता है। बुढ़ापा थामता है दीर्घजीवन देता है।

शुक्रमातृकावटी व शिवा गुटिका:-

अधिकतर पुरुषों को वीर्यविकारों, मूत्ररोगों, वायुविकारों, प्रोस्टेट वृद्धि आदि में दिया जाता है। शिव गुटिका स्त्रियों के कमरदर्द, थकान और मूत्र रोगों में उपयोगी है।http://www.rajayurved.blogspot.in/
मदनानंद मोदक, नारी गुटिका, कौंचपाक, मूसलीपाक, मदनमोदक ये दवाइयां पुरुषों द्वारा विशेष कर यौन शक्ति वृद्धि बनाए रखने व पूरे वर्ष के लिए पुष्टि प्रदान के लिए प्रयुक्त होती है। इनमें कुछ नशीले पदार्थ भांग, अफीम आदि में प्रयुक्त किए जाते हैं। कामेश्वर, कामचूड़ामणि, मन्मथ रस ये स्त्री व पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है। शक्ति, बल सामथ्र्य तथा कार्यक्षमता वर्घक बलवर्घक दवाइयां हैं।ये सामान्यत: नीम-हकीम तथा बिना चिकित्सक के परामर्श से इनका प्रयोग नौजवान लड़के ज्यादा करते हैं।
रतिवल्लभ मूंगपाक, सौभाग्यशुंठी ये दोनों दवाइयां मुख्यत: स्त्रियों के सेवनार्थ बनी हैं। प्रथम ये दवाये जननांगों को शक्ति, पुष्टि संकोच, गर्भाधान योग्य बनाती हैं। सोहाग सोंठ प्रसव के बाद की दुर्बलता, पीड़ा कमरदर्द, थकान, ज्वर को मिटाती है। आयुर्वेद में कामोत्तेजक, स्तंभक, वाजीकरण शक्तिवर्घक तथा स्त्री के स्त्रीत्व को पुष्पित और प्रशस्त रखने वाली दवाओं की कमी नहीं है।

कमर दर्द को आसान बनाये "आसन"


Make it easy to Back Pain (Backache)  "posture"

काम चाहे घर में हो या ऑफिस में, कार्य चाहे खडे़ रहकर करने का हो या बैठकर करनेका अक्सर कमर में दर्द हो ही जाता है। कमर दर्द की वजह से आपको बड़ी परेशानी होती है। महिलाओं में कमर दर्द एक आम समस्या हो गई है। खासकर कामकाजी महिलाएं तो इस समस्या के साथ जीने की आदी दिखती हैं। जब इससे बचने और उससे मुक्ति के उपाय बेहद आसान हैं तो क्यों इस समस्या से जूझा जाए। राजेश मिश्रा बता रहे हैं इससे मुक्ति के उपाय -
कमर दर्द के कई कारण होते हैं यथा- सर्जिकल डिलेवरी, सोने, उठने-बैठने के गलत नियम आदि। परन्तु आजकल जो ज्यादातर मामलों में कमर दर्द देखने में आ रहा है उसका कारण है ऊंची हील वाली चप्पलें पहनना। जो आज का प्रमुख फैशन भी है।

क्यों होता है कमर में दर्द

डाक्टर हमेशा से ऊंची एड़ी वाली चप्पलें व सैंडिल पहनने से बचने की सलाह देते आ रहे हैं। फैशन के चलते उनकी सलाह सुनना कोई पसंद नहीं करता है। हर किसी महिला को शारीरिक बढ़ाने हेतु इस तरह की चप्पलें व सैंडिल अधिक भाती हैं। एस्ट्रोजन हार्मोंस भी इस दर्द के लिये जिम्मेदार होता है। होता यह है कि चालीस-पैंतालीस वर्ष के उपरांत महिलाओं में मासिक चक्र लगभग बंद हो जाता है जिससे रीढ़ की हड्डी में कठोरता आने व कमर के आसपास चर्बी जम जाने से यह दर्द शुरू हो जाता है। एस्ट्रोजन की कमी यानि शरीर में कैल्शियम की कमी को दर्शाता है जिससे ओस्टियोपोरेसिस नामक रोग होता है जो हड्डी से जुड़ा रोग है।

अन्य कारण

उठने बैठने के गलत तरीके या झटकेदार तरीके से उठने बैठने के कारण कभी रीढ़ की डिस्क खिसक जाती है। इसके अलावा ज्यादा आरामतलब जिंदगी तथा कुछ घातक बीमारियां भी इस रोग की जनक मानी जाती है। प्रायः पीछे के पॉकेट में मोटी पर्स या मोबाइल रखना लड़कियां फैशन समझती हैं, पर यह भी कमर दर्द के लिए सबसे बड़ा कारण बन जाता है। 

छुटकारा पाने के लिये क्या करें

छुटकारा पाने के लिये सर्वोत्तम उपाय प्राकृतिक चिकित्सा ही है। योग अपनाकर कमर को लचीला बनाया जा सकता है जिससे कमर दर्द में राहत मिल सकती है। तात्कालिक राहत के लिये प्रचलित चिकित्सा पध्दति जैसे एलौपैथिक, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, बायोकेमिक जैसी अन्य पध्दतियों को भी साथ में अपना सकते हैं।.

दर्द से मुक्ति के लिये योग करें

कमर दर्द में नीचे दिये जा रहे चार आसन अति उपयोगी हैं। इन्हें आजमाइये और दर्द से छुटकारा पाइये।

शलभ आसन

1. इस आसन को करने के लिये सर्वप्रथम पेट के बल लेट जाइये।
2. अब दोनों हाथों को अपनी जांघ के नीचे रविये।
3. श्वांस अंदर भरते हुए पहले दाहिने पैर को बिना मोड़े धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाइये कुछ सेकेंड रुककर दाहिने पैर को उसी स्थिति में रखे हुए बायें दो दाहिने पैर की तरह ऊपर की ओर उठाइये। ध्यान रखिये कि हर स्थिति में आपको ठोड़ी जमीन से जुड़ी रहनी चाहिये। श्वांस छोड़ते हुए पूर्ण स्थिति में आइये।
4. आप अपनी क्षमतानुसार क्रम को दोहराइये।

मकरासन

1. पेट के बल लेटकर हाथ की कोहनियों को मोड़कर बिल्कुल सीधे हथेलियों पर ठोड़ी को रखिये।
2. धीरे-धीरे लम्बी श्वांस खींचते हुए दोनों पैर की एड़ियों को कूल्हे से सटाने का प्रयास कीजिए। श्वांस छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में आ जाइये।

धनुरासन

इस आसन का सीधा-सा अर्थ है शरीर को मोड़कर धनुष के समान बनाना।
1. पेट के बल लेटकर दोनों पैरों के घुटने को मोड़कर कूल्हे के ऊपर लाकर दोनों हाथों से दोनों पंजों को पकड़िये।
2. श्वांस भरते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठाइये एवं धनुष के समान रचना बनाईये। इस दौरान गर्दन सीधे रखते सामने की ओर देखिए। 
3. क्षमतानुसार रुककर धीरे-धीरे छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में लौट आइये।

भुजंगासन

यानि फन फैलाये सांप के समान आकृति वाला आसन।
1. इसमें भी पहले वाले आसन की तरह पेट के बल लेटकर हथेलियों को छाती के बाजू में रखकर पंजे मिलाते हुए कोहनी को थोड़ा ऊपर उठाकर श्वांस छाती में भरते हुए सिर को ऊपर उठाइये। नाभि जमीन में सटी हो। सिर को पीछे की ओर मोड़िये। थोड़ रुककर पूर्व स्थिति में आ जाइये।

राजेशजी  द्वारा बताये गए ये टिप्स भी आजमाएं और दूसरे लोगों जो ऐसे रोगों से परेशान हैं उन्हें भी बताएं, सभी लाभवान होंगे 

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1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।
2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।
3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।
4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।
5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।
6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।
7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।
8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।
9. कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।
10. कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।
11. कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।
12. ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।

सर्दी-ज़ुकाम से ऐसे निज़ात पाएं

Would like to get rid of Cold
ज़ुकाम के वायरस को भाती है ठंडी नाक

आम तौर पर ज़ुकाम को एक मामूली बीमारी समझ कर इस पर ज़ाइद तवज्जा नहीं दी जाती लेकिन ज़ुकाम को मामूली समझना ही सबसे बड़ी ग़लती साबित हो सकती है । सेहत भगवान की देन है और उस की तरफ़ से ग़फ़लत बरतने का बहुत बड़ा ख़मयाज़ा भुगतना पड़ता है ।

पुराने बुज़ुर्गों का कहना है कि छींक का आना ज़ुकाम का होना इस बात की अलामत (पहचान/ ल्क्षण) है कि आप सेहत मंद हैं लेकिन सेहत मंद होने के ग़रूर में निफिक्र  होकर अगर लापरवाही बरती जाए तो यही ज़ुकाम निमोनिया और डबल निमोनिया में तबदील होकर हमारी जान ले लेता है ।

ज़ुकाम के दौरान बहुत ज़्यादा ठंडे पानी के इस्तेमाल से गुरेज़ ( परहेज) करना चाहीए यही नहीं बल्कि सर्द और गर्म अशीया ( चीज़ों) को फ़ौरी तौर पर या मामूली वक़फ़ा से भी इस्तेमाल नहीं करना चाहीए । कुछ लोग चाय पीने से क़बल ठंडा पानी पीते हैं और उसके फ़ौरी ( फौरन) बाद चाय पीते हैं ।

ज़रा सोचिए! पानी ठंडा और चाय गर्म एक दूसरे से मुतज़ाद (एक दूसरे से विरुद्व) तासीर रखने वाले ये मशरूबात आप को फ़ायदा हरगिज़ नहीं पंचा सकते बल्कि आप के जिस्म के निज़ाम को दरहम बृहम (परेशान) ज़रूर कर देते हैं । ज़रूरत इस बात की है कि ना सिर्फ़ ज़ुकाम के दौरान बल्कि आम दिनों में भी सर्दगर्म अशीया ( खाने पीने की चीजें)‍ के एक साथ इस्तेमाल से गुरेज़ करना चाहीए ।

सर्द पानी से ग़ुसल करना भी ज़ुकाम के दौरान मुनासिब नहीं है क्योंकि निमोनिया अगर डाक्टरों के बस से बाहर हो गया तो ये डबल निमोनिया में तबदील होकर आप को आप की ग़फ़लत की ज़बरदस्त सज़ा दे सकता है। सेहत मंद रहिए और ज़ुकाम से चौकन्ना रहिए क्योंकि कोई भी छोटी बीमारी बड़ी होने में देर नहीं लगाती।आप जीरे का इस्तेमाल सब्ज़ी में तड़का लगाने और चावल बनाने में करते हैं, ताकि खाने का स्वाद बढ़ जाए और महक भी आए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जीरे में कई औषधीय गुण भी हैं। ज़ुकाम के दौरान जीरे का यूज़ होम रेमिडी है, जो आपको सेकंड्स में बंद और बहते नाक से आराम दिला सकता है। कोल्ड के आसार बारिश के दिनों में ज़्यादा होते हैं। तो इससे पहले कि हम इसकी चपेट में आएं या फिर ज़ुकाम की वजह से हमारा कोई रिश्तेदार परेशान है, आइए जान लेते हैं कि जीरे का इस्तेमाल कैसे कोल्ड से निजात दिला सकता है।
दरअसल, इस छोटे से जीरे में न सिर्फ ज़ुकाम और सिर दर्द भगाने के गुण हैं, बल्कि यह फंगस और बैक्टीरिया से भी लड़ता है। जीरा इन्फेक्शन्स से भी बचाता है और इससे आपका इम्यून सिस्टम भी स्ट्रॉन्ग रहता है। जीरे में विटामिन ए और विटामिन सी भी हैं। ये सर्दी-ज़ुकाम से बचाते हैं।
अब जानिए कि जीरे को किस रूप में खाना चाहिए, जिससे आपका ज़ुकाम सेकंड्स में दूर हो जाए...

ज़ुकाम होने पर जीरे का यूज़ 

दो कप पानी में एक चम्मच जीरा डालकर उबालें। जब पानी उबल जाए, तो उसमें पिसी हुई अदरक और तुलसी डालकर फिर से उबालें, ताकि इस पानी में इन्फेक्शन्स से लड़ने की ताकत आ जाए। इस पानी को छाने और फिर इसे धीरे-धीरे पिएं।
पानी में जीरा उबालकर स्टीम भी ले सकते हैं। इसमें थोड़ी लौंग मिला लें। इससे आपकी बंद नाक खुल जाएगी और ज़ुकाम से राहत मिलेगी। ध्यान रहे कि स्टीम लेने के बाद थोड़ी देर अपना सिर और छाती चादर से ज़रूर ढक लें। अगर स्टीम लेने के बाद बाहर गए और ठंड लग गई, तो चेस्ट कन्जेशन के चांसेस हैं।
अगर आपको ज़ुकाम के साथ ठंड भी लग रही है, तो रात में गर्म दूध में थोड़ी हल्दी डालकर पिएं। इससे आपको ज़ुकाम के साथ-साथ खांसी से भी रहात मिलेगी।

हल्दी: यह गर्म होती है, यह शरीर को इंफेक्शन्स से लड़ने की ताकत देती है, दर्द कम करने और घाव को भरने में भी सहायक होती है।
दूध: इसमें कैल्शियम और विटामिन डी होता है, जो आपकी हड्डियां मज़बूत रखने के साथ शरीर में बीमारियों से लड़ने की ताकत भी पैदा करता है।

रखें सावधानी

यह आप दिन में एक 1 गिलास से ज़्यादा न पिएं और इसे आदत न बनाएं, वरना बलगम की दिक्कत हो सकती है। एक गिलास दूध में आधी छोटी चम्मच हल्दी ही काफी है।
ज़ुकाम या सर्दी लगने पर नींबू, दालचीनी और शहद तीनों को मिलाकर सिरप बनाएं। इसे पीने से आप जल्दी ठीक हो जाएंगे।

बनाने की विधि

एक पैन में शहद डालकर तब तक उबालें, जब तक कि शहद पतला न हो जाए। उसके बाद इसमें दालचीनी और नींबू मिलाएं। अब यह सिरप तैयार है।

शहद: यह गर्म होता है और इसमें एंटीऑसीडेंट्स होते हैं, जो हमारे इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग करते हैं।
नींबू: इसमें विटामिन सी होता है, जो ज़ुकाम ठीक करने में मददगार होता है।
दालचीनी: यह ब्लड ग्लूकोज़ लेवल कंट्रोल में रखता है और इम्यूनिटी को बढ़ाता है।

ज़ुकाम, सर्दी और खांसी से बचने के लिए आप रोज़ सुबह खाली पेट आंवला खाएं। इससे आपको किसी भी सीज़न में होने वाली बीमारियों से राहत मिलेगी। आंवला आपके लिवर और ब्लड सर्कुलेशन को भी सही रखता है। दरअसल, आंवला विटामिन सी का स्रोत है और ज़ुकाम दूर भगाने के लिए विटामिन सी लाभकारी होता है। इसे आप किसी भी रूप में खा सकते हैं। चाहे आप बाज़ार से आंवला कैंडी खरीद लें, चाहे तो आंवला रस की बोतल या फिर मुरब्बा और अगर आपके पास समय है, तो आप घर पर ही आंवले का ताज़ा जूस निकाल सकते हैं। हर रोज़ 4-5 आंवला कैंडी या फिर एक चौथाई कप आंवला रस सुबह उठकर खाली पेट पी सकते हैं। हर रोज़ सुबह दूध के एक गिलास के साथ एक मुरब्बा भी बहुत फायदा देगा।

सावधानी

ज़रूरत से ज़्यादा आंवला न खाएं। इससे आपका गला खराब हो सकता है और दांत खट्टे हो सकते हैं।
एक पैन में अलसी के बीज को तब तक उबालें, जब तक बीज पतला और सूख न जाए। अब बीज में कुछ बूंदे नींबू के जूस और शहद की मिलाएं। इस मिश्रण को रोज सोने से पहले पिएं। आपको ज़ुकाम और सर्दी से राहत मिलेगी। इसमें बहुत सारे विटामिन्स होते हैं। इसे सुबह 1 मुट्ठी खाली पेट खाने से आप दिनभर एनर्जेटिक फील करेंगे। अलसी में एंटी-एजिंग गुण भी हैं, जो आपके चेहरे से झुर्रियां मिटाते हैं। इसके अलावा यह हड्डियों को मज़बूत करने में भी कारगर है। यह हर उम्र के लोगों के लिए है, लेकिन आप इसे डॉक्टर की सलाह पर ही खाएं।

दही में है सेहत और खूबसूरती का खजाना

Yogurt : A wealth of health and beauty 
गर्मियों में सेहत का सबसे बड़ा हथियार


दूध से जमनेवाला दही एक रुचिकर और सेहतमंद माध्यम है। दही में अच्छी किस्म के बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ मिलता है। आयुर्वेद के मुताबिक गर्मियों में दूध के मुकाबले दही खाने के फायदे बहुत अधिक होते हैं। रोजाना एक कटोरी दही न सिर्फ बीमारियों को दूर रखता है बल्कि शरीर स्वस्थ बनाता है। दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है। इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लाभकारी होता है।
दही में कैल्सियम को एसिड के रूप में समा लेने की भी खूबी होती है। रोज दही दूध के मुकाबले दही खाना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है। दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है। इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लाभकारी होता है।
गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। इसे पीकर बाहर निकलें तो लू लगने का डर भी नहीं रहता है।
दही को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गरमी दूर हो जाती है। पाचन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है। दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती हैं तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं। दही में जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टेज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं।
दही में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अद्भुत क्षमता है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढ़ने से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न करे और हार्टबीट सही बनी रहे। दही में कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर में हड्डियों का विकास करती है। दांतों एवं नाखूनों की मजबूती एवं मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में भी सहायक है।
दूध की अपेक्षा दही को अधिक लाभकारी माना जाता है। यह प्राचीन काल से ही हमारे दैनिक जीवन में प्रयोग होता रहा है। पुरानी पीढ़ी के लोग दही को अधिक महत्व देते हैं। इसे बच्चे, युवा, बूढ़े सभी लोग रूचि से खाते हैं। इसमें अन्य खाद्य पदार्थों की अपेक्षा पोषक तत्व अधिक मात्रा में रहते हैं। इसे हर मौसम में प्रयोग में लाया जा सकता है परन्तु गर्मियों में दही का प्रचलन अन्य ऋतुओं की अपेक्षा ज्यादा होता है। इस ऋतु में प्रतिदिन नियम से दही लेना पाचन की दृष्टि से अच्छा माना जाता है। दही पाचन व्यवस्था को सुधारता है तथा बल प्रदान करता है। स्वाद में तो सभी इसके दीवाने है ही। स्वास्थ्य की उन्नति की दृष्टि से इसके समान कोई आहार नहीं है। भारत में ही नहीं, संसार भर में दही का उपयोग स्थान के अनुसार खाने, सौंदर्य, औषधि व मांगलिक अवसरों पर होता रहा है। सुपाच्य व सुस्वादु गुण के कारण दही का प्रयोग प्रायः सभी घरों में समान रूप से होता रहा है। यह भी असंदिग्ध रूप से जीवन अवधि में बढ़ोतरी होती है।

औषधीय गुण

दही में एक ऐसा पदार्थ पाया जाता है जो रक्त में उपलब्ध कोलेस्ट्रोल को कम करता है, अतः यह हृदय रोग में लाभ पहुंचाता है। पेट की गड़बड़ी (कब्जियत) ही सभी रोगों की जड़ है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधी क्षमता में ह्रास होता है परन्तु दही का समुचित मात्रा में सेवन प्रतिरोधी क्षमता का विकास करता है। दही में विद्यमान लैक्टोसिलस बल्गोरिकस और स्ट्रेप्टोकोकस थमोफिलस बैक्टीरिया जो फायदेमंद बैक्टीरिया हैं, शरीर के समुचित विकास में अनुकूल प्रभाव डालते हैं। इसके सेवन से ट्यूमर रोग भी ठीक होने की संभावना रहती है। खाना खाने के बाद दही में चुटकी भर अजवायन व काला नमक मिलाकर सेवन करने से वायु रोग में आराम मिलता है। इस तरह क प्रयोग से कब्जियत व बवासीर रोग में भी 25 प्रतिशत तक लाभ होता है। दही में नीम की कोंपल पीस कर फोड़े-फुंसियों में लगाने से लाभ होता है और अगर लस्सी में 1-2 पत्ती पीसकर उपयोग करें तो खून साफ होता है।

सौंदर्य प्रसाधन भी

प्राचीन समय से ही दही का प्रयोग सौन्दर्य प्रसाधन के रूप में होता आ रहा है। यह स्ायुओं और त्वचा को पुष्टिकारक तत्व प्रदान करता है। इसके उपयोग से सौन्दर्य में चार-चांद लगाये जा सकते हैं।
त्वचा को नर्म और साफ रखने के लिए दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गले व बाहों पर लगाने से त्वचा में चमक आती है। दही में बेसन मिलाकर लगाने से त्वचा की सफाई हो जाती है। इस प्रयोग स मुंहासों में भी लाभ होता है। दही में आटे का चोकर मिलाकर दस मिनट रखें। फिर इसे उबटन की तरह प्रयोग करें। इस उबटन से त्वचा को विटामिन ‘सी’ व ‘ई’ मिलता है जिससे उसमें चमक बनी रहती है। दही में संतरे व नींबू का रस मिलाकर क्लींजर के रूप में उपयोग करने से चेहरे का रंग निखर कर कांति बढ़ जाती है। दही में काली मिट्टी मिलाकर केश धोने से केश मुलायम, चमकीले व घने हो जाते हैं।

दही बनाने में सावधानी

दही बनाने की विधि : दही हमेशा शुध्द और ताजे दूध से ही बनाया जाना चाहिये। गाय अथवा भैंस का दूध या दोनों मिला हुआ दूध काम में लाया जा सकता है। दूध को दही बनने में अनेक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। यह एक रसायनिक विधि है। अतः उत्तम दही पाने के लिए विधिवत वैज्ञानिक तरीकों का पालन करना आवश्यक है।
साफ बर्तन में दूध को आधा घंटे तक धीरे-धीरे गर्म करें, तत्पश्चात् दस मिनट तक तेज आंच पर खूब उबालें। दूध उबालने के तुरन्त बाद बर्तन को आग से उतार कर साधारण तापमान 30-35 डिग्री सें. पर ठंडा करें।
कांसा, पीतल, तांबा एवं अल्मीनियम इत्यादि के बर्तनों में दही नहीं जमाना चाहिये। दही जमाने के लिए मिट्टी या चीनी मिट्टी के बर्तन ही उपयुक्त होते हैं।

बुधवार, फ़रवरी 25, 2015

कुछ कारगर निवारण एवं सुझाव

Some effective Prevention and Tips

इस बार राजेश मिश्रा आप सभी के लिए लाए हैं कई रोगों का एक ही जगह इलाज। इन रोगों में शामिल है- पथरी, झाइयां, खूनी बवासीर, मासिक स्राव कष्ट तथा दर्द के साथ होना, बवासीर, सिर के बाल झड़ना, मूत्रावरोध।

पथरी : यदि गुर्दे या मूत्राशय में पथरी हो तो 250 ग्राम कुलथी (शिमला की पहाड़ियों से आने वाली सफेद कुलथी ठीक रहती है) को साफ कर रात को तीन किलो पानी में भिंगोकर रख दें। सबेरे भीगी हुई कुल्थी सहित उस पानी को धीमी आंच पर लगभग चार घंटे तक पकायें। जब पानी सिर्फ एक किलो रह जाये (जो काले चनों के सूप की तरह होता है) तब उसे नीचे उतार लें। तीस से पचास ग्राम (अपनी पाचन शक्ति के अनुसार) देशी घी का छौंक लगायें। छौंक में थोड़ा सा सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हल्दी डाल सकते हैं। इस स्वादिष्ट सूप को 250 ग्राम की मात्रा में दिन में एक बार दोपहर के भोजन के स्थान पर लगभग बारह बजे पी लें। दस-पंद्रह दिन तक इस नुस्खे के सेवन से गुर्दे और मूत्रालय की पथरी गलकर बिना आपरेशन के बाहर आ जाती है। इस नुस्खे के सेवन करते वक्त दोपहर का भोजन नहीं लेना है।

झाइयां : चेहरे पर काली झाइयां साधारणत: त्वचा की निचली परतों में रहने वाले प्राकृतिक पदार्थ सिलीकोन की कमी से होती है। नहाने से पूर्व रोज एक चम्मच गुनगुने शहद में 2-3 बूंदे ग्लिसरीन व चुटकी भर नमक मिलाकर अच्छी तरह मथकर हल्के हाथ से कुछ दिनों तक लगाने से झाइयां दूर हो जाती हैं।
खूनी बवासीर : गुड़ के साथ एक दो हरड़ को दोनों समय खाने के बाद नियमित रूप से सेवन करने से लाभ होगा।

मासिक स्राव कष्ट तथा दर्द के साथ होना : 2 चम्मच अजवायन, 2 कप पानी में डालकर उबालें। 1 कप शेष रख लें, इसमें गुड़ मिलाकर सुबह खाली पेट चाय की तरह पी लें। यह नुस्का प्रतिदिन सुबह-शाम 3 दिन तक लेना चाहिए। सामान्यत: 3 मासिक स्राव तक प्रयोग पर्याप्त रहता है। मासिक स्राव होने से 3 दिन पहले इसका प्रयोग आरंभ करने से मासिक समय पर खुलकर आता है।
पेट में गैस : अजवायन के साथ हरड़ और काला नमक लेने से पेट फूलना, पेट दर्द, डकारें आना आदि में तत्काल राहत मिलती है।

बवासीर : आम के कोमल पत्तों को जल के साथ पीसकर मिश्री मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है। खूनी बवासीर से रक्त आना बंद होता है।
रक्त प्रदर : आम की गुठली की गिरी का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में लेने से रक्त प्रदर, खूनी बवासीर, पेट के कीड़े दूर होते हैं।

सिर के बाल झड़ना : बरगद के पत्तों को कुचल लें और अलसी के तेल में पकायें। पत्तों के जल जाने पर तेल छानकर रख लें। इस तेल की मालिश करने से कुछ ही दिनों में बालों का झड़ना रुक जायेगा और झड़े हुए बालों के स्थान पर नये बाल आने लगेंगे।
देशी घी में 4-6 बादाम की गिरी पीसकर डाल दें और इतनी उबालें कि गिरी के टुकड़े जल जायें। अब घी को छानकर शीरी में भर लें। यह घी गुनगुना करके सिर पर मालिश करने से बालों का झड़ना रुकता है और दिमागी कमजोरी भी दूर होती है।

मूत्रावरोध : पेशाब की रुकावट में कबाव चीनी का एक चम्मच चूर्ण दूध की लस्सी से देने पर तत्काल मूत्र हो जाता है। दूध के अभाव में मिश्री के साथ भी दे सकते हैं।

दमा (अस्थमा) : कारण और निवारण

Asthma: Causes and Prevention

अस्थमा में अधिकतर हवा में पाये गये धूल, मिट्टी, धुएं के कण, जो सांस लेते हुए फेफड़ों तक जाते हैं, वे श्वासनली में रूकावट पैदा करते हैं। सांस के अलावा कभी-कभी कुछ खाने की चीजों से भी अस्थमा होता है। ऐसे में अचानक सांस फूलने, तेज खांसी आने, सीने में अजीब दर्द और थकावट महसूस होने लगती है। जब कभी ऐसा लगे तो सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है। ध्यान दे राजेश मिश्रा के कुछ बातों पर:-
  • अस्थमा अटैक होने से बचने के लिए गर्मियों व सर्दियों में पोलन से बचें और खिड़की, दरवाजे बंद रखें। गर्मियों में एयर कंडीशनर का प्रयोग करें।
  • अस्थमा अटैक के समय अधिक बातें न करें, राम से लेटें, शांत रहें ताकि सांस न फूले और सांस आसानी से ली जा सके।
  • अपने देसी नुस्खों को मत अपनाएं। डाक्टर द्वारा बतायी गयी दवा का ही प्रयोग करें।
  • घर में पर्दे आदि वही लगाएं जिन्हें आप जल्दी-जल्दी धो सकें ताकि उनमें धूल का कण अधिक देर ने टिक सकें।
  • घर में किसी को भी अस्थमा हो तो घर पर कारपेट न बिछाएं, क्योंकि कारपेट में धूल मिट्टी के कण जमा होते रहते हैं।
  • अस्थमा रोगियों को धूम्रपान करने वालों से दूर रहना चाहिए।
  • अस्थमा रोगी का बेडरूम साफ-सुथरा होनी चाहिए। आवश्यकता होने पर कमरे में ह्यूमिडिफायर (नमी दूर करने की मशीन) लगायें। चादर, तौलिया, तकिए का गिलाफ अलग रखें और उन्हें सप्ताह में एक बार धोयें। 10-15 दिन में तकिए और गद्दे कोक धूप लगायें और उसकी मिट्टी को साफ करें।
  • पालतू जानवरों से दूरी बना कर रखें।

अनचाहे बालो से ऐसे छुटकारा पाएं

Get rid of Unwanted hair


शरीर के खुले हिस्सों हाथ चेहरे आदि पर अनचाहे बाल कुछ लोगों के लिए बहुत बड़ी समस्या है महिलाए इसे लेकर काफी परेसान रहती है क्युकि हमारी माताये बहनों को बहुत शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है लेकिन प्रयास करने से इससे हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है जब आप सब उपाय करके थक चुके हो तो इस उपाय को करे निश्चित रूप से आपको निराशा नहीं मिलेगी.....!

टनाका पावडर प्रयोग :-

सबसे पहले आप बाज़ार से टनाका पावडर और कुसुम्बा आयल ले आयें और टनाका पावडर में इतना कुसुम्बा आयल मिलाएं की यह एक क्रीम की तरह बन जाये . अब इसे अच्छे से घोंट कर कुछ देर के लिये रख दे लगभग एक घंटे बाद इसमें कुछ और कुसुम्बा आयल डालने की जरुरत और हो सकती है क्योंकि पाउडर आयल को सोख लेगा ...कुछ कुसुम्बा आयल और मिलाकर इसे हल्का सा और घोट ले अब यह क्रीम तैयार है लगाने के लिये. ( इसका टेक्सचर किसी कोल्ड क्रीम की तरह रखना है बहुत गाढ़ा पेस्ट जैसा नहीं बनाना है .फिर शरीर के जिस अंग पर इस क्रीम को लगाना हो वहा के अनचाहे बाल पहले हटा दे चाहे रेज़र द्वारा या किसी भी हेयर रिमूवर द्वारा जो भी आप प्रयोग करते हो.

अब टनाका पावडर और कुसुम्बा आयल द्वारा बनायीं क्रीम को उस स्थान पर लगाकर हलके हाथों से मसाज करें ..और एक से दो घंटे के लिए छोड़ दे ..चाहे तो रात भर के लिए छोड़ दे ... बाद में इसे गुनगुने पानी से धो ले या किसी कपडे से पोछ लें. इस प्रोसेस को आप सप्ताह चार से पांच दिन तक अधिकतम तीन महीने तक करना है ..अधिकांश लोगों के बाल 5 सप्ताह में रिमूव हो जाते है जिनके बाल अधिक घने और मोटे है उन्हें अधिक समय लगेगा , महिलाओं के बाल जल्दी रिमूव हो जाएंगे .. बाल धीरे धीरे पतले हलके रंग के होते जाएंगे और हमेशा के लिए चले जाएंगे इस प्रयोग को चेहरे सहित शरीर के किसी भी अंग के बाल हटाने के लिए प्रयोग कर सकते है कोई साइड इफेक्ट नहीं है .

टनाका पावडर बाजार में तीन ग्रेड A, B और C प्रकार का मिलता है ...हेयर रिमूवल के लिए ग्रेड A का प्रयोग करना है इस पाउडर को बड़े शापिंग स्टोर से लिया जा सकता है ऑनलाइन शोपिंग साईट पर भी आसानी से मिलता है . ये माल में भी उपलब्ध है .कुसुम्बा आयल आयुर्वेदिक दवा की बड़ी दुकानों पर आसानी से मिल जायेगा .

दूसरा एक प्रयोग -एक चम्मच हल्दी पाउडर, चना दाल पाउडर दोनों को पानी में मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को अनचाहे बालों पर लगाएं। सुखने के बाद रगड़ कर निकाल लें। नियमित रूप से यह काम करने से धीरे-धीरे अनचाहे बाल खत्म हो जाते हैं।


चेहरे पर बाल विशेष रूप से ऊपरी होठों के बाल ये बहुत शर्मनाक हो सकते हैं। प्रति दिन बहुत-सी महिलाएं अनचाहे बालों से छुटकारा पाने के लिए उस मायावी विधि की खोज करती हैं लेकिन वर्तमान में वह सभी तरीके दुष्प्रभाविक और दर्दनाक होते हैं। तो अगर आप उन कष्टप्रद बालों से छुटकारा पाना चाहते हैं यह रहा एक प्राकृतिक और पीड़ारहित उपाय कुप्पामेनि के पत्ते।

कुप्पामेनि (kuppaimeni ) पत्ते जो इंडियन नेट्ल के नाम से भी जाने जाते हैं जो निजात पाने के लिए एक शानदार उपाय हैं। इसकी पत्तियां कृमिनाशक, पीड़ा-नाशक, रोगाणुरोधी हैं और साथ ही इनमें घाव को भरने के गुण हैं। यह अवांछित बालों के लिए सबसे सही उपाय हैं और इनमें त्वचा में व्याप्त होने वाले गुण हैं जो बालों को पतला करके, उनके झड़ने का कारण बन जाते हैं। अंततः यह चेहरे पर बाल बढ़ने से रोकते हैं और ऊपरी होंठ को बाल-मुक्त कर देते हैं।

कुछ कुप्पामेनि की पत्तियों को धोकर पीस लें। एक चमच्च ताज़ी हल्दी (कस्तूरी मंजल) इसमें मिलाएं। इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर उस जगह लगाएं जहाँ आप बालों से छुटकारा पाना चाहते हैं। कुछ घंटों के लिए छोड़ दें और फिर पानी से धो लें। इसको लगाने का सबसे अच्छा वक्त रात को है। सोने से पहले लगाकर अगली सुबह धो लें। याद रखें, इस उपाय का असर होने के लिए कुछ समय जरुर लगता है इसलिए इस मिश्रण को रोज़ाना लगाते रहें। यह पौधा आसानी से मिल जाता है और इसकी ज़्यादा देखभाल भी नहीं करनी पड़ती है। आजकल बहुत से हर्बल विक्रता हैं जो इस पौधे को आपके घर तक वितरित कर सकते हैं। अगर आपको ताज़े पत्ते नहीं मिलते तो, इसका पाउडर प्राकृतिक चिकित्सा भंडार में आसानी से मिल जाता है।


और कुछ प्रयोग :-


प्यूमिक स्टोन का उपयोग करें :-

यह (एक तरह का पत्थर जो बाजार में आसानी से मिल जाता है) प्यूमिक स्टोन नहाने से पहले #अनचाहे बालों पर रगड़ें। धीरे- धीरे अनचाहे बाल खत्म हो जाएंगे।


शहद और नींबू का मिश्रण उपयोग करें:-


* शहद, नींबू और चीनी का मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण को गर्म करके हाथ व पैरों पर लगाएं। कॉटन की पट्टियों को इस मिश्रण पर चिपका कर निकालें। अनचाहे बाल हट जाएंगे।

इस तरह भी लगा सकते हैं:-

* चीनी और नींबू का रस मिलाकर लगाएं। इस मिश्रण को लगाकर धीरे-धीरे हेयर ग्रोथ की डायरेक्शन में मसाज करें। पंद्रह मिनट लगाकर रहने दें। फिर चेहरा धो लें। इस नुस्खे को नियमित रूप से अपनाएं। अनचाहे बाल खत्म हो जाएंगे।



बेसन और दही लगाएं:-

* बेसन में दही मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को अनचाहे बालों पर लगाएं। कुछ देर बाद रगड़ कर निकाल दें, उसके बाद चेहरा धो लें। रोज ऐसा करने से अनचाहे बाल धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे।

एक आयुर्वेदिक तरीका:-

ऐसे में कुछ प्राकृतिक उपाय हैं जिससे चेहरे के अनचाहे बाल भी कम होते हैं, त्वचा का ग्लो भी बरकरार रहता है और जेब भी ढीली नहीं होती है।

हल्दी:-

दक्षिण भारत के कई हिस्सों में महिलाएं चेहरे पर हल्दी का लेप लगाती हैं। इससे चेहरे पर बाल नहीं होते और त्वचा की रंगत निखरती है। साथ ही, यह बेहतरीन एंटीसेप्टिक भी है। रोज पांच से दस मिनट हल्दी का लेप लगाएं।

बेसन:-

बेसन को अगर #फेसपैक की तरह चेहरे पर रोज लगाएंगे तो भी त्वचा चिकनी रहेगी और बाल कम होंगे। बेसन में एक चुटकी हल्दी और पानी मिलाकर लगाएं और पैक सूखने पर गर्म पानी से साफ करें।

शुगर वैक्स:-

* अगर चेहरे पर बाल अधिक हो रहे हों तो घर पर ही इसकी वैक्सिंग करें, वो भी प्राकृतिक वैक्स से। शक्कर को पिघलाकर इसमें शहद और नींबू का रस मिलाएं और पेस्ट तैयार कर लें। पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और वैक्स की तरह साफ करें।

अंडे का मास्क:-

* अंडे का मास्क को भी आप वैक्स की तरा इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे फेंटकर चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर छोड़ दें और फिर इसे गीले कपड़े से साफ करें।

* साधारण शंख का चूरा २० ग्राम + बर्किया हरताल १० ग्राम + मैंसिल १० ग्राम इन तीनों को पानी में पीस कर लेप बना लीजिए और चमत्कार देखिए कि जिस अंग पर सात दिन लगातार नियमित कुछ घंटे लगा लिया तो उस स्थान पर जीवन भर बाल नहीं उगेंगे ।



* छोंकर (इसे शमी या श्योनाक भी कहते हैं यह बड़ा पेड़ होता है) के फलों को जो कि लम्बी फलियों के रूप में होते हैं इन्हें बारीक पीस कर जिस जगह बाल नहीं चाहिये वहां एक बार हजामत करके लेप कर दें ; तीन दिनों में आपकी इच्छा पूरी हो जाएगी ।

* खुरासानी अजवायन और अफ़ीम दोनो आधा-आधा ग्राम लें और असली सिरके में घोंट कर लेप बना लें। इस के पांच-सात बार लेप कर लेने से भी जीवन भर बाल नहीं उगते हैं । अगर अफ़ीम मिलने में दिक्कत हो तो इसे न प्रयोग करें.

मांस पेशियों में दर्द का घरेलू उपचार

Raj's Simple 11 Home Remedies for Muscle Pain


मांसपेशियों में दर्द किसी चोट या दुर्घटना, मांसपेशियों के अत्याधिक उपयोग या मांस पेशियों में तनाव, तनाव या चिंता या कुछ मेडिकल परिस्थितियों के कारण हो सकता है। मांसपेशियों के दर्द को प्राकृतिक तरीके से दूर करने के लिए कुछ प्रभावी घरेलू उपचार उपलब्ध है।
कभी कभी बहुत अधिक व्यायाम करने से भी मांसपेशियों में दर्द हो जाता है। इस स्थिति में हमारे शरीर को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इस अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए मांसपेशियों में अवायुश्वसन होता है जिसके कारण लेक्टिक एसिड एकत्रित होने लगता है। इस लेक्टिक एसिड के कारण मांसपेशियों में थकान और दर्द होता है।
सामान्यत: लेक्टिक एसिड विभाजित हो जाता है और मांसपेशियों का दर्द चला जाता है परन्तु इसमें कुछ दिन का समय लगता है। सौभाग्य से मांसपेशियों के दर्द को दूर करने के लिए हमारे पास कुछ घरेलू उपचार उपलब्ध है। कसरत करने के बाद मांसपेशियों के दर्द को कैसे दूर किया जाए तथा मांसपेशियों के दर्द को ठीक करने के लिए क्या अच्छा है? आज बोल्डस्काय आपको मांसपेशियों के किसी भी प्रकार के दर्द को दूर करने के लिए कुछ घरेलू उपचार बताएगा।

1) तेल से मालिश

मालिश से मांसपेशियों में रक्त परिसंचरण बढ़ता है जिससे मांसपेशियों को गर्मी मिलती है तथा यह लेक्टिक एसिड को दूर करता है जबकि तेल मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है और दर्द से राहत दिलाता है। विभिन्न प्रकार के तेल जैसे पाइन, लैवेंडर, अदरक और पिपरमेंट का तेल मांस पेशियों के दर्द को कम करने में सहायक होते हैं।

2) मैग्नीशियम सल्फेट से स्नान

मैग्नीशियम सल्फेट प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला खनिज है जो मांसपेशियों के ऊतकों की सूजन को कम करता है तथा मांसपेशियों के दर्द से आराम पहुंचाता है। यह पुरानी स्थिति जैसे फाईब्रोम्यल्गिया में भी मांसपेशियों के दर्द से आराम दिलाता है। नहाने के लिए मानक आकार के टब को गुनगुने या गर्म पानी से भरें तथा इसमें 1-2 कप ऐप्सम सॉल्ट मिलाएं तथा इस पानी में 15-30 मिनिट आराम करें। इस स्नान से मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन से आराम मिलता है, शरीर को आराम मिलता है और तनाव कम होता है। इस प्रकार व्यायाम करने के बाद मांसपेशियों के दर्द को दूर किया जा सकता है।

3) कोल्ड थेरपी

मांसपेशियों के दर्द को दूर करने के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपचार है। कोल्ड थेरपी को क्रयोथेरेपी भी कहा जाता है जिसमें राहत पाने के लिए चोट की जगह पर आइस (बर्फ़) लगाया जाता है। अक्सर इसका उपयोग खेलकूद के कारण होने वाले लगने वाली चोटों में मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। चोट लगे हए स्थान पर बर्फ़ लगाने से उस स्थान पर रक्त परिसंचरण धीमा हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप उस स्थान पर दर्द और सूजन कम हो जाती है।

4) हीट थेरपी

हीट थेरपी का उपयोग मोच या ऐंठन, मांसपेशियों में जकड़न या ऐंठन के उपचार में किया जाता है। अच्छा होगा कि गंभीर चोटों में हीट थेरपी का उपयोग न किया जाए क्योंकि इसके कारण सूजन बढ़ सकती है और असुविधा हो सकती है। गर्मी से मांसपेशियों के दर्द में आराम मिलता है, मांसपेशियों की जकड़न कम होती है और मांसपेशियों का तनाव कम होता है। गर्मी प्रभावित स्थान पर रक्त परिसंचरण बढ़ाती है से चोट लगे हुए स्थान पर रक्त परिसंचरण बढ़ जाता है जिससे मांसपेशियों की चोट से भी आराम मिलता है।

5) गर्म और ठंडा स्नान

बारी बारी गर्म और ठंडे पानी से स्नान करने से दर्द से तेज़ी से आराम मिलता है। इससे प्रभावित स्थान का रक्त परिसंचरण बढ़ता है, सूजन और दर्द कम कम होता है। ठंडा स्नान दर्द वाले स्नान को सुन्न कर देता है तथा गर्म स्नान मांसपेशियों को आराम देता है, ऐंठन को दूर करता है तथा सम्पूर्ण शरीर के तनाव को कम करता है। पानी में सुगंध वाले तेल जैसे लैवेंडर, यूकेलिप्टस और बरगामोट मिलाने से अतिरिक्त लाभ होता है।

6) जडी बूटियाँ और लेप

कुछ जडी बूटियों में एंटी इम्फ्लेमेट्री (प्रदाहनाशी) और आरामदायक गुण होते हैं। जबकि हर्बल लेप (जडी बूटियों के अर्क का अर्द्ध ठोस रूप जो लोशन, जेल या बामके रूप में होता है) त्वचा तथा ऊतकों में अंदर तक प्रवेश करते हैं तथा आराम पहुंचाते हैं।

7) एक्युप्रेशर

एक्युप्रेशर एक वैज्ञानिक पद्धति है जिसमें आराम पहुंचाने के लिए शरीर के विभिन्न एक्युप्रेशर पॉइंट्स पर प्रेशर (दबाव) देकर उन्हें उत्तेजित किया जाता है। यह मांसपेशियों को आराम पहुंचाने तथा उन्हें ठीक करने में सहायक होता है। मांसपेशियों को आराम देकर और बढ़े हुए एंड्रोफिन्स से मांसपेशियों के दर्द से तीव्र और प्राकृतिक तरीके से आराम पाया जा सकता है।

8) मैगनीशियम

शरीर में मैगनीशियम का स्तर कम होने पर मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन की समस्या हो सकती है। मैगनीशियम का संपूरक लें। आप अपने आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल कर सकते हैं जिनमें मैगनीशियम प्रचुर मात्रा में हो। मैगनीशियम से समृद्ध खाद्य पदार्थों में गुड़, कुम्हड़ा और कद्दू के बीज, पालक, रसपालक, कोका पाउडर, ब्लैक बीन्स, अलसी के बीज, तिल के बीज, सूरजमुखी के बीज, बादाम और काजू शामिल हैं।

9) ऐप्पल सीडर विनेगर

मांसपेशियों के दर्द से कैसे आराम पाया जाए? मांसपेशियों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए एसीवी एक प्रभावी घरेलू औषधि है। एक गिलास पानी में एक या दो चम्मच ऐप्पल सीडर विनेगर मिलकर पीयें। जिस स्थान पर दर्द हो रहा है उस स्थान पर आप विनेगर लगा भी सकते हैं। इससे आपको मांसपेशियों के दर्द से आराम मिलेगा।

10) लाल मिर्च

इसमें कैप्सैसिन पाया जाता है जो ऑर्थराइटिस, जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द और मांसपेशियों के सामान्य दर्द से राहत पहुंचाता है। आप स्वयं पेस्ट बना सकते हैं। इसके लिए एक चौथाई या आधा टेबल स्पून लाल मिर्च को जैतून के तेल (गर्म) या नारियल के तेल में मिलाएं। इसे प्रभावित स्थान पर लगायें तथा लगाने के बाद अपने हाथ धो डालें। इसे अपनी नाक, आँखों और मुंह से दूर रखें क्योंकि इससे जलन हो सकती है।

11) चेरी का रस

चेरी का रस दौड़ने या बहुत अधिक व्यायाम करने के बाद मांसपेशियों में होने वाले दर्द को दूर करने में सहायक होता है। चेरी में एंथोक्यनिंस नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो जलन को कम करता है। दर्द और जलन को कम करने के लिए चेरी का खट्टा रस पीयें। इससे पैरों और हाथ की मांसपेशियों में होने वाले दर्द से आराम मिलेगा।

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