दादी-नानी और पिता-दादाजी के बातों का अनुसरण, संयम बरतते हुए समय के घेरे में रहकर जरा सा सावधानी बरतें तो कभी आपके घर में डॉ. नहीं आएगा. यहाँ पर दिए गए सभी नुस्खे और घरेलु उपचार कारगर और सिद्ध हैं... इसे अपनाकर अपने परिवार को निरोगी और सुखी बनायें.. रसोई घर के सब्जियों और फलों से उपचार एवं निखार पा सकते हैं. उसी की यहाँ जानकारी दी गई है. इस साइट में दिए गए कोई भी आलेख व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं है. किसी भी दवा और नुस्खे को आजमाने से पहले एक बार नजदीकी डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें.
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नोट : यहाँ पर प्रस्तुत आलेखों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को संकलित करके पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करने का छोटा सा प्रयास किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि इनमें बताई गयी दवाओं/तरीकों का प्रयोग करने से पूर्व किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।-राजेश मिश्रा

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सोमवार, अप्रैल 27, 2015

कमर का वजन घटाना हो गया आसान

Easy weight loss was Waist

कुछ ही दिनों में पाएं मनचाहा कमर

शरीर पर चरबी का अधिक होना मोटापे का सबसे बड़ा लक्षण होता है। गलत तरह से खान-पान करना, रहन सहन में भी गलत तरीके प्रयोग करना आदि जैसी वजह से पेट बाहर निकल जाता है। और कमर की चरबी अधिक हो जाती है। धीरे-धीरे मोटापा गर्दन, हाथ और पैरों तक फैल जाता है। यानी इन जगहों पर चरबी अधिक हो जाती है। शरीर पूरी तरह से चरबी युक्त हो जाता है। और इंसान को चलने फिरने में भी दिक्कतों के साथ-साथ कई गंभीर बीमारीयों के होने का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है। आइये आपको बताते है कमर की चरबी को कम कैसे करें। आयुर्वेद में इसका इलाज संभव है।

हैल्थ ऐक्सपर्ट की सलाह पर जिम जाने से ही पेट कम नहीं हो जाएगा. वरन जिम में जा कर कब क्या करें कब क्या न करें, इस की जानकारी होनी भी जरूरी है... 

कमर कम करने की सब से बड़ी रुकावट है जानकारी की कमी. आप यह टैस्ट कर के देख लें. अपने आसपास के जिमों में जा कर देखें, ज्यादातर मोटी महिलाएं जमीन या मशीन पर लेट कर अथवा कई और तरीकों से क्रंचेस (क्रंचेस आमतौर पर वे कसरतें होती हैं, जिन में आप घुटनों को नाक की तरफ लाती हैं या फिर नाक को पेट की तरफ) करती मिलेंगी. यह सब से पौपुलर कसरत है.

यह कसरत 1-2 माह जम कर करने का नतीजा निकलता है कमर में कुछ सैंटीमीटर की कमी आना और पेट का सख्त होना. मैडम, क्रंचेस से सिर्फ पेट सख्त होता है. ये कसरतें उन लोगों के लिए हैं, जिन का पेट फ्लैट है और उन्हें ऐब्स बनाने हैं. अगर आप मोटी हैं, तो आप को फुल बौडी ऐक्सरसाइज करनी होगी. यकीन नहीं आता तो किसी बड़े हैल्थ प्रोफैशनल से कनफर्म कर लें. हम यह नहीं कह रहे कि क्रंचेस किसी काम के नहीं, मगर मोटे लोगों के लिए ये कुल कसरत का 10% ही रहें तो ही ठीक है.

पेट को कम करने वाली कुछ कसरतें

रनिंग, साइकिलिंग, पीटी, क्रौस टे्रनर, बर्पी, स्क्वेट थ्रस्ट, बौक्स जंप, स्किपिंग, कैटलबौल अथवा डंबल स्विंग. अगर आप के पास इंटरनैट की सुविधा है तो इन में से जिन कसरतों के बारे में आप को नहीं पता, उन्हें इसी नाम से सर्च कर के तसवीरें देखें. आप तुरंत समझ जाएंगी.

जरूर घटेगा पेट

आप जिम जाएं, पार्क जाएं और ऐसी कसरतों का चुनाव करें, जिन में आप के ज्यादा से ज्यादा बौडी पार्ट हिस्सा लें. इस बात को गांठ बांध लें कि स्पौट रिडक्शन जैसा कुछ नहीं होता. आप यह सोचें कि सिर्फ कमर कम हो जाए बाकी सब वैसा ही रहे तो यह सिर्फ प्रोफैशनल बौडी बिल्डरों के बस की बात है.

पेट के बारे में सोचना छोड़ कर वेट के बारे में सोचें. वेट कम करने के लिए कार्डियो (रनिंग, पीटी आदि) के साथसाथ वेट टे्रनिंग भी जरूरी है. विज्ञान के साथ चलेंगी तो वक्त और पैसा बरबाद होने से बचा पाएंगी. टाइम ज्यादा है और पास नहीं हो रहा तो ठीक है वरना अपनी कसरत में स्ट्रैचिंग को कम से कम शामिल करें. यह आप के किसी काम की नहीं. जरूरत से ज्यादा कार्डियो का मतलब है अपने पैरों की मसल्स को कमजोर करना. रोज रनिंग करना जरूरी नहीं. आसान कसरतों से वेट कम नहीं होता. आप 20 मिनट कार्डियो करें, उस के बाद वेट टे्रनिंग और फिर हलकीफुलकी स्ट्रैचिंग कर घर जाएं. कभीकभी कार्डियो भी छोड़ दें. बस वार्मअप करें और हैवी वेट टे्रनिंग करें. कभीकभी जिम भी छोड़ें और सिर्फ पार्क में वक्त बिताएं. चैलेंज लें, अपनी सीमाओं को पहचान कर उन्हें लांघने की कोशिश करें. पेट खुदबखुद कम हो जाएगा.
  • एक छोटा सा प्लास्टिक का डब्बा रख कर उस पर 1 घंटे तक वनटूवनटू करने से 10 गुना बेहतर है, जिम में मौजूद सारे वेट को एक से दूसरी जगह रखना. इस सच को स्वीकार करें कि वेट कम करने की कसरत स्टाइलिश नहीं होती. वह बुरी होती है, दम निकालने वाली होती है.
  • कमर की चरबी कम करने के लिए आप इन उपायों का प्रयोग कर सकते हो कमर की चरबी को कम करने का सबसे पहला नियम जो आयुर्वेद में है। वह है भूख से कम ही भोजन का सेवन करें। जितनी भूख है उससे कम ही खाना खायें। इससे पेट का आकार नहीं बढ़ता और पाचन भी ठीक रहता है। कम भोजन करने से पेट में गैस नहीं बनती है। कोशिश करें कि दिन में 2 बार शौच जाएं।
  • मोटापे से मुक्ति का एक और बड़ा सरल उपाय यह है कि भोजन के तुरंत बाद पानी का सेवन न करें। भोजन करने के लगभग 1 घंटे के बाद ही पानी पीयें। इससे कमर का मोटाप नहीं बढ़ता है। और यह तरीका पेट को कम करने में भी मददगार होता है।
  • भोजन में अधिक से अधिक जौ से बने आटे की रोटियों का इस्तेमाल करें। गेहूं के आटे की रोटी का सेवन बिलकुल कम कर दें। जौ शरीर में मौजूद अतरिक्त चरबी को कम कर देता है। जिससे कमर और पेट की चरबी कम हो जाती है।
  • वजन कम करने और अतरिक्त चरबी को कम करने के लिए आपको यह भी पता होना चाहिए कि भोजन में किन चीजों को इस्तेमाल करें और किन का नहीं। आपको चावल, आलू और चपाती का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए साथ ही खाने में कच्चा सलाद, सब्जी और मिक्स वेज का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए।
  • हमेशा खाना भूख लगने पर ही खाएं। खाना खाते वक्त यह बात जरूर ध्यान रखें कि खाने को मुंह में अच्छी तरह से बारीकी से चबाकर खाएं ताकि आसानी से भोजन गले से नीचे उतर सके।
  • सुबह के नाश्ते में आप चना, मूंग और सोयाबीन को अधिक से अधिक खाने में उपयोग करें। अंकुरित अनाज में आपको भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व आपको मिलेगें। जो मोटापा को बढ़ने नहीं देगें। दलिया को भी आप अपने नाश्ते में जरूर शामिल करें।
  • कमर की अधिक चरबी को कम करने के लिए आपको अपने खाने में हरी सब्जियों का अत्याधिक सेवन करना चाहिए। आप मेथी, पालक, चैलाई की सब्जी को अपने खाने में शमिल करें। हरी सब्जियों में मौजूद कैल्श्यिम और फाइबर आपके शरीर में पोषक तत्वों को पहुंचाते हैं। और इनसे आपका शरीर भी स्वस्थ रहेगा।
  • गर्मियों में दही या मट्ठा के सेवन करने से शरीर के चरबी घटती है। दिन में 2 से 3 बार मट्ठा का सेवन करें।
  • सुबह खाली पेट गरम पानी में 2 चम्मच शहद डालकर 2 महीने तक सेवन करने से कमर का मोटापा कम होता है। इसके अलावा तेल की मालिश करने से भी कमर की चरबी को कम किया जा सकता है।
  • आपको अपने जीवन शैली में एक छोटा सा परिवर्तन लाना जरूरी है। जैसे चढ़ने और उतरने के लिए सीढ़ी का इस्तेमाल करें। साईक्लिंग करना, जाॅगिंग, टहलना, और व्यायाम जरूर करें। एैसा करने से आपकी कमर की चरबी तो कम होगी ही साथ ही आपको मोटापे से मुक्ति मिल जाएगी।

शुक्रवार, अप्रैल 24, 2015

अनेक बीमारियों की रामबाण औषधि : पपीता

पपीते के गुण - पपीता के फायदे

Herbal Papaya is cosmetic

पेट का ही नहीं खूबसूरती और किडनी का भी ख़याल रखता है ...

पपीता एक ऐसा गुणकारी फल है, जो मिलने में जितना आसान है उतना ही लाभदायक और सौंदर्यवर्द्धक भी है। इस पौष्टिक और रसीले फल से कई विटामिन मिलते हैं, नियमित रूप से खाने से शरीर में कभी विटामिन्स की कमी नहीं होती। राजेश मिश्रा के अनुसार बीमार व्यक्ति को दिए जाने वाले फलों में पपीता भी शामिल होता है, क्योंकि इसके एक नहीं, अनेक फायदे हैं।आसानी से अवशोषित होने से यह शरीर को काफी जल्दी फायदा पहुंचाता है। पपीता एक ऐसा फल है, जो कच्चा और पका हुआ दोनों ही रूप में खाया जाता है। कच्चा फल हरे रंग का दिखाई देता है, अधिकतर इसकी सब्जी बनाई जाती है। फल के रूप में ज्यादातर पका हुआ पपीता ही खाया जाता है। पपीता को गुणों की खान कहा गया है। यह आपके पेट का भी खयाल रखता है और त्वचा की खूबसूरती का भी। यह कई बीमारियों से दूर रखता है और इसका स्वाद भी बेजोड़ है। पपीता के फायदों के बारे में बता रहे  हैं राजेश मिश्रा- 

क्या-क्या मिलता है?

प्रचुर मात्रा में विटामिन ए, बी और सी के साथ ही कुछ मात्रा में विटामिन-डी भी मिलता है। पपीता पेप्सिन नामक पाचक तत्व का एकमात्र प्राकृतिक स्रोत है। इसमें कैल्शियम और कैरोटीन भी अच्छी मात्रा में मिलता है। इसके अलावा फॉस्फोरस, पोटेशियम, आयरन, एंटीऑक्सीडेंट्स, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन भी होता है। पपीता सालभर बाजार में उपलब्ध होता है।

पपीता के गुण


  • पपीता पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे पाचन तंत्र ठीक रहता है और पेट के रोग भी दूर होते हैं। पपीता पेट के तीन प्रमुख रोग आम, वात और पित्त तीनों में ही राहत पहुंचाता है। यह आंतों के लिए उत्तम होता है।
  • पपीते में बड़ी मात्रा में विटामिन-ए होता है। इसलिए यह आंखों और त्वचा के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। इससे आंखों की रोशनी तो अच्छी होती ही है, त्वचा भी स्वस्थ, स्वच्छ और चमकदार रहती है।
  • पपीते में कैल्शियम भी खूब मिलता है। इसलिए यह हड्डियां मजबूत बनाता है।
  • यह प्रोटीन को पचाने में सहायक होता है।
  • पपीता फाइबर का अच्छा स्रोत है।
  • इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, कैंसर रोधी और हीलिंग प्रॉपर्टीज भी होती है।
  • जिन लोगों को बार-बार सर्दी-खांसी होती रहती है, उनके लिए पपीते का नियमित सेवन काफी लाभकारी होता है। इससे इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है।
  • इसमें बढ़ते बच्चों के बेहतर विकास के लिए ज़रूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। शरीर को पोषण देने के साथ ही रोगों को दूर भी भगाता है।
  • पपीता खाने में जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही हमारी सेहत को भी लाभ पहुंचाता है। सेहत के लिए पपीते का रस भी बहुत गुणकारी होता है।
  • पपीता न सिर्फ सेहत के लिए बल्कि यह बालों व स्किन के लिए भी अच्छा होता है, इतना ही नहीं पपीते को सलाद के रूप में भी खाया जा सकता है। यानी सलाद खाएं सेहत बनाएं। आइए जानें पपीते खाने से सेहत पर क्‍या प्रभाव पड़ता है।
  • पपीते में बड़ी मात्रा में विटामिन ए, पोटेशियम और कैल्शियम होता है। इसमें विशेष रूप से एंजाइम होते हैं, जो मांसाहारी आहार करने वालों के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि यह हाई कैलोरी मांसाहारी भोजन को पचाने में भी मदद करता है।
  • पपीता बहुत जल्दी पचने वाला फल है। पपीते से दाद, खाज, खुजली दूर हो जाती है।
  • पपीते के सेवन से न सिर्फ उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है बल्कि ये ऊर्जा बढ़ाने में भी कारगर है। 
  • त्वचा पर अगर कहीं कट लग गया है या उसमें सूजन, जलन है तो पपीते को उस जगह लगाकर आराम मिलता है।
  • यदि किसी के पेट में कीड़े है तो पपीते के बीज और छिलके इस बीमारी को दूर करने में फायदेमंद है।
  • जिन लोगों को बहुत अधिक कब्ज की शिकायत रहती है उनके लिए पपीता किसी औषधी से कम नहीं।
  • पपीते के सेवन से अर्थराइटिस के दर्द और कैंसर जैसी बीमारियों से राहत मिलती हैं, हालांकि इससे बीमारी को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता लेकिन ये इन बीमारियों से होने वाले दर्द और अन्य़ समस्याओं से निजात दिलवाता है।
  • पपीता खाने से शरीर अंदरूनी रूप से स्वस्थ रहता है जिस कारण हमें सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी बीमारियां भी नहीं होती।
  • लंबी उम्र पाने और लंबे समय तक जवान रहने के लिए पपीता खाना लाभाकारी है।
  • पपीते के सेवन से आमाशय और आंत संबंधी विकारों में बहुत लाभ मिलता है।
  • हृदय, नाड़ियों तथा पेशियों की क्रिया ठीक रखने में भी पपीते के सेवन से मदद मिलती है।
  • पपीते के सेवन से चेहरे पर झुर्रियां पड़ना, बालों का झड़ना, बवासीर, चर्मरोग, अनियमित मासिक धर्म आदि अनेक बीमारियां दूर हो जाती है।
  • यह हृदय रोगियों और डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। यह उच्च कोलेस्ट्राल स्तर को कम करने में मदद करता है।
  • पपीते का रस प्रोटीन को आसानी से पचा देता है। इस कारण आंत और पेट के विकारों के लिए काफी लाभदायक होता है। इसके नियमित सेवन से कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है। इसमें पाए जाने वाला एंजाइम शरीर में होने वाली सूजन को कम करने में मदद करता है।
  • पपीते में पाया जाने वाला विटामिन ए त्वचा और आंखों के लिए काफी उपयोगी होता है। - इसमें पाए जाने वाला कैल्शियम शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करता है। यह शरीर की पाचन क्षमता को सही रखता है साथ ही पेट के संक्रमण से बचाता है।
  • पपीते के चूर्ण का सेवन करने से आमशय की जलन, जख्म, अपच दूर होता है।
  • आधा पका पपीता पीस कर चेहरे पर नित्य लेप करके एक घंटे बाद धोयें। कील, मुंहासे, झुर्रियां दूर होकर चेहरा सुन्दर हो जायेगा। ऐसा दो माह करें।
  • लंबे समय तक नित्य पपीता खाने से चर्बी कम होती है और कमर का सौंदर्य बढ़ता है।
  • पपीता पेट के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। पपीता पेट साफ करता है। यकृत को ताकत देने वाला है। छोटे बच्चे जिनका यकृत खराब होता है, उन्हें पपीता खिलाना चाहिए। पेट के रोगों के लिए पपीता कारगर फल है।
  • कब्ज, अजीर्ण और रक्तस्रावी बवासीर में पका हुआ पपीता लाभदायक है।
  • पपीते के दस बीज पानी में पीस कर चौथाई कप पानी में मिलाकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। एक हफ्ते इसका नित्य प्रयोग करें।
  • उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने के लिए सुबह खाली पेट चार फांक पका हुआ पपीता दो-तीन महीने खाते रहें।
  • पपीते का दूध दाद पर लगाने से लाभ होता है।
  • तिल्ली व पीलिया में नियमित पपीता खाने से लाभ होता है।
  • सुबह पपीता खाकर दूध पीने से कब्ज दूर होता है।
  • पपीता खाने से मूत्राशय के इंफेक्शन में भी फायदा मिलता है।
  • हर प्रकार के बवासीर में पका हुआ पपीता नित्य खाने से लाभ होता है।
  • पपीता खाने से पेशाब अधिक आती है।
  • जोड़ों के दर्द के रोगी पपीता नित्य खाएं। यह वात दर्द का शमन करता है।
  • अपच, अम्लपित्त, प्लीहा (स्पिलीन) बढ़ जाये तो खाली पका हुआ पपीता स्वाद के लिए काली मिर्च, काला नमक, सैंधा नमक डाल कर कुछ सप्ताह खायें, पेट के रोगों में लाभ होगा।
  • उद्योग, यातायात में डीजल आदि के धुएं से वायुमंडल दूषित होता है। सांस लेने में दम घुटता है। पपीता के ताजे बीज रुमाल में रख कर सूंघते हुए यात्रा करें। ताजा बीज नहीं हो तो सूखे बीज पानी में भिगोकर काम में लें। पपीता खायें। पपीता प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाता है।
  • नवजात बच्चे के लिए मां का दूध लाभकारी होता है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि स्तनों में दूध की कमी से बच्चा इस लाभ से वंचित हो जाता है। ऐसी मां कच्चे पपीते की सब्जी खाएं। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है। पका हुआ पपीता खाने से भी दूध बढ़ता है।
  • जिन महिलाओं और लड़कियों का मासिक धर्म अनियमित है, देर से या जल्दी आता है, मासिक स्राव में दर्द होता है। पपीते से सूखे बीज पीस कर आधा चम्मच सुबह-शाम गर्म पानी से फक्की मासिक स्राव आने के एक सप्ताह पहले से आरंभ करके मासिक धर्म का स्राव बन्द होने तक दो तीन महीने लेते रहने से मासिक धर्म के दोष दूर होकर मासिक धर्म आने लगता है।
  • दक्षिण भारत की औरतों का विश्वास है कि पपीते में गर्भ गिराने के शक्तिशाली गुण हैं। गर्भावस्था में पपीता नहीं खाना चाहिए।

गुरुवार, अप्रैल 23, 2015

यौन शक्ति बढ़ाने के अचूक घरेलू उपाय

यौन शक्ति बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे
Ayurvedic tips to increase Sexual Potency


सेक्स लाइफ से संतुष्ट नहीं है। अगर आपको लगता है कि आपकी शक्ति इतनी ज्यादा नहीं है कि आप ज्यादा देर तक यौन सुख का आनंद ले सकें, तो अपनाइए कुछ आसान से टिप्स जो आपकी यौन शक्ति को बढ़ाएगा।
आयुर्वेद और बुजुर्गों के अनुभव के आधार पर हम लाए हैं आपके लिए कुछ खास ऐसे नुस्खे जो ना सिर्फ यौन शक्ति में वृद्धि कर सकते हैं बल्कि इनके प्रयोग से शारीरिक शक्ति और सुंदरता में भी बढ़ोतरी हो सकती है। पेश है आसान और अचूक नुस्खे सेक्स पॉवर बढ़ाने के- 

  • 100-100 ग्राम उड़द व गेहूं का आटा और पिप्पली चूर्ण लेकर उसमें 600 ग्राम शकर की चाशनी और सूखे मेवे मिलाकर लड्डू बनाएं। इसे 30-40 ग्राम की मा‍त्रा में लेकर हर रोज रात को सोने से पहले खाकर ऊपर से दूध पीएं। इसके सेवन से सेक्स संबंधी सभी शिकायतें दूर हो जाती हैं और शारीरिक शक्ति में बढ़ोतरी होती है।
  • प्याज को सलाद, सब्जी या अन्य व्यंजन के रूप में सेवन करने से सेक्स की कमजोरी और महिलाओं की माहवारी की अनियमितता दूर होती है।
  • पेठे का मुरब्बा बनाकर सुबह-शाम सेवन करने से कामशक्ति बढ़ती है या फिर पेठे के बीज का चूर्ण बनाकर 3-5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से भी लाभ होता है।

  • सेक्स संबंधी स‍‍‍भी विकारों के लिए सिंघाड़े का सेवन रामबाण औषधि है। 5-10 ग्राम सिंघाड़े के आटे को दूध में पकाकर सुबह-शाम सेवन करने सेक्सुअल प्रॉब्लम्स दूर होती हैं। इसका नियमित सेवन सेक्स टॉनिक का काम करता है।

तुलसी :

15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।

लहसुन : 

200 ग्राम लहसुन पीसकर उसमें 60 मिली शहद मिलाकर एक साफ-सुथरी शीशी में भरकर ढक्कन लगाएं और किसी भी अनाज में 31 दिन के लिए रख दें। 31 दिनों के बाद 10 ग्राम की मात्रा में 40 दिनों तक इसको लें। इससे यौन शक्ति बढ़ती है।

जायफल : 

एक ग्राम जायफल का चूर्ण प्रातः ताजे जल के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में ही यौन दुर्बलता दूर होती है।

दालचीनी : 

दो ग्राम दालचीनी का चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य बढ़ता है और यौन दुर्बलता दूर होती है।

खजूर : 

शीतकाल में सुबह दो-तीन खजूर को घी में भूनकर नियमित खाएं, ऊपर से इलायची- शक्कर डालकर उबला हुआ दूध पीजिए। यह उत्तम यौन शक्तिवर्धक है।

तुलसी : 

15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।

1. दिमाग को चिंता मुक्त रखें

क्या होगा..कैसे होगा..इस तरह की किसी भी यौन अपेक्षा से अपने दिमाग को पूरी तरह से मुक्त रखें। खुद पर किसी भी तरह का दबाव ना डालें।

2. लूब्रिकेशन का इस्तेमाल करें

"द जर्नल ऑफ सेक्शुअल मेडिसिन" की एक रिसर्च के मुताबिक जो पुरुष लूब्रिकेशन और कॉन्डम का इस्तेमाल करते हैं वो ज्यादा देर तक यौन सुख का आनंद उठा पाते हैं।

3. खुद को लिमिट में ना बांधे

हफ्ते में एक बार, महीने में एक बार, इस तरह की लिमिट में अपने रिश्ते को ना बांधे। इसकी जगह बार बार सेक्स करें। इससे लंबे समय तक आपका स्टैमिना बना रहेगा।

4. एक्टिव रहें

यौन क्रिया में काफी ऊर्जा और मेहनत लगती है। और इस ऊर्जा आपको एक्ससाइज़ करने से ही मिल सकती है। व्यायाम करने से ना सिर्फ आपका स्टैमिना बढ़ता है बल्कि रक्त संचालन भी बेहतर होता है।

5. ऐल्कॉहॉल से दूर रहें

अगर आप सेक्स का भरपूर आनंद उठाना चाहते हैं तो शराब और ऐल्कॉहॉल मिक्स्ड ड्रिंक्स से दूर रहें। इनका इस्तेमाल शरीर को कमजोर करता है।

6. खाने में प्रोटीन लें

वैसे भोजन का सेवन करें जिसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो। अंडे की सफेदी, दूध, दूध से बनी चीजें, मछली, चिकन इन सब में काफी प्रोटीन होता है।

7. संतुलित आहार खाएं

अपनी यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए जरुरी है कि आप अपने खान-पान पर पूरा ध्यान दें। अपने खाने में लो फैट वाली चीजों को शामिल करें। फल और सब्जियां ज्यादा खाएं। इससे आपका शरीर स्वस्थ रहेगा और आपकी शारीरिक और मानसिक दोनों शक्ति बढ़ेगी।

8. तनाव से बचें

किसी भी तरह के तनाव से दूर रहें। अगर आप स्ट्रेस्ड हैं तो मेडिटेशन करें और अपना मूड बदलें। साथ ही ये भी जरुरी है कि आप अच्छी नींद लें।

लाइलाज नहीं है मिरगी

Epilepsy: The disease is large, treatment short
मिर्गी : रोग बड़ा है, उपचार छोटा

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मिर्गी लाइलाज रोग है। मिर्गी का इलाज संभव है अगर मरीज इसका उपचार सही ढंग से कराए। जरा भी कोताही न बरते। जैसे ही रोग के लक्षण दिखें न्यूरोलॉजिस्ट की राय लें। इसके इलाज में धैर्य बहुत जरूरी होता है ... 
मिर्गी एक ऐसी बीमारी है जिसे लेकर लोग अक्सर बहुत ज्यादा चिंतित रहते हैं। हालांकि रोग चाहे जो भी हो, हमेशा परेशान करने वाली तथा घातक होती है। इसलिए हमें किसी भी मायने में किसी भी रोग के साथ कभी भी बेपरवाह नहीं होना चाहिए। खासतौर पर जब बात मिर्गी जैसे रोगों की हो तो हमें और भी सतर्क रहना चाहिए। मिर्गी के रोगी अक्सर इस बात से परेशान रहते हैं कि वे आम लोगों की तरह जीवन जी नहीं सकते। उन्हें कई चीजों से परहेज करना चाहिए। खासतौर पर अपनी जीवनशैली में आमूलचूल परिवर्तन करना पड़ता है जिसमें बाहर अकेले जाना प्रमुख है। हम इस विषय में आगे चर्चा करेंगे। इससे पहले यह जान लें कि आखिर मिर्गी क्या है?
मस्तिष्क के समस्त कोषों में एक विद्युतीय प्रवाह होता है। ये सारे कोष विद्युतीय नाड़ियों के जरिए आपस में सम्पर्क कायम रखते हैं, लेकिन जब कभी मस्तिष्क में असामान्य रूप से विद्युत का संचार होने लगता है तो मरीज को विशेष प्रकार के झटके लगते हैं और वह बहोश हसो जाता है। लेकिन यह पहले से तय नहीं होता कि व्यक्ति विशेष कितनी देर तक बेहोश रहेगा। कभी वह चंद सेकेंड के लिए भी बेहोश हो सकता तो कभी मिनट या फिर घंटों तक भी बेहोशी उस पर छायी रह सकती है। अचरज की बात यह है कि दौरा समाप्त होते ही मरीज बिल्कुल सामान्य हो जाता है। उसमें जरा भी कमजोरी के भाव नहीं रह जाते।
मिर्गी का रोगी किसी भी उम्र वर्ग का हो सकता है। बच्चे भी इसका शिकार होते हैं। लेकिन इसके कुछ कारण होते हैं। यदि बच्चे को मिर्गी के दौरे पड़ते हैं तो इसके पीछे भी कई बड़ी वजह होती है। पहला, यदि बच्चा जन्म के समय 3 मिनट तक न रोए तो उसे इस समस्या का बेड होकर सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यदि बच्चे के शरीर का तापमान 101 से अधिक हो जाए। कहने का मतलब है कि शरीर का ताप सामान्य रहना जरूरी है। जरूरत से ज्यादा शारीरिक ताप भी उसे रोगी कर सकता है। मिर्गी जैसे समस्याओं की चपेट में ला खड़ा कर सकता है। तीसरी वजह यह है कि सिर में गहरी चोट लग गई हो तो मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं। सिर में ट्यमूर हो तो भी मरीज को मिर्गी घेर लेती है। अंतिम रूप से यह कहा जा सकता है कि शिशु और बच्चे को अगर सिर से जुड़ी कोई भी बीमारी है तो उन्हें मिर्गी हो सकती है।
जिनमें मिर्गी के दौरे पड़ते हैं, वे इस बात से भलीभांति परिचित होंगे कि दौरे पड़ने पर कैसी स्थिति हो जाती है या जिन घरों में मिर्गी के मरीज मौजूद हैं उन्हें इस बात का अल्हाम है कि मिर्गी के मरीजों के साथ कितनी सतर्कता बरतनी पड़ती है। दरअसल कई बार मिर्गी के रोगी को जब दौरे पड़ते हैं तो सामने वाला उस देखकर डर जाता है। दौरे के समय कुछ मरीज के मुंह से झाग निकलता है और उसके शरीर में अकड़न आने लगती है। जानकारियों के अभाव के चलते हमारे समाज में कई लोग इसके बारे में अलग-अलग सोच रखते हैं। यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि मिर्गी कोई मानसिक रोग नहीं है। इसलिए मरीज को मानसिक रोगी न समझने की भूल करें और न ही उसे यह एहसास कराएं कि वह मानसिक रोगी है।
सामान्यतः मिर्गी रोग दो तरह का हो सकते हैं आंशिक तथा पूर्ण। आंशिक मिर्गी से मस्तिष्क का एक भाग ज्यादा प्रभावित होता है, वहीं पूर्ण मिर्गी में मस्तिष्क के दोनों भाग प्रभावित होते हैं। इसी प्रकार अलग-अलग रोगियों में इसके लक्षण भी अलग-अलग होते हैं। दौरा पड़ने के समय, आमतौर पर मरीज कुछ देर के लिए बेहोश हो सकता है। मिर्गी अक्सर उन्हें परेशान करती है जिनकी भागदौड़ भरी जिन्दगी होती है। जरूरत से ज्यादा तनाव, नींद पूरी न होना और शारीरिक क्षमता से अधिक मानसिक व शारीरिक काम करने के कारण किसी को भी मिर्गी की परेशानी हो सकती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मिर्गी लाइलाज रोग है। मिर्गी का इलाज संभव है अगर मरीज इसका उपचार सही ढंग से कराए। जरा भी कोताही न बरते। जैसे ही रोग के लक्षण दिखें न्यूरोलॉजिस्ट की राय लें। इसके इलाज में धैर्य बहुत जरूरी होता है। मिर्गी रोगी का इलाज 3 से 5 वर्ष तक चल सकता है। सामान्य तौर पर इस रोग के लिए 15-20 दवाइयां मौजूद हैं। डाक्टर मरीज के जरूरतों के अनुसार इन दवाइयों का प्रयोग करते हैं। यदि एक दवाई का मरीज पर असर नहीं होता तो डाक्टर बाकी दवाइयों से उपचार करते हैं। जैसे ही दवा असर करने लगती है मरीज ठीक होना आरम्भ कर देता है। कहने का मतलब है कि रोग पर काबू पाना शुरू हो जाता है।
यूं तो मिर्गी सबके लिए घातक रोग है। लेकिन अगर किसी गर्भस्थ महिला को भी यह रोग है तो उन्हें आम लोगों की तुलना में ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। हालांकि मिर्गी की स्थिति में गर्भ धारण करने में कोई परेशानी नहीं होती। न ही उसका बच्चे पर कोई असर पड़ता है। बावजूद इसके नियमित रूप से गर्भवती महिलाओं को डाक्टरों की सलाह लेनी चाहिए और दवाइयों का सेवन जरूरी है। इसलिए जब भी आप घर से बाहर निकलें तो कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें। मसलन घर से जब भी बाहर जाएं अपने पास परिचय कार्ड अवश्य रखें साथ ही दवा का विवरण भी ताकि कहीं बीच राह में किसी को आपकी स्थिति बिगड़ती नजर आए तो वह आपकी मदद कर सके जिसमें उसमें आपकी दवाइयों का विवरण व परिचय कार्ड सहायक होगा।
एक बात उन लोगों को भी जहन में रखना चाहिए, जिनके घर में मिर्गी के मरीज हैं मसलन दौरा पड़ने के समय मरीज के हाथों में लोहे कोई चीज पकड़ा देने या पुराना जूता सुंघाना। ये दोनों आतर्किक बातें हैं। इनका मरीज के स्वास्थ्य कोई सरोकार नहीं है इसलिए उन चीजों को न करें। चूंकि मिर्गी का दौरा दो-तीन मिनट तक रहता है इसलिए लोगों को लगता है कि उनके नुस्खे की वजह से सब ठीक हो गया है।

मिर्गी एक नाडीमंडल संबंधित रोग है जिसमें मस्तिष्क की विद्युतीय प्रक्रिया में व्यवधान पडने से शरीर के अंगों में आक्षेप आने लगते हैं। दौरा पडने के दौरान ज्यादातर रोगी बेहोंश हो जाते हैं और आंखों की पुतलियां उलट जाती हैं। रोगी चेतना विहीन हो जाता है और शरीर के अंगों में झटके आने शुरू हो जाते हैं। मुंह में झाग आना मिर्गी का प्रमुख लक्षण है। 

आधुनिक चिकित्सा विग्यान में मिर्गी की लाक्षणिक चिकित्सा करने का विधान है और जीवन पर्यंत दवा-गोली पर निर्भर रहना पडता है। लेकिन रोगी की जीवन शैली में बदलाव करने से इस रोग पर काफ़ी हद तक काबू पाया जा सकता है।

कुछ निर्देश और हिदायतों का पालन करना मिर्गी रोगी और उसके परिवार जनों के लिये परम आवश्यक है। शांत और आराम दायक वातावरण में रहते हुए नियंत्रित भोजन व्यवस्था अपनाना बहुत जरूरी है।

भोजन भर पेट लेने से बचना चाहिये। थोडा भोजन कई बार ले सकते हैं। 

रोगी को सप्ताह मे एक दिन सिर्फ़ फ़लों का आहार लेना उत्तम है। थोडा व्यायाम करना भी जीवन शैली का भाग होना चाहिये।

मिर्गी रोगी की चिकित्सा ऐसे करें---
  • अंगूर का रस मिर्गी रोगी के लिये अत्यंत उपादेय उपचार माना गया है। आधा किलो अंगूर का रस निकालकर प्रात:काल खाली पेट लेना चाहिये। यह उपचार करीब ६ माह करने से आश्चर्यकारी सुखद परिणाम मिलते हैं।
  • एप्सम साल्ट (मेग्नेशियम सल्फ़ेट) मिश्रित पानी से मिर्गी रोगी स्नान करे। इस उपाय से दौरों में कमी आ जाती है और दौरे भी ज्यादा भयंकर किस्म के नहीं आते है।
  • मिट्टी को पानी में गीली करके रोगी के पूरे शरीर पर प्रयुक्त करना अत्यंत लाभकारी उपचार है। एक घंटे बाद नहालें। इससे दौरों में कमी होकर रोगी स्वस्थ अनुभव करेगा।
  • विटामिन ब६ (पायरीडाक्सीन) का प्रयोग भी मिर्गी रोग में परम हितकारी माना गया है। यह विटामिन गाजर, मूम्फ़ली,चावल, हरी पतीदार सब्जियां और दालों में अच्छी मात्रा में पाया जाता है। १५०-२०० मिलिग्राम विटामिन ब६ लेते रहना अत्यंत हितकारी है।
  • मानसिक तनाव और शारिरिक अति श्रम रोगी के लिये नुकसान देह है। इनसे बचना जरूरी है।
  • मिर्गी रोगी को २५० ग्राम बकरी के दूध में ५० ग्राम मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर नित्य प्रात: दो सप्ताह तक पीने से दौरे बंद हो जाते हैं। जरूर आजमाएं।
  • रोजाना तुलसी के २० पत्ते चबाकर खाने से रोग की गंभीरता में गिरावट देखी जाती है। 
  • पेठा मिर्गी की सर्वश्रेष्ठ घरेलू चिकित्सा में से एक है। इसमें पाये जाने वाले पौषक तत्वों से मस्तिष्क के नाडी-रसायन संतुलित हो जाते हैं जिससे मिर्गी रोग की गंभीरता में गिरावट आ जाती है। पेठे की सब्जी बनाई जाती है लेकिन इसका जूस नियमित पीने से ज्यादा लाभ मिलता है। स्वाद सुधारने के लिये रस में शकर और मुलहटी का पावडर भी मिलाया जा सकता है।
  • १०० मिलि दूध में इतना ही पानी मिलाकर उबालें दूध में लहसुन की 4 कुली चाकू से बारीक काटक्रर डालें ।यह मिश्रण रात को सोते वक्त पीयें। कुछ ही रोज में फ़ायदा नजर आने लगेगा।
  • गाय के दूध से बनाया हुआ मक्खन मिर्गी में फ़ायदा पहुंचाने वाला उपाय है। दस ग्राम नित्य खाएं।
  • तुलसी की पत्तियों के साथ कपूर सुंघाने से मिर्गी के रोगी को होश आ जाता है। 
  • राई पीसकर चूर्ण बना लें। जब रोगी को दौरा पड़े तो सुंघा दें इससे रोगी की बेहोशी दूर हो जायगी।
  • मिर्गी के रोगी के लिए शहतूत का रस लाभदायक होता है। सेब का जूस भी मिर्गी के रोगी को लाभ पहुंचता है।
  • मिर्गी के रोगी के पैरों तलवों में आक की आठ-दस बूंदे रोजाना शाम के समय मलें। ऐसा 2 महीनों तक रोजाना करें। इससे काफी लाभ मिलेगा।
  • तुलसी के पत्तों को पीसकर शरीर पर मलने से मिरगी के रोगी को लाभ होता है।
  • तुलसी के पत्तों के रस में जरा सा सेंधा नमक मिलाकर 1 -1 बूंद नाक में टपकाने से मिरगी के रोगी को लाभ होता है। 
  • मिरगी के रोगी को ज़रा सी हींग को निम्बू के साथ चूसने से लाभ होता है| 
होम्योपैथी की औषधियां मिर्गी में हितकारी सिद्ध हुई हैं। 

कुछ होम्योपैथिक औषधियां है--

क्युप्रम, आर्टीमेसिया, साईलीशिया, एब्सिन्थियम, हायोसायमस, एगेरिकस, स्ट्रामोनियम, कास्टिकम, साईक्युटा विरोसा,  ईथुजा| इन दवाओं का लक्षणों के मुताबिक उपयोग करने से मिर्गी से मुक्ति पाई जा सकती है।

बालों के लिए कारगर उपाय

Effective Hair for 41 Raj Home Remedyलंबे-घने बालों के लिए राज का 41 घरेलू उपाय

घर में बने नेचुरल हेयर मास्क से अब आपके बाल और भी खूबसूरत हो सकते हैं। हेयर मास्क बालों की जड़ों तक जाकर उनको रिपेयर, मॉइस्चराइज करने के साथ उनकी कंडीशनिंग भी करते हैं। उपरोक्त हेयर मास्क डेंड्रफ, दोमुंहे बाल और झड़ते बालों से छुटकारा दिलाने का दावा करते हैं।

कोकोनट-केस्टर ऑइल मास्क : इस मास्क से आपके बाल और भी मुलायम और खूबसूरत बनते हैं। अरंडी के तेल के उपयोग से बाल और भी घने होते हैं, साथ ही दोमुंहे बालों से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

कोकोनट-केस्टर ऑइल मास्क बनाने की विधि : 5 टेबल स्पून नारियल तेल, 5 टेबल स्पून अरंडी का तेल इन दोनों को मिलाकर बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक अच्छे से लगाकर 1 घंटे तक शॉवर कैप से ढंक लें। इसके बाद बालों को शैम्पू से धो लें।

बनाना मास्क : केले को अच्छे से मिक्सर में ग्राइंड कर लें, फिर इसमें 1 चम्मच शहद या नींबू का रस मिला लें। अब इस घोल को बालों की जड़ों से सिरों तक लगा लें। अब गुनगुने पानी से सिर धो लें। इस मास्क को लगाने से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं।

ओटमील हेयर मास्क : यह मास्क बालों को ग्रीसी स्केल्प, डेंड्रफ और इची स्केल्प से राहत पहुंचाने में मदद करता है। जई, दूध, बादाम का तेल, जैतून का तेल मिलाकर इसका पेस्ट बना लें और बालों को अच्छे से कंघी करके लगा लें, फिर 30 मिनट के बाद बालों को गुनगुने पानी से धो लें। ओट मील हेयर मास्क हफ्ते में दो बार लगाएं।
हाइबिस्कस (जपापुष्प) हेयर मास्क : यह मास्क कमजोर जड़ों के लिए काफी फायदेमंद है। जपापुष्प से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं। रात को जपापुष्प की पत्तियों को 1 कप पानी में भिगोकर रखें फिर जैतून के तेल, नारियल के तेल और दही को मिलाकर ग्राइंड कर लें। इस घोल को बालों में 30 मिनट तक लगाकर रखें, इसके बाद बालों को पानी से धो लें।

लंबे खूबसूरत बालों के लिए टिप्स

1- घी खाएं और बालों के जड़ों में घी मालिश करें।
2- गेहूं के जवारे का रस पीने से भी बाल कुछ समय बाद काले हो जाते हैं।
3- तुरई या तरोई के टुकड़े कर उसे धूप मे सूखा कर कूट लें। फिर कूटे हुए मिश्रण में इतना नारियल तेल डालें कि वह डूब जाएं। इस तरह चार दिन तक उसे तेल में डूबोकर रखें फिर उबालें और छान कर बोतल भर लें। इस तेल की मालिश करें। बाल काले होंगे।
4- नींबू के रस से सिर में मालिश करने से बालों का पकना, गिरना दूर हो जाता है। नींबू के रस में पिसा हुआ सूखा आंवला मिलाकर सफेद बालों पर लेप करने से बाल काले होते हैं।
5- बर्रे(पीली) का वह छत्ता जिसकी मक्खियाँ उड़ चुकी हो 25 ग्राम, 10-15 देसी गुड़हल के पत्ते,1/2 लीटर नारियल तेल में मंद मंद आग पर उबालें सिकते-सिकते जब छत्ता काला हो जाये तो तेल को अग्नि से हटा दें. ठंडा हो जाने पर छान कर तेल को शीशी में भर लें. प्रतिदिन सिर पर इसकी हल्के हाथ से मालिश करने से बाल उग जाते हैं और गंजापन दूर होता है.
6- कुछ दिनों तक, नहाने से पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। बाल सफेद से काले होने लगेंगे।
7- नीबू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर सिर पर लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं।
8- तिल का तेल भी बालों को काला करने में कारगर है।
9- आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नींबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से काले होने लगेंगे।
10- नीम का पेस्ट सिर में कुछ देर लगाए रखें। फिर बाल धो लें। बाल झड़ना बंद हो जाएगा।
11- चाय पत्ती के उबले पानी से बाल धोएं। बाल कम गिरेंगे। 12- बेसन मिला दूध या दही के घोल से बालों को धोएं। फायदा होगा। 13- दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ (रूसी) भी नहीं होगी।
12- 250 ग्राम अमरबेल को लगभग 3 लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाये तो इसे उतार लें। सुबह इससे बालों को धोयें। इससे बाल लंबे होते हैं।
13- त्रिफला के 2 से 6 ग्राम चूर्ण में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौह भस्म मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बन्द हो जाता है।
14- 50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें। इस उबले हुए पानी से बालों को धोएं। इससे बाल 1 महीने में ही काफी लंबे हो जाते हैं।
15- नीम और बेर के पत्तो को पानी के साथ पीसकर सिर पर लगा लें और इसके 2-3 घण्टों के बाद बालों को धो डालें। इससे बालों का झड़ना कम हो जाता है और बाल लंबे भी होते हैं।
16- लहसुन का रस निकालकर सिर में लगाने से बाल उग आते हैं।
17- सीताफल के बीज और बेर के बीज के पत्ते बराबर मात्रा में लेकर पीसकर बालों की जड़ों में लगाएं। ऐसा करने से बाल लंबे हो जाते हैं।
18- 10 ग्राम आम की गिरी को आंवले के रस में पीसकर बालों में लगाना चाहिए। इससे बाल लंबे और घुंघराले हो जाते हैं।
19- शिकाकाई और सूखे आंवले को 25-25 ग्राम लेकर थोड़ा-सा कूटकर इसके टुकड़े कर लें। इन टुकड़ों को 500 ग्राम पानी में रात को डालकर भिगो दें। सुबह इस पानी को कपड़े के साथ मसलकर छान लें और इससे सिर की मालिश करें। 10-20 मिनट बाद नहा लें। इस तरह शिकाकाई और आंवलों के पानी से सिर को धोकर और बालों के सूखने पर नारियल का तेल लगाने से बाल लंबे, मुलायम और चमकदार बन जाते हैं।
20- ककड़ी में सिलिकन और सल्फर अधिक मात्रा में होता है जो बालों को बढ़ाते हैं। ककड़ी के रस से बालों को धोने से तथा ककड़ी, गाजर और पालक सबको मिलाकर रस पीने से बाल बढ़ते हैं। यदि यह सब उपलब्ध न हो तो जो भी मिले उसका रस मिलाकर पी लें। इस प्रयोग से नाखून गिरना भी बन्द हो जाता है।
21- कपूर कचरी 100 ग्राम, नागरमोथा 100 ग्राम, कपूर तथा रीठे के फल की गिरी 40-40 ग्राम, शिकाकाई 250 ग्राम और आंवले 200 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी का चूर्ण तैयार कर लें। इस मिश्रण के 50 ग्राम चूर्ण में पानी मिलाकर लुग्दी(लेप) बनाकर बालों में लगाना चाहिए। इसके पश्चात् बालों को गरम पानी से खूब साफ कर लें। इससे सिर के अन्दर की जूं-लींकें मर जाती हैं और बाल मुलायम हो जाते हैं।
22- गुड़हल के फूलों के रस को निकालकर सिर में डालने से बाल बढ़ते हैं।
23- गुड़हल के ताजे फूलों के रस में जैतून का तेल बराबर मिलाकर आग पर पकायें, जब जल का अंश उड़ जाये तो इसे शीशी में भरकर रख लें। रोजाना नहाने के बाद इसे बालों की जड़ों में मल-मलकर लगाना चाहिए। इससे बाल चमकीले होकर लंबे हो जाते हैं।
24- बालों को छोटा करके उस स्थान पर जहां पर बाल न हों भांगरा के पत्तों के रस से मालिश करने से कुछ ही दिनों में अच्छे काले बाल निकलते हैं जिनके बाल टूटते हैं या दो मुंहे हो जाते हैं।
25- त्रिफला के चूर्ण को भांगरा के रस में 3 उबाल देकर अच्छी तरह से सुखाकर खरल यानी पीसकर रख लें। इसे प्रतिदिन सुबह के समय लगभग 2 ग्राम तक सेवन करने से बालों का सफेद होना बन्द जाता है तथा इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।
26- आंवलों का मोटा चूर्ण करके, चीनी के मिट्टी के प्याले में रखकर ऊपर से भांगरा का इतना डाले कि आंवले उसमें डूब जाएं। फिर इसे खरलकर सुखा लेते हैं। इसी प्रकार 7 भावनाएं (उबाल) देकर सुखा लेते हैं। प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ सेवन से करने से असमय ही बालों का सफेद होना बन्द जाता
है। यह आंखों की रोशनी को बढ़ाने वाला, उम्र को बढ़ाने वाला लाभकारी योग है।
27- भांगरा, त्रिफला, अनन्तमूल और आम की गुठली का मिश्रण तथा 10 ग्राम मण्डूर कल्क व आधा किलो तेल को एक लीटर पानी के साथ पकायें। जब केवल तेल शेष बचे तो इसे छानकर रख लें। इसके प्रयोग से बालों के सभी प्रकार के रोग मिट जाते हैं।
28- 100 ग्राम आंवले को 20 मिनट तक नारियल के तेल में उबाल लें| अब छन्नी से तेल को छान ले और किसी ठण्डे स्थान पर संभल कर रख दें| इसे लगाने से बाल फिर से बढ़ने लगेंगे|
29- 100 ग्राम मेहँदी के पत्तों को नारियल के तेल में 20 मिनट तक उबल लें और चान कर किसी ठन्डे स्थान पर रख दें| इसे बालों की जड़ो में लगायें|
30- नारियल तेल को बालों की जड़ो में लगाने से क्षतिग्रस्त बालों को फिर से ठीक किया जा सकता है|
31- ½ कप दही, 1 चम्मच पुदीना पाउडर और एक चम्मच जैतून का तेल मिला कर सिर में लगाने से बालों का झड़ना नियंत्रित किया जा सकता है|
5. बालों की मजबूती के लिए 1 चम्मच बादाम के तेल और 1 चम्मच नारियल के तेल को साथ में मिलाकर लगायें|
32. 2 चम्मच जैतून के तेल में 1 चम्मच नीबू का रस मिला कर लगाने से सर में खुजली और संक्रमण को कम किया जा सकता है|
33- 2 चम्मच काले चने के पाउडर में 1 चम्मच मेथी दाना पाउडर मिलाकर बाल धोने से बाल साफ़ हो जाते हैं और उनमे रूसी भी नहीं होती|

कद बढ़ाने के लिए घरेलु उपचार

Home remedies to increase length


कद बढ़ाने के लिये सूखी नागौरी, अश्वगंधा की जड़ को कूटकर बारीक कर चूर्ण बना लें। बराबर मात्रा में खांड मिलाकर किसी टाईट ढक्कन वाली कांच की शीशी में रखें। इसे रात सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ लें। इससे दुबले व्यक्ति भी मोटे हो जायेंगे। कम कद वाले लोग लंम्बे हो सकते हैं। इससे नया नाखून भी बनना शुरू होता है। इस चूर्ण का सेवन करने से कमजोर व्यक्ति अपने अंदर स्फूर्ति महसूस करने लगता है। इस चूर्ण को लगातार 40 दिन तक लेते रहें। इस चूर्ण को शीतकाल में लेने से अधिक लाभ मिलता है।

सावधानी

इस चूर्ण का सेवन करते समय खटाई, तली चीजें न खायें और जिन्हें आंव की शिकायत हो, तो अश्वगंधा न लें।
किसी कारणवश आप ये चूर्ण नहीं ले पा रहे हैं, तो सुबह व्यायाम करें। व्यायाम में ताड़ासन करना सर्वोत्तम है।
ताड़ासन दोनों हाथ उपर करके सीधे खड़े हो जायें, दीर्घ श्वास लें, हाथ ऊपर धीरे-धीरे उठाते जायें और साथ-साथ पैर की एडियां भी उठती रहे। पूरी एड़ी उठाने के बाद शरीर को पूरी तरह से तान दें और दीर्घ श्वास लें। इससे फेफडे़ फैलते हैं और स्वच्छ वायु मिलती भी है। ताड़ासन करने से स्नायु सक्रिय होकर विस्तृत होते हैं। इसी कारण यह कद बढ़ाने में सहायक साबित होता है।
  • 1 से 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण, 1 से 2 ग्राम काले तिल, 3 से 5 खजूर को 5 से 20 ग्राम गाय के घी में एक महीने तक खाने से लाभ होता है। साथ में पादपश्चिमोत्तानासन, पुल्ल-अप्स करने से एवं हाथ से शरीर झुलाने से ऊँचाई बढ़ती है।
  • मनुष्य को अपने हाथ तथा पैरों के बल झूलने तथा दौड़ने जैसी कसरतों के अलावा भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम तथा विटामिनों की जरूरत बहुत आवश्यक है तथा पौष्टिक भोजन करने से लम्बाई बढ़ने में फायदा मिलता है।

शरीर की लम्बाई बढ़ाने के लिये चुम्बकों का प्रयोग-

शरीर की लम्बाई बढ़ाने के लिये सेरामिक चुम्बकों का प्रयोग कनपटियों पर करना चाहिए। इस प्रयोग में उत्तरी ध्रुव वाले चुम्बकों का उपयोग एक दिन में सिर के दायीं ओर तथा दक्षिणी ध्रुव वाले चुम्बक का उपयोग सिर के बाईं ओर करना चाहिए। दूसरे दिन सिर के आगे और पीछे की ओर तथा सिर के अगले भाग पर उत्तरी ध्रुव वाला चुम्बक तथा इसके पिछले भाग पर दक्षिणी ध्रुव वाले चुम्बक का उपयोग करना चाहिए। चुम्बक का ऐसा प्रयोग लगातार तीन महीने तक करना चाहिए तथा इस प्रयोग के एक सप्ताह तक छोड़कर फिर दुबारा यह प्रयोग 3 महीने तक करना चाहिए और नियमित रूप से चुम्बकित जल को दवाई की मात्रा के बराबर पीना चाहिए

'प्रदर' से मुक्ति कैसे पाएँ


अधिकतर महिलाएँ इससे पीडित रहती हैं। रोगाधिक्य में स्थिति और भी दयनीय हो जाती है। रोग के कारण चेहरा सफेद पड जाता है और शरीर कमजोर हो जाता है। रोग के प्रारम्भ में पहले कमर में दर्द और पेडू में भारीपन एवं कभी कभी तनावयुक्त दर्द होता है। शरीर में भारीपन तथा पेशाब में रोग के लक्षण प्रकट होते हैं उक्त लक्षणो के बाद गर्भाशय से योनिद्वार में होकर एक स्राव निकलने लगता है। यह स्राव पहले पतला, स्वच्छ एवं गोद जैसा लसदार होता है। धीरे धीरे यह गाढा होकर मवाद की भाँति हो जाता है। रौगाधिक्य में हरा पीला, खून मिश्रित पनीर जैसा कभी गाढा तो कभी पतला अर्थात् अनेक प्रकार का स्राव होता है।

अत्यधिक मैथुन, मानसिक परेशानी, क्रोध, अत्यधिक गर्भपात, बार बार बच्चा जनना, अनियमित मासिक, कब्ज उत्तेजक पदार्थों का सेवन आदि अनेक कारण इसके लिए उत्तरदायी हैं। जननांगो की सफाई न रखना भी इस रोग का प्रमुख कारण है।

चिकित्सा सूत्र एवं आवश्यक बातें:- 

रोग के वास्तविक कारण को जानकर उसे दूर करें। अधिक आराम, मानसिक चिन्ता, शोक, क्रोध, ईर्ष्या , अत्यधित मैथुन, भय आदि से दूर रहें। अंतडियों की क्रिया को तेज रखा जाए ताकि कब्ज न हो पाये भोजन हल्का और सुपाच्य करना उचित है। मांस, मछली, तेज मसालेदार, बासी एवं गरिष्ठ भोजन, अत्यधिक खट्टी वस्तुए जैसे आचार आदि का सर्वथा त्याग करना चाहिए।


आयुर्वेदिक चिकित्सा:-

  • मुलेठी के चूर्ण में दो गुनी पिसी मिश्री मिला लें प्रातः 4 ग्राम दवा खाली पेट खिलावें तथा सवा सेर पानी में 10-15 बूंद चूने के पानी की डालकर थोडा थोडा पानी दिन भर पीते रहिए। 40 दिन तक करें।
  • पुष्यानुग चूर्ण 60 ग्राम
प्रदरान्तक लोह 10 ग्राम
चन्दनादि चूर्ण 60 ग्राम
चन्द्रमुखी चूर्ण 60 ग्राम
सबको मिलाकर प्रातः सायं 6-6 ग्राम दूध से लें।
इसके साथ अशोकारिष्ट 30 मिली बराबर पानी मिलार प्रातः सायं।
इसके उपरान्त शतावरी घृत या जीरक अवलेह 1 चम्मच लें। रोग जड से चला जायेगा फिर कभी दोबारा नहीं होगा।

मौसम्बी का रस लगाने से बाल बनते हैं मजबूत और स्‍मूथ


मौसम्बी का जूस स्वास्थ्य के लिये बहुत अच्छा होता है। इसके जूस में ढेर सारा मिनरल और पौष्टिक तत्व जैस विटामिन सी और पोटैशियम आदि पाया जाता है। यह हेल्दी होने के साथ ही उर्जा पहुंचाने वाला भी होता है। पर क्या आप जानती हैं कि मौसम्बी का जूस बालों के लिये कितना लाभदायी है। आप इस के रस का पैक बालों पर लगा सकती हैं, इससे आपके बालों में शाइन बढेगी और वह मजबूत बनेगें।

मौसम्बी का रस लगाने से -

1. हेयर पैकः  
बालों की चमक बढाने और उसे मुलायम बनाने के लिये मौसम्बी के रस को दही या मलाई के साथ मिक्स कर के सिर पर लगाएं। फिर आधे घंटे के बाद सिर को ठंडे पानी से धो लें। ऐसा हफ़ते में एक बार जरुर करें!
2. मजबूती के लियेः 
मौसम्बी का रस बालों में सीधे तौर पर भी लगाया जा सकता है। इसमें विटामिन सी होता है, जिससे आपके बालों में मजबूती आएगी। इसे हफ़ते में एक बार जरुर लगाएं।
3. बालों को रंगने के लियेः  
मौसम्बी के रस को हिना में मिक्स कर के बालों में लगाने से बालों पर अच्छा रंग आता है। मौसम्बी में कॉपर होने के नाते बालों में मिलेनिन नामक तत्व बढ जाता है, जिससे बाल प्राकृतिक रूप से काले दिखने लगते हैं।
4. बालों की ग्रोथ के लियेः 
एक्सपर्ट का मानना है कि जिन लोगों के बाल की लंबाई अच्छी नहीं है या फिर बाल बहुत झड़ते हैं, उन्हें हफ्ते में एक बार कम से कम मौसम्बी के रस का प्रयोग करना ही चाहिये।
5. मौसम्बी का सीधा उपयोगः 
मौसम्बी के जूस को पीने से भी बाल अच्छे हो जाते हैं। इसमें विटामिन सी होता है जो कि बालों के लिये बहुत अच्छा माना जाता है।

मौसमी से होनेवाली अन्य फायदे : राजेश मिश्रा 

  • मौसमी का रस पीने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा जीवनी शक्ति की वृद्धि होती है |
  • मौसमी खाने से दांत मज़बूत होते हैं और इसका रेशा कब्ज़ दूर करने में मदद करता है |
  • मौसमी के रस में क्षार तत्व अधिक होता है अत: यह खून की अम्लता (एसिडिटी) को दूर करता है|
  • मौसमी के रस को हल्का सा गर्म करके इसमें 5 - 6 बूँद अदरक का रस डालकर पीने से जुकाम में आराम मिलता है |
  • मौसमी या इसके रस के सेवन से रक्तवाहिनियों में कोलेस्ट्रोल जमा नहीं हो पाता और ह्रदय रोग होने की संभावना नहीं रहती | अतः इसका सेवन ह्रदय को स्वस्थ रखता है |
  • मौसमी का रस पीने से आंव या पेचिश का रोग दूर हो जाता है |
  • मौसमी के रस के सेवन से बुखार में काफी लाभ होता है |

पाचक शक्ति बढ़ाने वाले फल

अनार के सेवन से ‪आमाशय और‬ ‪आंतों‬ के  रोग में लाभ होता है 


अनार पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा फल है | इसके सेवन से भोजन को प्रति अरूचि की शिकायत खत्म हो जाती है | भूख खुलकर लगती है | अनार के सेवन से ‪आमाशय और‬ ‪आंतों‬ से संबंधित रोग- विकारों में लाभ होता है |

कुछ औष्धीय प्रयोग -

  • 100 ग्राम अनार रस में थोडा सेंधा नमक और शहद मिलाकर सेवन करने से पाचन क्रिया तीव्र होती है |
  • 20 ग्राम अनार रस मे पांच ग्राम भुने जीरे का चूरन और गुड़ मिलाकर सेवन करने से अजीर्ण में लाभ होता है |
  • 50 ग्राम अनार का रस पीने से पाचन की गड़बड़ी से उत्पन पेटदर्द शांत होता है |

जिनकी पाचन शक्ति बहुत कमज़ोर है।

  • ये उन लोगों के लिए बड़ी कारगर है जिनकी पाचन शक्ति बड़ी कमज़ोर है खाना नहीं पचता, इरिटेबल बावेल सिन्ड्रोम से जो पीड़ित हैं वजन नहीं बढ़ता है।
  • रोज ताजा दही के साथ दो चम्मच पीसी अलसी और उसमें दो चम्मच शुद्ध शहद मिला कर ले। कुछ दिनों में ही फायदा होगा।

मंगलवार, अप्रैल 21, 2015

5 गंभीर रोगों के लिए राज का कारगर घरेलु उपाय

ज्यादा वजन , डायबिटीज़, पैरों और घुटने का दर्द, किडनी की समस्या और थायरॉयड से ऐसे मिलेगी मुक्ति
Powerlifter Julia Vins (Russia)

इस आलेख में राजेश मिश्रा आप सभी के लिए लाये हैं 5 गंभीर बिमारियों से निजात पाने का सरल और कारगर उपाय| जिसमें डाइट, एक्सर्साइज़ और लाइफस्टाइल के तहत सजग रहने की सुन्दर पहेली बताई जा रही है| इसे अपनाकर आप और अपने परिवार के साथ-साथ रिश्तेदारों को कई रोगों से बचा सकते हैं...

ये रोग हैं- 1.वजन काम करना, 2 . डायबिटीज़, 3.पैरों और घुटने का दर्द, 4.किडनी की समस्या और 5. थायरॉयड|


कामकाजी हो या गृहिणी, घर-बार के अलावा उन्हें खुद को संभालने का वक्त बहुत कम मिल पाता है। उसी तरह से जिस तरह से अधिकांशतः पुरुष पैसे कमाने, व्यापार बढ़ाने,  परिवार की जिम्मेदारियों को निर्वाह करने में भूल जाते हैं की उनका शरीर कई रोगों का कारखाना (उद्योग) बन गया है|  कम वक्त और सही जानकारी के अभाव में, सैकड़ों बार कोशिश करने के बावजूद हमारा शरीर कई रोगों के आगोश में जकड जाता है| अब होगा सही इलाज़ परहेज़ और एक्सरसाइज़ से| 

वजन कम करना

वजन कम करना और चर्बी को गला देना दोनों ही अलग अलग बातें हैं। आज कल हम तरह तरह के जंक फूड खाते रहते हैं , जिनमें खाघ पदार्थ और पोषण के नाम पर कुछ भी नहीं होता, लेकिन हां, इससे फैट खूब मिल जाता है। यही फैट आपके शरीर में जम जाता है जो कई दिनों तक रहने से विष का रूप ले लेता है।

डाइट

  • मक्खन, घी, मलाई आदि न लें, क्योंकि इनसे दिल की नलियां संकरी होती हैं और वजन भी बढ़ता है।
  • मैदा, सूजी, सफेद चावल, चीनी, आलू यानी सफेद चीजों की मात्रा डाइट में काफी कम कर दें। दूध भी डबल टोंड लें।
  • पैक्ड चीजें मसलन पैक्ड जूस, बेकरी आइटम्स, सॉस आदि से बचें। रोजाना करीब आधे चम्मच से ज्यादा नमक न लें।
  • बहुत मीठी चीजों (मिठाई, चॉकलेट आदि) से बचें। ये वजन बढ़ाती हैं।
  • जितना हो सके हाई फाइबर और लो फैट वाली डाइट लें। गेहूं, ज्वार, ओट्स, बाजरा आदि को आटे या दलिया की तरह लें। इनका मिक्स दलिया अच्छे कॉलेस्ट्रॉल और ओमेगा-3 को बढ़ाता है।
  • रोजाना आधा चम्मच फ्लैक्स-सीड्स (अलसी के बीज) गुनगुने पानी के साथ खाएं। चाहें तो आटे में भी मिला सकते हैं। 5 किलो आटे के लिए 100-150 ग्राम फ्लैक्स-सीड्स काफी हैं।
  • रोजाना सुबह खाली पेट लहसुन की एक कली नॉर्मल पानी के साथ लें। इससे कॉलेस्ट्रॉल की प्रॉब्लम में आराम मिलता है।
  • रोजाना 5-6 बादाम और 1-2 अखरोट खाएं। बादाम-अखरोट रात भर भिगोकर लें। इससे पाचन अच्छा होता है और विटामिन ई की मात्रा बढ़ती है।
  • लो-ग्लाइसिमिक इंडेक्स (धीमें-धीमें ग्लूकोज में तब्दील होने वाले)वाले फल जैसे कि जामुन, पपीता, सेब, आड़ू आदि खाएं।
  • हरी सब्जियां, साग, शलजम, बीन्स, मटर, ओट्स, सनफ्लावर सीड्स, अलसी आदि खाएं। इनमें फॉलिक एसिड होता है, जो कॉलेस्ट्रॉल को काबू में रखता है।
  • ऑलिव ऑयल, तिल का तेल और सरसों का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं। ये हार्ट के लिए अच्छे हैं।
  • हफ्ते में 2-3 बार मछली या चिकन खा सकते हैं। हालांकि मछली बेहतर है। चिकन खाना चाहते हैं, तो एक बार में 100 ग्राम तक काफी है। ध्यान रहे कि यह तले-भुने और ज्यादा मसालेदार न हों।

नोट : ग्लाइसिमिक इंडेक्स उस लेवल को कहा जाता है, जिस पर खाने से मिलने वाले एनर्जी ग्लूकोज में बदलती है। हाई-ग्लाइसिमिक, यानी जिन चीजों का ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा होता है, वे तेजी से ग्लूकोज में बदलती हैं। इससे भूख जल्दी लगती है और हमें दोबारा खाना पड़ता है। नतीजा शरीर में फैट बढ़ जाता है, लो-ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाली चीजें धीरे-धीरे ग्लूकोज में बदलती हैं और काफी देर तक पेट भरा होने का अहसास कराती हैं। ये वजन घटाने के लिहाज से काफी फायदेमंद हैं।

एक्सरसाइज

  • अगर हार्ट पेशंट को दो मंजिल चढ़ने या 2 किमी पैदल चलने के बाद सांस फूलने जैसी कोई दिक्कत नहीं होती, तो वह सामान्य लोगों की तरह एक्सरसाइज कर सकता है, वरना डॉक्टर से पूछकर एक्सरसाइज करें।
  • किसी भी एक्सरसाइज के दौरान अगर दिक्कत (बेचैनी, दर्द, उलटी, घबराहट आदि) हो, तो वहीं रुक जाएं। डॉक्टर को दिखाने के बाद ही फिर से एक्सरसाइज का प्लान करें।
  • हल्की फिजिकल एक्सरसाइज के तौर पर रोजाना 45-50 मिनट वॉक करें। एक बार में नहीं कर सकते तो 15-15 मिनट के लिए तीन बार में करें।
  • जॉगिंग या एयरोबिक्स से पहले डॉक्टर से सलाह ले लें, क्योंकि बीपी का लोवर लेवल बढ़ता है।
  • हैवी एक्सरसाइज जैसे कि वेट लिफ्टिंग आदि न करें। अगर हार्ट प्रॉब्लम शुरुआती स्टेज में है, तो लाइट वेट लिफ्टिंग कर सकते हैं।
  • योग और प्राणायाम करें। लेकिन ध्यान रखें कि ये कार्डियो एक्सरसाइज के विकल्प नहीं हैं। उसके बाद ब्रिस्क वॉक, साइकलिंग आदि करें।
  • अनुलोम-विलोम करें। शीतली प्राणायाम खासतौर पर मन को शांत रखता है और बीपी को मेंटेन करता है। कपालभाति, भ्रस्त्रिका और कुंबज बिना डॉक्टर से पूछे न करें।
  • खाने के बाद न चलें, क्योंकि खाने के बाद हार्ट रेट बढ़ जाता है। चलने लगेंगे, तो हार्ट रेट और बढ़ कर डबल हो जाएगा। इससे घुटन हो सकती है। खाने के कम-से-कम 40-45 मिनट बाद चलें।
  • ऐसे आसन डॉक्टर की सलाह के बिना न करें, जिनमें सारा वजन सिर पर या हाथों पर आता है, जैसे कि मयूरासन, शीर्षासन आदि।

लाइफस्टाइल

  1. टाइम पर खाएं
  2. रेग्युलर फिजिकल एक्सरसाइज करें।
  3. स्ट्रेस से बचें

डायबीटीज (शुगर)

डायबीटीज के मरीज वजन कंट्रोल में रखें, तो इंसुलिन छूट सकता है और दवाएं भी 40 फीसदी तक कम हो सकती हैं। बेहतर फिटनेस के लिए यह जरूरी है।

डाइट

  • चीनी, शक्कर, गुड़, गन्ना, शहद, चॉकलेट, पेस्ट्री, केक, आइसक्रीम आदि मीठी चीजों से बचें।
  • हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजों से बचें, क्योंकि ये जल्दी ग्लूकोज में बदल जाती हैं। इससे शरीर में शुगर एकदम से बढ़ जाता है। इनमें प्रमुख हैं मैदा, सूजी, सफेद चावल, वाइट ब्रेड, नूडल्स, पित्जा, बिस्किट, तरबूज, अंगूर, सिंघाड़ा, चीकू, केला, आम, लीची आदि।
  • सब्जियों में आलू, अरबी, कटहल, जिमिकंद, शकरकंद, चुकंदर न खाएं। इनमें स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होता है, जो शुगर बढ़ा सकते हैं। हां, इन्हें कभी-कभार उबाल कर खा सकते हैं।
  • फलों में आम, चीकू, अंगूर, केला, शरीफा आदि से परहेज करें क्योंकि इनमें शुगर काफी ज्यादा होती है।
  • मैदा और मक्के का आटा न खाएं। इनका ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा होता है।
  • शुगर के मरीजों को प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा कॉम्बिनेशन लेना चाहिए। मसलन, नाश्ते में टोंड या डबल टोंड के दूध में बना दलिया लें या फिर ब्राउन ब्रेड के साथ अंडा लें। इसी तरह खाने में सब्जी के साथ दाल भी लें। इससे शुगर का लेवल सही रहता है। वजन कम करना है, तो कार्ब कम करके प्रोटीन बढ़ाएं। कार्बोहाइड्रेट से शुगर जल्दी बनती है, जबकि प्रोटीन से धीरे-धीरे शुगर रिलीज होती है, जिससे ज्यादा देर तक पेट भरा हुआ लगता है।
  • लो-ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाली चीजें (हरी सब्जियां, सोया, मूंग दाल, काला चना, राजमा, ब्राउन राइस, अंडे का सफेद हिस्सा आदि) खाएं।
  • खाने में करीब 20 फीसदी फाइबर जरूर हो। चोकर के साथ रोटी बनाएं। जौ (बारले), काला चना, लोबिया, राजमा, स्प्राउट्स आदि खाएं क्योंकि इनसे प्रोटीन और फाइबर दोनों मिलते हैं। स्प्राउट्स में एंटी-ऑक्सिडेंट भी काफी होते हैं।
  • दिन भर में 4-5 बार फल और सब्जियां खाएं, लेकिन एक ही बार में सब कुछ खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके खाएं। फलों में चेरी, स्ट्रॉबेरी, सेब, संतरा, अनार, पपीता, मौसमी आदि और सब्जियों में करेला, घीया, तोरी, सीताफल, खीरा, टमाटर आदि खाएं।
  • रोजाना 5-7 बादाम और 1-2 अखरोट खाएं। दालचीनी का एक टुकड़ा और एक चम्मच मेथीदाना रोजाना खाएं। दालचीनी को पीसकर और मेथीदाना को भिगोकर या आटे में मिलाकर खा सकते हैं।
  • घीया, करेला, खीरा, टमाटर, एलोवेरा और आंवले का जूस खासतौर पर फायदेमंद है।
  • लो फैट दही और स्किम्ड/डबल टोंड दूध लेना चाहिए। ग्रीन टी पीना अच्छा है। चाय के साथ हाई फाइबर बिस्कट या फीके बिस्कट ले सकते हैं।
  • छाछ और नारियल पानी पिएं। नीम-करेला पाउडर ले सकते हैं। फौरी तौर पर न सही, लेकिन लंबे वक्त में यह जरूर फायदा पहुंचाता है।

एक्सरसाइज

  1. रोजाना 50 मिनट वॉक करें। वॉक करते वक्त कम से कम 8-10 मिनट में 1 किमी चल लें। रोजाना 10,000 कदम चलने की कोशिश करें। नंगे पैर न चलें।
  2. अगर लगातार टाइम नहीं मिल रहा या ज्यादा थकान होती है, तो 15-15 मिनट 3 बार वॉक कर लें।
  3. साइकलिंग, स्वीमिंग और डांसिंग भी कर सकते हैं।
  4. 40-45 तक की उम्रवाले लोग हल्की वेट लिफ्टिंग भी कर सकते हैं। इससे मसल्स टोंड होती हैं।
  5. योग करें। पश्चिमोत्तान आसन, अर्धमत्स्येंद्र आसन खास फायदेमंद हैं।
  6. प्राणायाम खासकर कपालभांति और डीप ब्रीदिंग करें। मन शांत रहेगा।

लाइफस्टाइल

  • खाने में गैप न रखें। गैप रखने से शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव होता है। हर दो घंटे में कुछ खाएं।
  • खाने की मात्रा करीब-करीब बराबर ही रखें।
  • अपने छोटे-मोटे काम खुद करें। जितना चलेंगे और जितना कड़वा खाएंगे, उतना फायदा होगा।

पैरों और घुटने का दर्द

पैरों और घुटने के दर्द में एक साइकल बन जाती है दर्द और मोटापे की। दर्द है इसलिए चल नहीं पाते और चल नहीं पाते, इसलिए वजन बढ़ता जाता है। ऐसे में डाइट वजन घटाने का सबसे बड़ा जरिया है।

डाइट

  1. मोटे तौर पर डाइट हार्ट या डायबीटीज के मरीजों वाली ही रहेगी। यानी भरपूर फाइबर, कम तेल-मसाला और चिकनाई वाली चीजें खाएं। मीठा भी कम करें। इससे वजन कंट्रोल करने में मदद मिलेगी।
  2. प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर डाइट लें। प्रोटीन के लिए फिश, सोयाबीन, स्प्राउट्स, दालें, मक्का और बीन्स आदि को खाने में शामिल करें, जबकि कैल्शियम के लिए दूध और दूध से बनी चीजें जैसे कि पनीर, दही आदि खाएं।
  3. सामान्य तौर पर फल और सब्जियों (खासकर हरी पत्तेदार) को खाने में शामिल करें।
  4. डॉक्टर की सलाह पर कैल्शियम और विटामिन डी की टैब्लेट और सैशे भी ले सकते हैं।

एक्सरसाइज

  • जिन मरीजों को बैठने के बाद दर्द होता घुटने में दर्द होता है, वे ज्यादा से ज्यादा चलें। इससे दर्द कम होगा। दर्द ज्यादा है और चल नहीं सकते, तो लेटकर और खड़े होकर करनेवाली एक्सरसाइज करें, जैसे कि साइकलिंग, योग आदि।
  • धीरे-धीरे ही सही, चलें। लंबा नहीं चल सकते, तो जब भी वक्त मिले, 10-10 मिनट के लिए चलें।
  • फिक्स साइकलिंग और स्वीमिंग करें। सारी एक्सरसाइज मिलाकर रोजाना 50 मिनट जरूर करें।
  • बैठे-बैठे 15-20 मिनट में पैरों को गोल-गोल घुमाते रहें। सीधा तानें।
  • ताड़ासन, एकपादउत्तानासन, कटिचक्रासन, सेतुबंध, पवनमुक्तासन (बिना सिर उठाए), भुजंगासन, अर्धनौकासन और हाथों व पैरों की सूक्ष्म क्रियाएं करें।
  • अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका, कपालभाति प्राणायाम करें।

नोट

  1. स्क्वैटिंग (उठक-बैठक) न करें। घुटनों को मोड़कर और चौकड़ी मारकर न बैठें।
  2. लगातार एक ही पोजिशन में बैठे या खड़े न रहें। एक पैर पर वजन न डालें।
  3. वज्रासन जैसे घुटने मोड़ने वाले आसन न करें।
  4. ट्रेडमिल से बेहतर खुले में एक्सरसाइज करना है, क्योंकि ट्रेडमिल के वाइब्रेशन घुटने और एड़ी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

लाइफस्टाइल

  • ऐसा कोई काम न करें, जिससे घुटनों पर अतिरिक्त प्रेशर पड़े। फास्ट डांस, एयरोबिक्स और जॉगिंग न करें।
  • घुटनों में दर्द है तो इंडियन टायलेट यूज न करें। पिंडलियों में दर्द होता है तो कैल्शियम चेक कराएं।
  • अस्थमा
  • जितना वजन कम होगा, उतना ही हमारे लंग्स की कैपेसिटी बढ़ेगी। जिन मरीजों को एक्सरसाइज करने पर बेहतर महसूस होता है, वे कोई भी एक्सरसाइज कर सकते हैं, लेकिन जिन्हें दिक्कत होती है, वे डॉक्टर से पूछ कर ही करें।

डाइट

  • ई फाइबर और प्रोटीन से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। इस दौरान मसल्स ज्यादा काम करती हैं, इसलिए प्रोटीन से भरपूर दालें, सोयाबीन, अंडा आदि खाएं।
  • काली मिर्च, सौंठ, लौंग को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इस चूर्ण को आधा छोटा चम्मच खाने से पहले खा लें। हल्की गर्म तासीर होने से यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाती हैं।
  • एक्सरसाइज
  • नॉर्मल दिनों में 45-50 मिनट घूमें, लेकिन जब अस्थमा अटैक हो तो न घूमें। बाहर जाएं, तो नेबुलाइजर लेकर जाएं।
  • योग का रोल ज्यादा है। सर्वांगासन अस्थमा के मरीजों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है।
  • डीप ब्रिदिंग करें। मन शांत रहेगा, तो बेचैनी और घबराहट अटैक की वजह नहीं बनेगी। लाइफस्टाइल आमतौर पर लाइफस्टाइल सामान्य ही रहता है। छोटे-मोटे काम खुद करें। खुद को बहुत ज्यादा न थकाएं।

किडनी की समस्या

जिन लोगों को किडनी की समस्या है, उन्हें वजन कंट्रोल करने में खानपान पर खास ध्यान देना होता है। फिर भी यह तय है कि खाना ऐसा हो, जिससे किडनी पर फालतू जोर न पड़े। किडनी की प्रॉबल्म में प्रोटीन कम लेना चाहिए, क्योंकि किडनी जब सही से काम नहीं करती, तब अधिक प्रोटीन लेने से शरीर में प्रोटीन वेस्ट ज्यादा हो जाते हैं। इससे प्रोटीन टॉक्सिसिटी हो जाती है और किडनी फेल भी हो सकती है। प्रोटीन दालें, दूध, दही, पनीर, मीट, अंडा, मछली आदि में पाया जाता है।

डाइट

  1. टमाटर, पालक, मशरूम अवॉयड करें, क्योंकि ये यूरिक एसिड बढ़ाते हैं, जोकि किडनी के लिए नुकसानदेह है। हैवी दालों राजमा, आदि को अवॉयड करें।
  2. टिंडा, तोरी, सेब, अमरूद और पपीता खाएं। संतरा, मौसमी टमाटर, आंवला आदि कम खाएं क्योंकि इनमें पोटैशियम ज्यादा होता है। इसी तरह लौकी और करेले का जूस न पीएं। इनमें विटामिन सी होता है। ये किडनी के लिए अच्छे नहीं हैं।
  3. ऐपल, ब्लैकबेरी, मटर जैसे अल्केलाइन (जिनका पीएच लो रहता है) फल ज्यादा खाएं, ताकि एसिडिक हो गए सिस्टम को बैलेंस किया जा सके। एक्सरसाइज साइकलिंग, स्वीमिंग और ब्रिस्क वॉक को मिलाकर रोजाना 40-50 मिनट एक्सरसाइज करें। लेकिन खुद को बहुत ज्यादा थकाएं नहीं।
लाइफस्टाइल
  • दवा टाइम पर लें। खाना टाइम पर खाएं और डाइट को प्लान पूरी तरह फॉलो करें।
  • किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी) टाइम पर करवाएं।

थायरॉयड

हाइपोथायरॉइडिज्म वजन बढ़ने की एक बड़ी वजह है। थायरॉइड की गड़बड से हॉर्मोंस का बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे मोटापा बढ़ता है। इसके मरीज का तीखा, चटपटा, मीठा आदि खाने का दिल ज्यादा करता है, सो वजन बढ़ता जाता है।

डाइट

  1. ब्रोकली, गोभी, मशरूम, सोयाबीन आदि न खाएं, क्योंकि इनमें आयोडीन ज्यादा होता है। ये हाइपोथायरॉडिज्म में नुकसान पहुंचाती हैं।
  2. थायरॉयड से कोलेस्ट्रोल बढ़ सकता है। ऐसे में दिल की बीमारी में बताई गई डाइट को फॉलो करना बेहतर है।
  3. नमक कम करें। एक्सरसाइज 40-45 साल वाले वेट एक्सरसाइज और एयरोबिक्स करें। पहली कैटिगरी की एक्सरसाइज से स्ट्रैंथिंग होती है और दूसरी कार्डियो कैटिगरी में है।

लाइफस्टाइल

  • थोड़ी राहत मिलने पर दवाएं छोड़े नहीं, वरना समस्या के साथ मोटापा लौट आएगा।
  • लें नियमों की असरदार गोली
  • अगर आपको कोई बीमारी है और आपका वजन ज्यादा है, तो सिर्फ 10 फीसदी वजन कम करने से आपको बीमारी में 45 फीसदी तक फायदा हो सकता है।
  • एकदम वजन घटाने की न सोचें। तेजी से वजन घटाना चाहेंगे, तो न सिर्फ सेहत को नुकसान होगा, बल्कि मनचाहा रिजल्ट न मिलने से आपका विश्वास भी कम होगा और आप वजन घटाने की कोशिश छोड़ देंगे। महीने में 2 किलो वजन घटाना सही है।
  • पहचानें कि आपका मोटापा कार्ब्स की वजह से है या फैट की वजह से। आम पहचान यह है कि फैट आधारित मोटापा पूरे शरीर में होगा, जबकि कार्ब आधारित मोटापा तोंद पर ज्यादा होगा। आमतौर पर डायबीटीज, बीपी आदि में कार्ब वाला मोटापा ज्यादा होता है, क्योंकि लोग डाइट से फैट तो कम कर देते हैं, कार्ब नहीं। मोटापा पहचानने के बाद डाइट में बदलाव करें।
  • जितना वजन आपका 20 साल की उम्र में था, उसमें 5 किलो बढ़ा दें। आपका वजन उतना ही होना चाहिए, बाकी ओवरवेट हैं।
  • रोजाना 500 और हफ्ते में 3500 कैलरी कम करने से हफ्ते भर में करीब आधा किलो वजन कम हो जाएगा।
  • आयुर्वेद के मुताबिक मीठी, नमकीन और खट्टी चीजें वजन बढ़ाती हैं, जबकि तीखी, कड़वी और कसैली चीजें मोटापा को कंट्रोल करती हैं, इसलिए हर मीठी चीज के साथ तीखा या कसैला खाएं।
  • 20 से 40 साल की उम्र वाले हफ्ते में दो दिन एनएरोबिक्स यानी वे एक्सरसाइज जो रेजिस्टेंस के अगेंस्ट (स्क्वैश, रनिंग, जॉगिंग, बाधा दौड़, पंजा लड़ाना आदि) होती हैं, कर सकते हैं। अगर लगातार करते हैं और फिर छोड़ देते हैं, तो दिक्कत हो सकती है। 40 साल के बाद डॉक्टर की सलाह से करें।
  • हैवी एक्सरसाइज एक मिनट में 4-5 कैलरी से ज्यादा बर्न नहीं कर सकती। यानी एक घंटे मैराथन करने के बाद आप करीब 250-300 कैलरी बर्न कर सकते हैं, लेकिन उसके बाद अगर एक बालूशाही खा ली तो करीब 400 कैलरी आप शरीर में जमा कर लेते हैं। ऐसे में डाइट पर कंट्रोल बहुत जरूरी है।
  • पहली मंजिल के बाद लिफ्ट न लें।
  • घर में मोबाइल फोन और रिमोट यूज न करें।
  • मोबाइल पर बात करते हुए चहलकदमी करें।
  • कार ऑफिस से दूर पार्क करके ऑफिस तक वॉक करें।

सोमवार, अप्रैल 20, 2015

घर के छतों पर लगाएं निरोगी की खेती

मिलेगी सब्जी और निखरेगा परिवार, जब होगा घर पर ऐसा पैदावार

सौंफ, मेथी, धनिया, तुलसी, पुदीना आदि की भारतीय रसोई में खास जगह रही है। कैसा हो अगर आप राजेश मिश्रा के कहे अनुसार अपनी छत, बरामदे व गमलों में भी इन्हें जगह देकर अपना खुद का गार्डन तैयार करें और ताजी हरी सब्जियों व औषधीय पौधों को अपने और परिवार की सेहत के लिए इस्तेमाल में लाएं। मैं भी जब गाँव में रहता था तो अपने बड़े भाईजी तारकेश्वर मिश्रजी के साथ अपने पैतृक निवास भेल्दी (जिला-छपरा, बिहार) में उगाया करता था... कच्चे सब्जियों को खेतों से तोड़कर खाने का मजा ही कुछ और होता है... यह करना बहुत मुश्किल भी नहीं है, आइये जानें..

मैंने कोलकाता और कई अन्य राज्यों में गया जहाँ मैंने लोगों को अपने छतों और आसपास के जगहों में तुलसी व धनिए जैसे औषधीय गुणों से युक्त पौधे लगाते देखा। चाहें तो आप भी इस तरह के पौधों को अपनी जरूरत के अनुरूप लगा सकते हैं। इस तरह ये चीजें व्यावसायिक फसलों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों से भी मुक्त रहेंगी। ‘औषधियों को जितना ताजा इस्तेमाल में लाया जाए, उतना बेहतर। फसल के रूप में कटाई होने और सेवन में देरी होने पर उनके पोषक तत्वों में कमी आती रहती है। इन पौधों में विटामिन, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट व फाइटोन्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। शोध कहते हैं कि इन औषधियों का नियमित उपभोग संक्रमण, सूजन, जलन, मोटापे व जोड़ों के दर्द में राहत पहुंचाता है।
‘सबसे अच्छी बात है कि ऐसे पौधों को अधिक रख-रखाव की जरूरत नहीं होती। कम समय में भी इनकी देखभाल की जा सकती है। इन्हें जरूरत है तो बस थोड़ी सी धूप, पानी, रोशनी, हल्की मिट्टी और पत्तियों की खाद की। इनमें से कुछ पौधों को आप कांच की बोतल या छोटे गमलों में भी लगा सकते हैं।’ दो सप्ताह की अवधि के युवा पौधे यानी माइक्रोग्रीन, खासतौर पर फ्लेवर और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। माइक्रोग्रीन पौधों की उस अवस्था को कहते हैं, जब पौधों में शुरुआती पत्तियां आती हैं। माइक्रोग्रीन को आप साल भर उगा सकते हैं और ये 7 से 10 दिन में तैयार भी हो जाते हैं। इन्हें कम पानी की जरूरत होती है।
कैसे कर सकते हैं इन्हें तैयार, आइये जानें..

पुदीना

कैसे उगाएं: पुदीने के एक छोटे से गुच्छे को नीचे से लगभग दो इंच की लंबाई में काट लें। अब निचले हिस्से की पत्तियों को हटा लें और गांठ यानी पत्ती वाली जगह के नीचे से काट लें। अब तने को पानी के गिलास में रख लें। इसे तब तक हवा व रोशनी में रखें, जब तक इनमें जड़ें आने लगें। ऐसा होने में लगभग दो सप्ताह का समय लगता है। जैसे ही जड़ें निकलने लगती हैं, उन्हें लगभग 10 इंच गहरे गमले में रेतीली मिट्टी में बो दें। मिट्टी में नमी बनाए रखें। बहुत अधिक पानी न डालें। इस पौधे को हर रोज 5 से 6 घंटे की सूरज की रोशनी में रखना जरूरी है।

उपयोग करें: पुदीने की सुगंध और फ्लेवर चटनी, शीतल पेय व सलाद में खासे पसंद किए जाते हैं। पुदीने का रस अपाचन और मरोड़ में लाभ पहुंचाता है। 2012 में बायोशिमी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार पुदीने में मौजूद एक तत्व प्रोस्टेट कैंसर को बढ़ाने वाली कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। नई दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट व डायटिक्स सौम्या श्रीवास्तव के अनुसार, ‘पुदीना त्वचा के लिए फायदेमंद है। त्वचा के संक्रमण में भी इससे राहत मिलती है। इसीलिए इसे क्लिंजर व टोनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।’

तुलसी

कैसे उगाएं: तुलसी के बीजों को छोटी सी मटकी में मिट्टी में एक चौथाई इंच गहरे दबा दें। इस मिट्टी में रेत, सामान्य मिट्टी व खाद मिली होनी चाहिए। जब तक बीज फूटने न लगे, तब तक मिट्टी में नमी का बने रहना जरूरी है। इसमें पांच दिन से तीन सप्ताह का समय लग सकता है। अब जैसे-जैसे दो से तीन पत्तियों के जोड़े बनते रहें, इन्हें 6 से 8 इंच के कंटेनर में बोएं। मिट्टी में नमी बनाए रखें। हर दिन पौधे को एक से दो घंटे की धूप दें।

उपयोग में लाएं: आयुर्वेदिक दवाओं में तुलसी का काफी इस्तेमाल किया जाता है। तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुरता होती है। साथ ही इससे रक्त में ग्लूकोज व शर्करा के स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है। उबलते हुए पानी में तुलसी की तीन से चार पत्तियां डाल कर इसकी भाप भी ले सकते हैं, जिससे श्वसन संबंधी संक्रमण को दूर करने में मदद मिलती है। तुलसी के रस का घर में छिड़काव करने से मक्खी व मच्छर दूर रहते हैं। ब्रिटेन में वर्ष 2009 में ब्रिटिश फार्मास्युटिकल कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए एक अध्ययन के अनुसार तुलसी से सूजन व जलन को 73% तक कम किया जा सकता है।

लेमनग्रास

कैसे उगाएं: लेमनग्रास के डंठल को जार में एक इंच पानी डाल कर रखें। दो-तीन दिनों के भीतर जड़ों में स्प्राउट्स निकलेंगे। इन्हें हल्की मिट्टी में दबा दें। इनमें खूब पानी दें, पर मिट्टी पूरी तरह पानी में डूबी नहीं होनी चाहिए।
उपयोग में लाएं: थाई और वियतनामी व्यंजनों में इस फ्लेवर का काफी इस्तेमाल किया जाता है। अनीता अग्रवाल के अनुसार, ‘ऐसे लोग जिन्हें कब्ज रहता है, वे चाय में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।’ लेमनग्रास की चाय पाचक ग्रंथि की सफाई करती है, जिससे मधुमेह होने की स्थिति में रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। वर्ष 2011 में प्रकाशित जर्नल ऑफ एथनोफार्मेकोलॉजी के अनुसार लेमनग्रास से तनाव को कम करने में भी मदद मिलती है।

मेथी

कैसे उगाएं: छोटे पौधे के रूप में इसे उगाने के लिए केवल पांच से छह दिन का समय लगता है। इसके बीजों को रुई और ऊन के गोले में फैला कर इन्हें रोशनी में रखें, पर सीधे सूरज की धूप इन पर नहीं पड़नी चाहिए। पानी सूखने के बाद ही इन पर पानी का छिड़काव करें।

उपयोग में लाएं: मेथी से ग्लिसमिक इंडेक्स काबू में रहता है और यह सूजन व जलन को भी कम करता है। ग्लिसमिक इंडेक्स भोजन में मौजूद विभिन्न तरह के काबरेहाइड्रेट के रक्त शर्करा पर होने वाले असर का मापक है। सरसों और मेथी को पीस कर पट्टी पर इसका लेप करके आर्थराइटिस में दर्द वाले जोड़ पर लगाने से आराम मिलता है। श्रीवास्तव कहते हैं, ‘प्रसव के बाद महिलाओं के लिए मेथी का सेवन जरूरी बताया जाता है। इसमें मौजूद डायोज्गेनिन माताओं में अधिक दूध बनाता है। जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार मेथी की हर्बल चाय पीने से मांओं में अधिक दूध बनता है। कढ़ी, दाल, परांठा आदि भारतीय व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया ही जाता है।’

सरसों

कैसे उगाएं: मेथी की तरह ही समान प्रकिया सरसों के लिए अपनाएं।
उपयोग में लाएं: आशुतोष गुलेरी के अनुसार, ‘सरसों की पत्तियों में फाइटोन्यूट्रिएंट्स, विटामिन, मिनरल व फाइबर प्रचुरता में होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखते हैं। सरसों के स्प्राउट्स का सेवन ऑस्टिओपरोसिस और एनीमिया में राहत पहुंचाता है। इसके अलावा हृदय रोगों, अस्थमा, आंत व प्रोस्टेट कैंसर में भी राहत मिलती है।’ श्रीवास्तव के अनुसार, ‘एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुरता के साथ सरसों बुढ़ापे की प्रक्रिया को भी धीमा करती है। जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार इससे एल्जाइमर्स रोग होने की आशंका भी कम हो जाती है।
गुलेरी यह भी कहते हैं, ‘हाइपरटेंशन के मरीजों को इसका इस्तेमाल ध्यानपूर्वक करना चाहिए। सरसों का अधिक और बार-बार इस्तेमाल रक्त के दबाव को बढ़ा देता है।’

सौंफ

कैसे उगाएं: बीजों को दस इंच गहरे गमले में मिट्टी में दबाएं। इस गमले को पॉलीथीन से ढंक दें। जैसे ही अंकुरण होने लगे, गमले को रोशनी में रख दें। पानी का छिड़काव मिट्टी सूखने पर ही करें।
उपयोग में लाएं: सौंफ में मौजूद आयरन, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और विटामिन हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। आशुतोष कहते हैं, ‘सौंफ हाजमे को दुरुस्त रखती है, जिससे अतिरिक्त वायु और तरल बाहर निकलते हैं। पाचन दुरुस्त रखने वाले इन्जाइम्स बाहर निकलते हैं। इससे पीरियड सिस्टम ठीक होता है।

धनिया

कैसे उगाएं: सौंफ की तरह ही यही प्रक्रिया धनिये के साथ अपनाएं।
उपयोग में लाएं: धनिये को शीतल गुणों के कारण जाना जाता है। यह मधुमेह में भी लाभकारी है और कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, ‘धनिये के एंटीसेप्टिक गुण मुंह के छाले व अल्सर में फायदा पहुंचाते हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट्स आंखों के लिए लाभकारी हैं।’ इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार रूमेटॉयड आर्थराइटिस के लिए उपयोगी सूजन को भी कम रखने में यह असरकारी है। ताजगी से भरपूर यह औषधि चीजों के फ्लेवर को भी बढ़ा देती है। आप इसे किसी भी सब्जी, सूप, दही, चावल में इस्तेमाल कर सकते हैं।

शनिवार, अप्रैल 18, 2015

पुरुषों की यौनिक आम समस्याएँ

संभोग क्रिया के समय नशीले पदार्थों के सेवन से बचे, तनावमुक्त रहे
Common Sexual problem in Men


आमतौर पर महिलाएं सेक्स संबंधी समस्याओं से घिरी रहती है, लेकिन ऐसा नहीं कि पुरूषों को यौन समस्याएं नहीं होती। पुरूषों में अकसर तनाव संबंधी समस्याओं के कारण यौन समस्याएं होती है। विटामिन बी के सेवन से पुरूष सेक्स संबंधी कई समस्याओं से अपना बचाव कर सकते हैं। बहरहाल, आइए जानते हैं पुरूषों में सेक्स संबंधी समस्याओं के बारे में।
पुरुषों में सेक्स समस्याओं की बात आते ही सबसे पहले उन लोगों पर ध्यान जाता है, जो चाह कर भी सेक्स में रुचि नहीं ले पाते हैं या जिनकी सेक्स करने में कोई दिलचस्पी नहीं होती।
सेक्स क्षमता में कमी पुरुषों में आम समस्या बन चुकी है। इसके वास्तविक कारण होते हैं सेक्स हॉरमोन टेस्टोस्टेरोन की कमी। पुरुषों में 40 की उम्र के पार होने पर रक्त में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा में कमी आना एक आम बात है। हार्मोन में कमी उम्र के साथ जुड़ी समस्या है लेकिन कुछ लोग अपनी उम्र की शुरुआत में ही इससे पीड़ित हो जाते हैं। ये डाइबिटीज या अन्य तनाव संबंधी कारणों से भी पनप सकता है। रक्त में टेस्टोस्टेरोन की कमी से शरीर में थकान, दिमागी परिवर्तन, अनिद्रा के साथ ही सेक्स की चाहत में कमी हो जाती है।
यौन समस्याओं में सबसे आम समस्या है पुरुषों में शीघ्रपतन। सेक्स क्रिया के दौरान पुरुष स्खलन होने के साथ ही पुरुष की उत्तेजना शांत हो जाती है फिर चाहे उसकी महिला साथी की कामोत्तेजना शांत न भी हो।
ज्यादातर लोगों में सेक्स में दिलचस्पी खत्म होने का सबसे बड़ा कारण इरेक्टाइल डिस्फंक्शन यानी लिंग की मांसपेशियां कमजोर पड़ना है। ये समस्या कई बार विटामिन बी के सेवन न करने से, कई बार बुरी आदतें व लाइफस्टाइल के कारण हो सकती है। कई लोगों में तनाव संबंधी समस्याओं के कारण ऐसा होता है।
शराब पीने वालों कोकीन, आदि ड्रग्स लेने वाले लोग सेक्स के प्रति उदासीन होते हैं। मोटापा व्यक्ति को सेक्स से विचलित करता है। कई बीमारियां जैसे- हृदय रोग, एनीमिया और मधुमेह जैसी बीमारियां भी पुरुष को सेक्स के प्रति उदासीन बनाती हैं।
तनाव संबंधी समस्याएं या अत्यधिक व्यस्त रहने वाले लोगों का सेक्स जीवन भी उदासीन हो जाता है।
बहुत से लोगों को यह भम्र हो जाता है कि एक उम्र के बाद शरीर में सेक्स शक्ति में कमी आ जाती है। लेकिन ये धारणा गलत है क्योंकि यदि इस उम्र के पुरुष अपने स्वास्थ्य की ठीक प्रकार से देखभाल करते हैं तो वह सेक्स का आनन्द उसी प्रकार से ले सकते हैं, जिस प्रकार से एक युवा पुरुष सेक्स क्रिया का आनन्द लेता है।
सेक्स इच्छा में कमी कई बार अधिक दवाइयों का प्रयोग करने, शरीर में रोगों का प्रभाव होने, मूत्रनली से संबंधित रोग होने, तनाव होने और मानसिक समस्या के कारण हो सकते हैं।
बढ़ती उम्र में पुरूषों में सेक्स इच्छा तेज हो जाना भी एक समस्या है जिसका कारण प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना है।
पुरूष अपनी यौन समस्याओं से निजात पाने के लिए विटामिन बी का सेवन कर, तनाव संबंधी समस्याओं को दूर कर और पौष्टिक आहार लेते हुए अपनी सही तरह से देखभाल कर सकते हैं।
हारमोन की बीमारियाँ
ज्यादातर हारमोनों से जुड़ी हुई बीमारियों में यौन इच्छा में कमी आ जाती है। इससे या तो जनन अंग ठीक से विकसित नहीं होते या फिर यौन इच्छा में कमी आ जाती है। पीयुषिका ग्रन्थि की बीमारियों के अलावा, अवटुअतिसक्रियता, अवटुअल्पसक्रियता, डायबिटीज़, और कुशिंग संलक्षण/बीमारी यौन इच्छा को कम कर सकते हैं।

कम विकसित जनन अंग

दोनों वृषणों के कम विकसित होने (छोटे आकार के होने) से पुरुष हारमोनों के स्त्रावित होने में कमी आ जाती है। ऐसे लोगों के जनन अंगों बगलों, दाड़ी और मूछों पर कम बाल उगते हैं। लिंग ठीक से तनाव नहीं होता और सम्भोग की इच्छा कम या बिलकुल नहीं होती। कभी-कभी वृषण का संक्रमण भी वृषण को नुकसान पहुँचा देता है (जैसे कि कोढ़ और कनफेड़ में)।


मुड़ा हुआ शिश्न

आखिर में व्यक्तिगत इच्छा पर निर्भर करता है। इसके लिए कोई भी सामान्य नियम नहीं बनाया जा सकता।


सम्भोग की अवधि

सम्भोग 3 से 30 मिनट तक चल सकता है। पाँच मिनट स्खलन की सबसे आम अवधि है। कई पुरुष और महिलाएँ सम्भोग की अवधि को लेकर असन्तुष्ट होते हैं और चाहते हैं कि वो इसे और अधिक बढ़ा सकें। अगर पुरुष वैसे सामान्य है और योनि में सामान्य चिकनाहट सेसम्भोग की अवधि बढ़ाई जा सकती है। सम्भवत: तीन मिनट से कम की अवधि महिला और पुरुष दोनों के लिए ही असन्तोष का कारण हो सकती है। एक बार उत्तेजित होने के बाद महिला कुछ समय बाद यौनानन्द की लहर/उच्च बिन्दू की स्थिति में पहुँच पाती है और तीन मिनट से कम में तो शायद ही कभी।


पुरुषों में लिंग में तनाव न होना

शिथिल अवस्था से लिंग का बढ़कर कड़ा हो जाना, उद्दीपन कहलाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसकी स्पंज जैसी थैलियों में खून भर जाता है। एक स्वस्थ पुरुष में लिंग के खड़े होने के लिए उत्तेजना का स्रोत मानसिक होता है। तनाव पूर्ण लिंग आसानी से योनि में प्रवेश कर सकता है।


शिश्न के स्राव और वीर्य

यौनिक उत्तेजना से मूत्रमार्ग की ग्रन्थियाँ एक थूक जैसा पदार्थ स्त्रावित करती हैं जिससे लिंग का अन्दर जाना आसान हो जाता है। कई पुरुष इस स्त्राव को वीर्य समझ लेते हैं। यह अक्सर चिन्ता और परेशानी का कारण होता है। हमें उन्हें बताना चाहिए कि ये स्त्राव वीर्य नहीं होता। वीर्य स्खलन के समय बहता है। उसे वो हस्तमैथुन के अन्त में देख सकते हैं। दोनों द्रव एकदम अलग-अलग दिखते हैं। वीर्य गाढ़ा होता है, सफेद और अपारदर्शी होता है और इसकी मात्रा 2 से 3 मिली लीटर (छोटे चम्मच) इतना होती है। यह एक साथ निकलता है। शिश्न का स्राव लिंग के खड़े होने के साथ और स्खलन से पहले निकलता है। यह पारदर्शी, पतला होता है, और ज्यादातर इसकी मात्रा कुछ बूँद ही होती है।


योनि का चिकना होना

जैसे पुरुषों में यह स्राव निकलता है वैसे ही महिलाओं में भी योनि में स्राव निकलता है जिससे योनि के चिकने होने में मदद मिलती है।


क्या उम्र से फर्क पड़ता है?

एक बार यौन सक्रियता की उम्र में पहुँचने के बाद (लड़कियों में 12 से 13 साल और लड़कों में 15 से 16 साल) महिलाएँ और पुरुष बुढ़ापे तक यौनिक रूप से सक्रिय रहते हैं। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में अण्डे बनने बन्द हो जाते हैं पर यौनिक क्रिया ज़ारी रह सकती है। कुछ महिलाएँ 50 की उम्र के बाद यौन क्रिया में हिस्सा लेना छोड़ देती हैं पर बहुत-सी नहीं भी छोड़तीं। पुरुषों में बुढ़ापे तक भी शुक्राणु बनते रह सकते हैं और वो सत्तर की उम्र के बाद तक भी यौन रूप से सक्रिय रह सकते हैं हालाँकि कम ताकत और जोश से। कभी कभार लिंग मुड़ा हुआ भी होता है। इससे इसके खड़े होने और अन्दर जाने में मुश्किल होती है। ऑपरेशन से यह ठीक हो सकता है|


गम्भीर निरुध्दप्रकाश

कुछ पुरुषों में गम्भीर निरुध्दप्रकाश होता है जिसका अर्थ है कि लिंग के शिश्न का ऊपरी सिरा की त्वचा का छेद बहुत छोटा होता है। इससे अपने आप सम्भोग नहीं रुकता, पर अगर शिश्न का ऊपरी सिरा खड़े हुए शिश्न में वापस चला जाता है, तो इससे सम्भोग के बाद सूजन और दर्द होता है। इससे पुरुष को सम्भोग से डर लगने लगता है। ऑपरेशन से समस्या का समाधान हो सकता है।


अल्सर और छूत

पेशाब के रास्ते के संक्रमण के कारण लिंग में दर्द और शोथ होने से सम्भोग के समय दर्द होता है। दर्द करने वाले अल्सर जैसे मुलायम व्रण में भी यौनिक सम्भोग पर रोक लगती है। परन्तु बिना दर्द वाले सिफलिस अल्सर में ऐसा नहीं होता। इन बीमारियों में प्रतिरोगाणु दवाओं से मदद मिलती है।


यौनइच्छा पर असर करने वाली दवाएँ

उच्च रक्तचाप, मिर्गी, दिमागी बीमारियों आदि से भी यौन इच्छा में कमी आ जाती है। लत - जिन लोगों को शराब की लत होती है उनमें यौन इच्छा की कमी होती है।



लिवर की बीमारियाँ

लिवर सिरोसिस और हैपेटाईटिस बी से भी यौन इच्छा में कमी आ जाती है। उम्र बढ़ना, लिंग के ठीक से खड़े न होने में मुश्किल आने लगती है। पुरुष इस बात को आसानी से नहीं स्वीकार पाते। पुराण की कहानी में याति नाम के राजा ने अपना यौवन वापस पाने के बदले में अपने बेटे को गद्दी सौंप दी थी। हमेशा युवा बने रहने की इच्छा दुनिया में हमेशा से रही है।

परिचय - 

कोई भी स्त्री या पुरुष जब दूसरे लिंग के प्रति आर्कषण महसूस करने लगता है तो उसी समय से सेक्स उनके लिए एक बहुत ही खास विषय बन जाता है। उनके मन में सेक्स के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है और शादी से पहले यह लोग सेक्स करने से भी पीछे नहीं हटते। सेक्स करने में जितना आनंद मिलता है उतनी ही उसके प्रति संवेदनशीलता बनी रहती है। इसी वजह से चाहे स्त्री हो या पुरुष दोनों में ही सेक्स के प्रति हमेशा एक भूख सी रहती है वह ज्यादा से ज्यादा सेक्स का मजा लेना चाहता है। ऐसे बहुत से लोग हैं जो सेक्स का मजा लेना चाहते हैं लेकिन सेक्स करते समय वह कुछ ही देर में ठंडे हो जाते हैं। ऐसे मामलों में उनके मन में यह बात घर कर जाती है कि उन्हें शीघ्रपतन का रोग है। ऐसे लोग वैसे तो पूरी तरह से स्वस्थ होते हैं लेकिन दिमागी रूप से बीमार हो जाते हैं। उनके मन में यह विचार भी आने लगते हैं कि अगर मैं संभोगक्रिया के समय अपने पार्टनर को संतुष्ट नहीं कर पाता तो वह मुझसे नफरत करने लग सकता है या मुझे छोड़कर जा सकता है। यह एक ऐसी दिमागी समस्या है जिसके कारण आज लगभग हर वर्ग का व्यक्ति परेशान है। संभोगक्रिया के समय जब पुरुष का वीर्य निकल जाता है तभी उसकी संभोगक्रिया और संतुष्टि का चक्र पूरा हो गया मान लिया जाता है क्योंकि चरम आनंद के साथ ही वीर्य के निकलने का संबंध भी जुड़ा है लेकिन इसके बाद भी पुरुष की अंदर की प्यास नहीं बुझती। इसी वजह से वह अंदर ही अंदर शर्मिंदगी से घुटता है इसमें अगर पुरुष सही तरह से और सही तरीके से संभोग करे तो वह इस क्रिया को इच्छा के अनुसार बढ़ा सकता है। इसके लिए उसे किसी तरह की दवा आदि न खाकर और उल्टे-सीधे नीम हकीमों के चक्कर में न पड़कर सिर्फ कुछ खास बातों की ओर ध्यान देने की जरुरत है।

संभोग करते समय जल्दबाजी न करें

संभोग करते समय किसी भी तरह की जल्दी करना या हड़बड़ाहट मचाना जल्दी वीर्यपात का कारण बनता है। किसी भी पति और पत्नी के बीच सेक्स संबंध सिर्फ खानापूर्ति के लिए या किसी भी काम को जल्दी से निपटाने के मकसद से नहीं होने चाहिए। ऐसे बहुत से व्यक्ति होते हैं जो संभोग करते समय तुरंत ही पूरे जोश में आ जाते हैं। उनकी उत्तेजना समय से पहले ही चरम सीमा तक पंहुच जाती है और जल्दी ही उनका वीर्यपात हो जाता है। कुछ समय में ही पुरुषों की ऐसी आदत से उनकी पत्नियां भी परेशान रहने लगती हैं क्योंकि उनको भी अपने पति की आदत से सेक्स में पूरी तरह से संतुष्टि नहीं मिल पाती है। इसलिए पुरुषों को संभोग करते समय किसी तरह की जल्दबाजी न करके धैर्यपूर्वक इस क्रिया को करनी चाहिए। इससे न सिर्फ पुरुष इस क्रिया को लंबा और संतुष्टि के साथ कर सकता है बल्कि स्त्री को पूरी तरह से यौन संतुष्टि मिलती है।

उत्तेजना पर ध्यान

पुरुष को अगर अपनी संभोगक्रिया को काफी देर तक करना चाहता है तो उसे अपनी उत्तेजना का खासतौर पर ध्यान रखना जरूरी है। संभोगक्रिया के समय उत्तेजना का बढ़ना और काफी समय तक रहना पुरुष की शारीरिक क्रियाओं पर निर्भर करता है। जैसे ही महसूस हो कि शरीर में उत्तेजना बढ़ रही है, लिंग सख्त होता जा रहा है तो उसी समय अपनी शारीरिक क्रियाएं बंद कर देनी चाहिए, एकदम से शांत हो जाए। इससे बढ़ी हुई उत्तेजना सामान्य होने लगती है। अगर उत्तेजना ज्यादा बढ़ जाती है और शारीरिक आघात जारी रहते हैं तो वीर्य को निकलने से रोक पाना संभव नहीं हो पाता। इसलिए उत्तेजना को ज्यादा नहीं बढ़ने देना चाहिए।

वातावरण का ध्यान

संभोगक्रिया करते समय वातावरण का भी खासतौर पर ध्यान देना पड़ता है। संभोगक्रिया में पूरी तरह आनंद और संतुष्टि तब तक नहीं मिल पाती जब तक इस क्रिया को बिना किसी डर के और निश्चिंत होकर न किया जाए। शादी के बाद सोने के लिए पति और पत्नी के लिए अलग से कमरे की व्यवस्था कर दी जाती है फिर भी कई बार इस व्यवस्था में अचानक किसी तरह की रुकावट आ जाती है तो ऐसे में उन्हें सेक्स संबंध नहीं बनाने चाहिए। कई बार पति-पत्नी अपने कमरे में आकर संभोगक्रिया करने लगते हैं तभी उन्हें अगर कोई आवाज दे देता है तो उस समय उनकी सेक्स संबंधों के दौरान बनी मानसिकता को तेज आघात पहुंचता है और यही जल्दी वीर्यपात का कारण बनता है। अगर पति और पत्नी अपने कमरे में आते हैं तो उन्हें तुरंत ही संभोगक्रिया में नहीं लग जाना चाहिए। कमरे में आते ही सबसे पहले आपस में किसी भी टाँपिक को लेकर बातें आदि करने लग जाएं। जैसे ही लगे कि अब घर में सब लोग सो गए हैं तब संभोगक्रिया करने के लिए तैयार हो जाए। कमरे में हरे रंग या आसमानी रंग का बल्ब जलाकर संभोगक्रिया करने से आनंद मिलता है।

संभोगक्रिया के समय विभिन्न आसनों का प्रयोग हानिकारक है

संभोगक्रिया के समय बहुत से पुरुष अपनी बीवियों को सेक्स के अलग-अलग आसनों को प्रयोग करने की प्रयोगशाला बना देते हैं। पुरुष अक्सर किताबों या फिल्मों में सेक्स करने के अलग-अलग तरीकों को देखकर अपनी पत्नी के साथ भी उसी तरह सेक्स करने के लिए जोर डालते हैं। लेकिन सेक्स करने के यह तरीके या आसन जो दिखाए जाते हैं उनको करना लगभग नामुनकिन होता है। इन अलग-अलग आसनों को करते समय या संबंध बनाते समय पुरुष इस कदर उत्तेजित हो जाते हैं कि उसके लिए संबंध बनाए रखना मुश्किल हो जाता है जिसकी वजह से वे शीघ्र स्खलित हो जाते हैं। पत्नी को भी ऐसा महसूस होता है कि उसका पति तो उसे किसी खिलौने की तरह प्रयोग कर रहा है जिसके कारण वह शारीरिक और दिमागी रूप से पीड़ित रहने लगती है। वैसे भी सेक्स संबंधों का जितना आनंद सामान्य आसन से मिलता है उतना अलग-अलग आसनों का प्रयोग करने से नहीं मिलता। बहुत से विद्वानों का कहना है कि जो व्यक्ति सामान्य आसनों का प्रयोग करके सेक्स संबंधों का आनंद उठा रहा है उन्हें भूलकर भी अलग-अलग आसनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके लिए सबसे अच्छा आसन है कि संभोगक्रिया के समय पत्नी को नीचे और पति को उसके ऊपर लेटना चाहिए। इस आसन को करते समय पुरुष का लिंग बहुत ही आसानी के स्त्री की योनि में प्रवेश कर जाता है और पुरुष संभोग के समय स्त्री के चेहरे के भावों को पढ़ सकता है। विराम के समय स्त्री के शरीर पर निश्चल लेटने से एक अनोखा सुख प्राप्त होता है।इसके बाद सिर्फ विपरीत रति वाले आसन को ही अच्छा माना गया है। इस आसन में पति नीचे लेटता है और पत्नी उसके ऊपर लेटती है। इसमें शरीर संचालन स्त्री और पुरुष दोनों मिलकर कर सकते हैं। इस आसन में भी सारी स्थितियां पहले आसन के ही जैसी होती हैं लेकिन विराम के समय आराम का सुख स्त्री को ही मिलता है। इन दोनों आसनों की खासियत यह है कि इसमें जब तक संभोगक्रिया चलती है तब तक बिना किसी परेशानी के चलती है। दूसरे किसी आसन में यह सुविधा नजर नहीं आती है। बाकी सारे आसनों में जो कमी नजर आती है वह यह है कि उनमें संभोग और विराम काल में स्त्री-पुरुष एक-दूसरे के सीने से लगकर आनंद नहीं उठा पाते। दूसरे आसनों में लिंग योनि में इतनी आसानी से प्रवेश नहीं कर पाता जितनी आसानी से पहले वाले आसन में हो जाता है। कई बार लिंग को योनि में प्रवेश कराने से पुरुष की उत्तेजना इतनी बढ़ जाती है कि योनि में प्रवेश के साथ ही पुरुष का वीर्य निकल जाता है। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय यह है कि जो व्यक्ति शीघ्रपतन रोग से ग्रस्त होता है उन्हें पहले वाले आसन में ही संभोग करना चाहिए।

संभोगक्रिया में अपने आप पर काबू रखें

सेक्स और संयम का आपस में बहुत ही गहरा संबंध है। बिना संयम के संभोगक्रिया चल ही नहीं सकती। वैसे भी कहते है कि संयम ही सेक्स की धुरी है और संयम हर क्रिया में बहुत जरूरी है। युवा वर्ग के लिए संयम रखना बहुत जरूरी है। बहुत से व्यक्ति जब देखते हैं कि घर में कोई नहीं है तो वह तुरंत ही मौके का फायदा उठाकर अपनी पत्नी के साथ संबंध बनाना चाहते हैं और तुरंत ही जल्दबाजी में संबंध लेते हैं। पत्नी भी इस चीज का विरोध नहीं कर पाती। इस प्रकार संबंध बनाते समय पुरुष की उत्तेजना शुरुआती दौर में ही चरम की स्थिति तक पंहुच जाती है। फिर किसी के आ जाने का डर उसे सबकुछ जल्दी-जल्दी करने पर मजबूर कर देती है। ऐसे समय में पुरुष का नाता संयम से बिल्कुल टूट जाता है और वीर्य जल्दी ही निकल जाता है। इसके अलावा और भी कई मौके आते हैं जब पति अपनी पत्नी के साथ संबंध बनाने का मौका छोड़ना नहीं चाहता जिसके कारण व्यक्ति शीघ्र स्खलन का शिकार हो जाता है। इसलिए थोड़े से मजे के चक्कर में अपने आपको शीघ्र स्खलन का रोगी न बनने दें। अगर इस स्थिति को संभाला नहीं जाता तो संभोग के नाम पर पुरुष सिर्फ स्खलन की क्रिया ही पूरी करेगा। इसमें स्त्री को संतुष्टि सिर्फ नाम के लिए ही मिल पाती है। इसलिए सेक्स के समय संयम के महत्व को समझना बहुत जरूरी है।

सांसों को सयंमित रखें

संभोग करते समय सांसों की गति को सयंमित रखकर चरम की तरफ तेजी से बढ़ती हुई उत्तेजना को कम किया जा सकता है। उत्तेजना के बढ़ने पर जब आपको महसूस हो कि आपके न चाहते हुए भी आपका वीर्यपात होने को है तो उसी समय अपनी शारीरिक गतिविधियों को बंद कर देना चाहिए। शरीर को एकदम ढीला छोड़ दें और आंखे बंद करके लंबी सांस भरें। सांस को एकदम से बाहर नहीं छोड़ना चाहिए। जितना समय सांस को लेने में लगे उससे दुगने समय तक सांस को रोककर रखना चाहिए। सांस को छोड़कर फिर थोड़ी देर तक रुकना चाहिए। इसके बाद दुबारा जितनी लंबी सांस ले सकते हैं लें। सांस लेकर कुछ देर तक रुकें और फिर धीरे-धीरे सांस को छोड़े। 2-3 बार ऐसा करने से बढ़ी हुई उत्तेजना धीरे-धीरे कम होने लगती है। ऐसा करने में अगर व्यक्ति सफल हो जाता हो तो उसके सेक्स संबंधों के समय में बढ़ोत्तरी होती जाती है।

प्राक-क्रीड़ा को लंबा न खींचे

कुदरत ने स्त्री के शरीर को इस प्रकार का बनाया है कि उसे देखते ही पुरुष के शरीर में उत्तेजना बढ़ने लगती है। शादी से पहले अगर कोई व्यक्ति किसी लड़की से संबंध नहीं बनाता तो स्त्री के शरीर को छूने की और देखने की लालसा उसमें बढ़ती रहती है। ऐसा ही बिल्कुल स्त्री के साथ भी होता है। पुरुष स्त्री के शरीर को देखता है़ उसके अंगों को सहलाता है, आलिंगन करता है, उसके शरीर को चूमता है आदि। इसी के साथ वह चाहता है कि स्त्री भी उसके उसके शरीर के साथ वैसा ही करे जैसा वह करता है और वह स्त्री को ऐसा करने के लिए उकसाता है यही प्राक-क्रीड़ा होती है। इन सभी क्रियाओं में स्त्री इतनी ज्यादा उत्तेजित नहीं होती जितना कि पुरुष हो जाता है। स्त्री के शरीर से छेड़छाड़ करने से या अपने गुप्तांग को स्त्री के हाथों से छुआने से, संभोग करने से पहले ही पुरुष की उत्तेजना इतनी तेज हो जाती है कि वह स्त्री के साथ संभोग करने से पहले ही अनिंयत्रित उत्तेजना का शिकार होकर ठंडा पड़ जाता है जिसके कारण स्त्री भी अपनी संभोग करने की इच्छा को मन में ही दबाकर रह जाती है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि शारीरिक उत्तेजना को ज्यादा लंबा न खींचे। प्राक-क्रीड़ा संभोग करने की क्रिया को शुऱू करने का एक जरुरी हिस्सा है लेकिन इसी में ही अपनी ऊर्जा को खर्च नहीं कर देना चाहिए।इस बारे में एक बात ध्यान रखना और भी जरूरी है कि पुरुष को स्त्री से अपने गुप्तांग को उत्तेजित नहीं करना चाहिए क्योंकि संभोगक्रिया करने के लिए स्त्री को तैयार होने में थोड़ा समय लगता है जबकि पुरुष उससे जल्दी उत्तेजित हो जाता है। संभोगक्रिया में लिंग मुंड की बहुत ही खास भूमिका होती है। लिंग मुंड की त्वचा बहुत ही संवेदनशील होती है। स्त्री द्वारा इसे ज्यादा छूने से संभोग करने से पहले ही व्यक्ति की उत्तेजना चरम सीमा पर पंहुचने लगती है। जब संभोग किया जाता है तो पुरुष आगे बढ़ने के स्थान पर वहीं ढेर हो जाता है। जिन लोगों की उत्तेजना बहुत तेजी से भड़कती है उन्हें शारीरिक छेड़छाड़ से बचना चाहिए। अगर पुरुष इस बात का ध्यान रखें तो सेक्स संबंधों के दौरान मिलने वाले आनंद की सीमा को बढ़ाया जा सकता है। कुछ महान लोगों का मानना है कि जिस व्यक्ति की कामशक्ति कमजोर है उन्हें प्राक-क्रीड़ा से बचना चाहिए लेकिन ऐसा करने से स्त्री को सेक्स के लिए दिमागी रूप से तैयार होने में थोड़ी परेशानी महसूस हो सकती है। इसलिए ऐसे व्यक्तियों को प्राक-क्रीड़ा के समय अपने सारे कपड़े नहीं उतारने चाहिए। कुछ समय तक स्त्री के शरीर के अंगों से छेड़छाड़ करके काम चलाया जा सकता है। जब संबंध बनाने हो तभी अपने आखिरी कपड़े को उतारना चाहिए और सेक्स में लीन हो जाना चाहिए। अगर शुरू में ही सारे कपड़े उतार दिये जाते हैं तो स्त्री के शरीर से लिंग आदि की रगड़ लगने से उसकी संवेदनशीलता बढ़ जाती है जिसके कारण जल्द ही वीर्यपात हो जाता है। संभोग करते समय कमरे में ज्यादा रोशनी न करके हल्की रोशनी वाला बल्ब लगाना चाहिए।

संभोग के समय गंदी बातें न करें

संभोगक्रिया के समय काफी लोगों की आदत होती है कि वह इस दौरान अश्लील और उत्तेजना बढ़ाने वाली बातें करते हैं और अपनी पत्नी से भी चाहते हैं कि वह भी उसी प्रकार की बातें करें। इससे एक तो पुरुष को मजा आता है और साथ ही उसकी उत्तेजना भी बढ़ने लगती है। इससे संभोग करने से पहले ही वह इतने उत्तेजित हो जाते हैं कि कुछ करने से पहले ही उनका वीर्यपात हो जाता है। इसलिए संभोग करने से पहले न तो खुद अश्लील बातें करें और न ही पत्नी को ऐसा करने के लिए उकसाएं। संभोगक्रिया के समय किसी भी प्रकार की उत्तेजना बढ़ाने वाली बातें करने के स्थान पर विराम के समय पत्नी से ऐसी बातें करें जिनका कि सेक्स से कोई संबंध न हो। ऐसा करने से एक तो बढ़ती हुई उत्तेजना कम होती है और दूसरा जल्दी वीर्यपात होने का डर नहीं रहता तथा दूसरी बातों के कारण स्त्री भी रुचि लेकर बातचीत में साथ देगी। ऐसी बातें करने से आत्मीयता बढ़ती है। अगर कोई व्यक्ति सेक्स संबंधों को ज्यादा नहीं खींच पाते तो कहीं न कहीं उसका कारण अश्लील और उत्तेजना बढ़ाने वाली बातचीत हो सकती है।

संभोगक्रिया के समय नशीले पदार्थों के सेवन से बचे

बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर नशीले पदार्थों का सेवन करके सेक्स किया जाए तो यह क्रिया ज्यादा समय तक और आनंदमय हो जाती है। यही सोचकर वह इसे करने के लिए शराब, भांग, गांजा, अफीम या दूसरी किसी तेज चीज का सेवन करते हैं। लेकिन इससे बस थोड़ी देर के लिए ही उत्तेजना पैदा होती है और जितनी तेजी से पैदा होती है उतनी ही तेजी से खत्म हो जाती है। नशा करके सेक्स करने वालों की कामशक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है और उनकी ऊर्जा समय से पहले ही समाप्त हो जाती है। इसके अलावा नशा करके सेक्स करने वालों का बर्ताव भी जानवरों जैसा हो जाता है। उसमें अच्छा-बुरा पहचान करने की क्षमता खत्म हो जाती है और वह अपनी पत्नी को जानवरों की तरह नोचने लगता है। पत्नी अपने पति के इस व्यवहार से प्रताड़ित होकर संभोगक्रिया का आनंद लेने के बजाय अपने आपको पति से पीछा छुड़ाने के उपाय ढूंढती रहती है। इसलिए मन से ऐसे विचारों को तुरंत ही निकाल देना चाहिए कि नशा संभोग करने की शक्ति को बढ़ाता है।

तनावमुक्त रहे

आज के समय में हर इंसान किसी न किसी तनाव से घिरा हुआ है चाहे वह तनाव खाने से संबंधित हो, सोने से संबंधित हो, दिमाग से संबंधित हो या शरीर से संबंधित हो। यही तनाव व्यक्ति की सेक्स पाँवर पर भी असर डालता है। व्यक्ति का कोई भी काम तनाव की हालत में हो सकता है लेकिन संभोगक्रिया तनाव के साथ नहीं हो सकती। अगर किसी व्यक्ति को बहुत ज्यादा तनाव होता है तो उसका शारीरिक संबंधों की तरफ ध्यान ही नहीं होता। अगर वह किसी प्रकार से अपने आपको इन संबंधों के लिए तैयार कर लेता है तो उसका शरीर साथ नहीं देता, अगर जैसे-तैसे शरीर को तैयार कर लिया जाता है तो जल्दी वीर्यपात हो जाने के कारण संभोगक्रिया का पूरा मजा खराब हो जाता है। इस समस्या से आज के समय में बहुत से युवक ग्रस्त हैं वह खुद मानते हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण तनाव होता है। तनाव उनकी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन गया है कि बाहर निकलने का नाम ही नहीं लेता।

चिकित्सा

* लगभग 10-10 ग्राम सफेद प्याज का रस और शहद, 2 अंडे की जर्दी और 25 मिलीलीटर शराब को एक साथ मिलाकर रोजाना शाम के समय लेने से संभोगशक्ति बढ़ जाती है।
* लगभग 5 बादाम की गिरी, 7 कालीमिर्च और 2 ग्राम पिसी हुई सोंठ तथा जरूरत के अनुसार मिश्री को एक साथ मिलाकर पीस लें और फंकी लें। इसके ऊपर से दूध पी लें। इस क्रिया को कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से संभोगक्रिया के समय जल्दी वीर्य निकलने की समस्या दूर हो जाती है।
* उड़द की दाल को पानी में पीसकर पिट्ठी बनाकर कढ़ाई में लाल होने तक भून लें। इसके बाद गर्म दूध में इस पिसी हुई दाल को डालकर खीर बना लें। अब इसमें मिश्री मिलाकर किसी कांसे या चांदी की थाली में परोसकर सेवन करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है। इस खीर को लगभग 40 दिनों तक प्रयोग करने से लाभ होता है।

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